'मदर ऑफ ऑल डील्स क्या है?' यूरोप का टैरिफ घटाने वाली ट्रेड डील से भारत को कितना फायदा?
India-EU Summit 2026: भारत और EU का अनुमानित संयुक्त बाजार करीब 2091 लाख करोड़ रुपये का है. इस डील से करीब 2 अरब लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है. समझौते के तहत भारत के 99 फीसदी से ज्यादा एक्सपोर्ट को यूरोपीय बाजार में आसान एंट्री मिलेगी.

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन गई है. भारत की आर्थिक कूटनीति में इसे एक ऐतिहासिक पल माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी EU के साथ FTA को दुनिया की नजर में 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया है. वजह साफ है. यह डील सिर्फ टैरिफ खत्म करने या घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और EU के सदस्य देशों की करीब 2 अरब आबादी के बीच निवेश, नौकरियों, किसानों, छोटे-मझोले उद्यमियों, प्रोफेशनल्स और सर्विस सेक्टर तक के लिए नए मौके खोलती है.
भारत ने यूरोप के लिए अपने बाजार के दरवाजे पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा खोल दिए हैं. यूरोप ने भी ज्यादातर भारतीय सामानों पर टैरिफ खत्म या घटाने का ऐलान किया है. इस डील से 2032 तक भारत को EU के सामानों का एक्सपोर्ट दोगुना होने की उम्मीद है.
'मदर ऑफ ऑल डील्स' क्या है?
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है. FTA का मतलब होता है- दो देशों या समूहों के बीच ऐसा समझौता, जिसमें एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को खत्म या काफी कम कर दिया जाता है.
भारत और EU का अनुमानित संयुक्त बाजार करीब 24 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 2091 लाख करोड़ रुपये) का है. इस डील से करीब 2 अरब लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है. समझौते के तहत भारत के 99 फीसदी से ज्यादा एक्सपोर्ट को यूरोपीय बाजार में आसान एंट्री मिलेगी.
1. 'मदर ऑफ ऑल डील्स' में कौन-कौन से देश बैठे हैं मेज पर?
इस डील में एक तरफ भारत है, तो दूसरी तरफ यूरोपियन यूनियन (EU) के 27 यूरोपीय सदस्य देश शामिल हैं-
- ऑस्ट्रिया
- बेल्जियम
- बुल्गारिया
- क्रोएशिया
- साइप्रस
- चेकिया
- डेनमार्क
- एस्टोनिया
- फिनलैंड
- फ्रांस
- जर्मनी
- ग्रीस
- हंगरी
- आयरलैंड
- इटली
- लातविया
- लिथुआनिया
- लक्जमबर्ग
- माल्टा
- नीदरलैंड्स
- पोलैंड
- पुर्तगाल
- रोमानिया
- स्लोवाकिया
- स्लोवेनिया
- स्पेन
- स्वीडन
माने, भारत को एक साथ यूरोपियन यूनियन के सभी देशों के बाजारों तक पहुंच मिल रही है. अलग-अलग देशों से अलग-अलग समझौते करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एक ही डील से भारतीय एक्सपोर्टर्स को EU में फायदा मिलेगा.

2. भारत के लिए ये डील गेमचेंजर क्यों बताई जा रही है?
यह FTA ट्रेड वैल्यू के हिसाब से भारत के 99 फीसदी से ज्यादा एक्सपोर्ट के लिए बड़े पैमाने पर यूरोप के बाजार में आने देता है. इसके साथ ही संवेदनशील सेक्टर्स के लिए पॉलिसी स्पेस बनाए रखता है और भारत की डेवलपमेंट प्राथमिकताओं को मजबूत करता है. इस FTA के भारत को टैरिफ वाले 97 फीसदी सामान/सर्विस पर यूरोपीय बाजारों में तरजीह मिली है, जिसमें 99.5 फीसदी ट्रेड वैल्यू शामिल है, खासकर-
- टैरिफ वाले 70.4 फीसदी सामान/सर्विस (जो भारत के 90.7 फीसदी एक्सपोर्ट को कवर करते हैं) पर तुरंत टैरिफ खत्म कर दिया जाएगा. इससे मजदूरों और कारीगरों से जुड़े सेक्टर्स को सीधा फायदा मिलेगा. जैसे- कपड़ा, चमड़ा और जूते, चाय, कॉफी, मसाले, खेल का सामान, खिलौने, रत्न और आभूषण और कुछ समुद्री प्रोडक्ट्स.
- टैरिफ वाले 20.3 फीसदी सामान/सर्विस (जो भारत के 2.9 फीसदी एक्सपोर्ट को कवर करते हैं) पर 3 से 5 सालों में धीरे-धीरे टैरिफ खत्म किया जाएगा. इसमें कुछ समुद्री प्रोडक्ट्स, प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स, हथियार और गोला-बारूद आदि शामिल हैं.
