The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • MP Disability Quota Scam Visually impaired clerk drives car

जिसे न दिखे वो कार चलाए, जो चल न सके वो बाइक दौड़ाए, इन्होंने दिव्यांग कोटे का मजाक बना डाला

MP DivyangQuota Scam: पड़ताल में आरक्षण का गलत फायदा उठाने वाले अलकेश खाखेर (बाबू), राकेश तिवारी और रोहित शुक्ला के नाम सामने आए हैं. ये खुद को पन्नों पर दिव्यांग बताते हैं.

Advertisement
pic
25 मई 2026 (पब्लिश्ड: 11:11 PM IST)
MP DivyangQuota Scam
दिव्यांग कोटे का गलत इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

सरकारी नौकरी में एक 'दिव्यांग कोटा' होता है. शारीरिक रूप से 'अक्षम' माने जाने वाले कैंडिडेट इस कोटा के तहत सरकारी नौकरी में अप्लाई करते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश में तो इसके उलट ही कुछ नजर आ रहा है. यहां जो देख नहीं सकता वो (दृष्टिबाधित) वो कार चला रहा है. और जो चल नहीं पाता वो बाइक दौड़ा रहा है.

मध्य प्रदेश में ऐसे तीन कर्मचारियों का पता लगा है, जिन्होंने खुद को 40 से 43 प्रतिशत ‘डिसेबल’ बताकर दिव्यांग कोटा के तहत सरकारी नौकरी हासिल कर ली. लेकिन असल जिंदगी में वे बिल्कुल फिट पाए गए हैं. दैनिक भास्कर द्वारा की गई पड़ताल में आरक्षण का गलत फायदा उठाने वाले अलकेश खाखेर (बाबू), राकेश तिवारी और रोहित शुक्ला के नाम सामने आए हैं. ये खुद को पन्नों पर दिव्यांग बताते हैं.

अलकेश खाखेर

अलकेश खाखेर की 2014 में 'ब्लाइंड कोटे' के तहत सीधी भर्ती हुई थी. वे सामान्य प्रशासन विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर हैं. और पिछले चार सालों से प्रतिनियुक्ति पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के बंगले में तैनात हैं. मगर जब भास्कर ने उन पर थोड़ी निगरानी रखी, तो पता लगा कि ये तो कार चलाकर खुद बंगले तक जाते हैं. पहली मंजिल पर इनका ऑफिस है. वहां तक भी बिना किसी सहारे के जाते हैं. फिर दिनभर क्लेरिकल काम करते रहे.

नेत्ररोग विशेषज्ञ ने बताया कि 40 प्रतिशत से ज्यादा दृष्टिदोष वाला व्यक्ति बिना किसी सहायता के नहीं चल सकता. ऐसे व्यक्ति के लिए कार चलाना बहुत मुश्किल है. और जोखिम भरा भी. अलकेश के खिलाफ पहले भी शिकायतें हुई हैं. मगर कोई कार्रवाई नहीं. 

हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव शैलेंद्र सिंह का कहना है कि मामला सामने आने पर जांच होगी. 

राकेश तिवारी शिक्षक

राकेश तिवारी एक टीचर हैं, जो कागजों में अस्थिबाधित है. वे निवाड़ी जिले के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाते हैं. उनके पास 2023-2024 का प्रमाण पत्र हैं, जिसमें उन्हें 43 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांग बताया गया. डॉक्टर्स का कहना है कि इस स्थिति में व्यक्ति पैरों का इस्तेमाल सामान्य रूप से चलने-फिरने में नहीं कर सकता.

लेकिन लगता है राकेश जी काफी 'लकी' है. भास्कर का दावा है कि वे आसानी से पैदल चलते-फिरते हैं. टू व्हीलर भी चलाते हैं. और सोशल मीडिया पर खूब रील भी बनाते हैं. वे राजनीतिक रैलियों में काफी एक्टिव रहे.  

रोहित शुक्ला भी टीचर

रोहित शुक्ला निवाड़ी जिले में ही अन्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक हैं. उनके पास 24 जून 2024 का प्रमाण है, जिसमें उन्हें 40 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांग बताया गया. उन्होंने भी खुद को अस्थिबाधित बताया. मगर वे भी बड़े आराम से बाइक चलाते हैं. अपनी गड्डी लेकर स्कूल जाते हैं. मगर 40% वाले व्यक्ति को भी सहारे की जरूरत होती है.  

एक फर्जी विकलांग बर्खास्त

मामले पर निवाड़ी के जिला शिक्षा अधिकारी उन्मेश श्रीवास्तव ने कहा कि वे दिव्यांग शिक्षकों पर मिली शिकायतों पर नियमानुसार जांच करेंगे. बता दें कि सामाजिक न्याय विभाग ने 6 मार्च को स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के सत्यापन और पुनःपरीक्षण के निर्देश दिए थे. लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं दिखी. हालांकि, दिव्यांगता प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वालो में श्रम निरीक्षक नवनीत कुमार पांडेय को बर्खास्त किया जा चुका है.

वीडियो: कोर्ट के फैसले के बाद भी आसान नहीं विनेश फोगाट की राह, कौन सा नियम रोड़ा बन रहा?

Advertisement

Advertisement

()