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शराब पीकर ट्रेन के अंदर पेशाब और बदसलूकी... सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज की बहाली पर रोक लगाई

सिविल जज पर आरोप है कि उन्होंने नशे की हालत में ट्रेन के अंदर खूब हंगामा काटा. आरोप यह भी है कि उन्होंने अपने पास की बर्थ पर पेशाब कर दी, जबकि कोच में एक महिला यात्री भी मौजूद थी. Supreme Court ने इस मामले को ‘घिनौना' और ‘बेहद शर्मनाक’ बताया है.

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MP civil judge urinated inside train coach Supreme Court stays reinstatement
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की है. (फाइल फोटो: आजतक)
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अर्पित कटियार
13 जनवरी 2026 (Published: 11:40 AM IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश पर स्टे लगाया, जिसमें एक सिविल जज को दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था. ये वही सिविल जज हैं, जिन पर एक ट्रेन के अंदर नशे की हालत में यात्रियों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा था. कोर्ट ने इस मामले को ‘घिनौना' और ‘बेहद शर्मनाक’ बताया है. 

क्या है पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला 16 जून 2018 का है. आरोप है कि द्वितीय श्रेणी के एक सिविल जज ने भोपाल से जबलपुर लौटते वक्त शराब पी और नशे की हालत में ट्रेन के कोच में खूब हंगामा काटा. उन्होंने यात्रियों और टीटीई के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की.

हालात इतने बिगड़ गए कि यात्रियों को इमरजेंसी चेन खींचनी पड़ी. आरोप यह भी है कि उन्होंने नशे की हालत में अपने पास की बर्थ पर पेशाब कर दी, जबकि कोच में एक महिला यात्री भी मौजूद थी.

यात्रियों की शिकायत के बाद जज को पिपरिया स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया. रेलवेज़ एक्ट की धारा 145 के तहत मामला दर्ज हुआ और गिरफ्तारी भी हुई, हालांकि जमानती होने के कारण उन्हें तुरंत रिहा कर दिया गया. इसके बाद जज के खिलाफ दो जांचे एक साथ चलीं. एक आपराधिक जांच और एक विभागीय जांच.

आपराधिक मामले में, मार्च 2019 में जबलपुर के स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट ने जज को बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि कई अहम गवाहों ने प्रॉसिक्यूशन (अभियोजन) का साथ नहीं दिया और मेडिकल रिपोर्ट में भी शराब की पुष्टि नहीं हुई.

इसके बाद विभागीय जांच इसलिए शुरू हुई. क्योंकि जज ने न तो यात्रा की मंजूरी ली थी और न ही अपनी गिरफ्तारी की सूचना सीनियर अधिकारियों को दी थी. विभागीय जांच में जज को दोषी पाया गया. इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति ने उन्हें सेवा से हटाने की सिफारिश की, जिसे फुल कोर्ट ने मंजूरी दे दी.

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हाई कोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

इसके बाद जज ने बर्खास्तगी के खिलाफ अपील की. मई 2025 में एमपी हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने बर्खास्तगी को ‘मनमानी और असंगत’ बताते हुए जज की बहाली का आदेश दे दिया. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि कोच में पेशाब करना, वह भी महिला की मौजूदगी में, ‘सबसे बुरा और गंभीर मिसकंडक्ट’ है. कोर्ट ने बहाली के आदेश पर रोक लगाते हुए रजिस्ट्रार जनरल की अपील पर नोटिस जारी किया.

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केवल स्टे दिया है, अंतिम फैसला अभी आना बाकी है. आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है.

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