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9 लाख 90 हजार का ठेका, 50 हजार की मूर्ति लगा दी, कलेक्टर-विधायक लोकार्पण करके भी चले गए

Mp Khargone Statue Row: मामला खुला तो अब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है. इसके अलावा पुराना टेंडर रद्द कर फिर से इसे मंगाने के आदेश दिए गए हैं. ठेकेदार ने भी अब माफी मांगी है.

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MP Khargone corruption in tantya mama statue installation
धातु की जगह सस्ते फाइबर की मूर्ति लगा दी गई. (Photo: ITG)
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सचिन कुमार पांडे
15 जनवरी 2026 (Published: 10:09 AM IST)
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मध्य प्रदेश के खरगोन में आदिवासी नेता और स्वतंत्रता संग्राम नायक टंट्या मामा भील की प्रतिमा लगाने में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया. आरोप है कि यहां एक तिराहे पर टंट्या मामा की मूर्ति लगाने के लिए 9 लाख 90 हजार रुपये का टेंडर जारी हुआ था. लेकिन जो मूर्ति लगी, वह सस्ते फाइबर की थी, जिसकी कीमत तकरीबन 50 हजार रुपये बताई जा रही है. हैरानी की बात यह है कि इस मूर्ति का लोकार्पण भी करा दिया गया था. वह भी कलेक्टर, विधायक और अन्य वीआईपी द्वारा.

पूरा मामला खुला तो अब कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की बात कही है. आजतक से जुड़े उमेश रेवलिया की रिपोर्ट के अनुसार मामला खरगोन के बिस्टान नाका तिराहे का है. 24 सितंबर 2025 को नगरपालिका परिषद ने इस तिराहे का सौंदर्यीकरण करने की मंजूरी दी थी. इसके लिए 40 लाख रुपये का बजट पास किया गया था. इसमें 9 लाख 90 हजार रुपये टंट्या मामा की नई प्रतिमा लगाने के लिए आवंटित किए गए थे. बताया गया है कि कलेक्टर की तरफ से साफ निर्देश था कि प्रतिमा पक्के पत्थर या फिर धातु की होनी चाहिए.

विधायक-कलेक्टर ने किया लोकार्पण

इसके बाद मूर्ति लगाई गई और 15 नवंबर को विधायक बालकृष्ण पाटीदार, कलेक्टर भव्या मित्तल, नगरपालिका अध्यक्ष छाया जोशी और भाजपा जिलाध्यक्ष नंदा ब्रह्माणे ने इसका लोकार्पण किया. हालांकि कांग्रेस नेताओं की शिकायत और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद सामने आया कि मूर्ति धातु की नहीं, बल्कि सस्ते फाइबर की है. यह बात सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया. वहीं नगरपालिका ने आपात बैठक बुलाई और संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया.

khargone statue row
सांसद-विधायक की मौजूदगी में हुआ प्रतिमा का अनावरण. (Photo: ITG)
ठेकेदार ने मांगी माफी 

इधर खुद को घिरते देख ठेकेदार ने पूरे मामले पर माफी मांगी है. साथ ही कार्रवाई से बचने के लिए कहा है कि वह फाइबर की मूर्ति को दान में दे रहे हैं. बहरहाल मूर्ति लगाने का पुराना टेंडर रद्द कर दिया गया है. नगरपालिका का कहना है कि इसके लिए दोबारा से टेंडर बुलाए जाएंगे और इस बार धातु की मूर्ति लगाएंगे. पूरे मामले पर कांग्रेस ने एक क्रांतिकारी और आदिवासी गौरव का अपमान करने का आरोप लगाया है.

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पूर्व विधायक और प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष रवि जोशी ने आरोप लगाया है कि 10 लाख रुपए के टेंडर के बदले मात्र 50 हजार रुपए की फाइबर मूर्ति लगा दी गई. अब अधिकारियों को बचाने के लिए 'दान-पत्र' लिखवाकर लीपापोती की जा रही है. कांग्रेस ने मांग की है कि केवल ठेकेदार नहीं, बल्कि उन इंजीनियरों और अधिकारियों पर भी FIR हो जिन्होंने बिना जांच के मूर्ति की फिटिंग कराई.

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