- टैरिफ वाले 6.1 फीसदी सामान/सर्विस (जो भारत के 6 फीसदी एक्सपोर्ट को कवर करते हैं) को टैरिफ में मामूली छूट या टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के जरिए पहली तरजीह के साथ यूरोपीय बाजार में पहुंच मिलेगी. इसमें कुछ पोल्ट्री प्रोडक्ट्स, संरक्षित सब्जियां, बेकरी प्रोडक्ट्स, कारें, स्टील तथा कुछ झींगा/प्रॉन प्रोडक्ट्स शामिल हैं.
- भारत के कपड़ा, गार्मेंट्स, समुद्री प्रोडक्ट्स, चमड़ा, जूते, केमिकल, प्लास्टिक/रबर, खेल का सामान, खिलौने, रत्न और आभूषण जैसे कामगार बेस्ड सेक्टर अभी यूरोपीय यूनियन में 4 फीसदी से 26 फीसदी तक टैरिफ का सामना करते हैं. FTA लागू होते ही इन सेक्टर के प्रोडक्ट्स पर टैरिफ जीरो हो जाएगा.
- इन एक्सपोर्ट्स की कुल वैल्यू लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा है. जीरो टैरिफ होने से भारत के इन प्रोडक्ट्स की मुकाबला करने की क्षमता बढ़ेगी. इससे यूरोपीय और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की भागीदारी मजबूत होगी और साथ ही रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे.
- इन सामानों को बनाने में मजदूरों और कारीगरों का बड़ा रोल होता है. इनका ज्यादातर प्रोडेक्शन भी भारत के छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) में होता है. इस लिहाज से एक्सपोर्ट बढ़ेगा, तो MSME को नए ऑर्डर मिलेंगे, रोजगार के मौके बढ़ेंगे और किसानों और कारीगरों की आमदनी बढ़ेगी.
3. यूरोप को इस समझौते से मिलेगा क्या-क्या फायदा?
यूरोपियन यूनियन को भी इस डील से बड़ा फायदा होगा. यूरोपियन काउंसिल का कहना है कि यूरोपियन यूनियन को भारत टैरिफ में ऐसी छूट देगा जो उसके किसी भी दूसरे ट्रेडिंग पार्टनर को नहीं मिली है. इससे EU के एक्सपोर्ट के लिए भारतीय बाजार में बड़ी हिस्सेदारी लेने में मदद मिलेगी.
- यूरोपीय कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे 110 फीसदी से घटकर 10 फीसदी हो जाएगा. इसमें हर साल 2.50 लाख कारों का कोटा होगा. मशीनरी पर 44 फीसदी, केमिकल पर 22 फीसदी और फार्मास्यूटिकल्स पर 11 फीसदी तक के ऊंचे टैरिफ को ज्यादातर खत्म ही कर दिया जाएगा.
- यह समझौता EU से एक्सपोर्ट होने वाले एग्री-फूड प्रोडक्ट्स पर अक्सर लगने वाले बहुत ज्यादा टैरिफ (औसतन 36 फीसदी से ज्यादा) को हटाता है या कम करता है.
- FTA में EU ने अपने किसानों को शील्ड दी है. उसने कहा कि समझौते में यूरोपीय किसानों के लिए एक बहुत बड़ा बाजार खुल जाएगा. बीफ, चिकन चीनी या चावल जैसे सेंसेटिव यूरोपियन एग्रीकल्चर सेक्टर को बिल्कुल भी लिबरलाइज नहीं किया जाएगा.
- यूरोप को भारत जैसे बड़े बाजार में निवेश और बिजनेस बढ़ाने का मौका मिलेगा. भारत अपनी जरूरत का काफी सामान अभी दूसरे देशों से मंगाता है. यूरोप से आने वाले हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स से भारतीय इंडस्ट्रीज की लागत कम होगी और उन्हें ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़ने में मदद मिलेगी.
- यूरोप की वाइन पर टैरिफ 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी कर दिया जाएगा. आगे चलकर इसे 20 फीसदी तक कम कर दिया जाएगा. जैतून के तेल पर टैरिफ पांच सालों में 45 फीसदी से घटकर जीरो हो जाएगा. ब्रेड और कन्फेक्शनरी जैसे प्रोसेस्ड एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स पर 50 फीसदी तक के टैरिफ खत्म कर दिए जाएंगे.
सवाल 1- ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से किन सेक्टरों की चांदी होने वाली है?
इस डील से सबसे ज्यादा फायदा इन सेक्टरों को होगा-
- टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स
- लेदर और फुटवियर
- जेम्स और ज्वेलरी
- मरीन प्रोडक्ट्स
- एग्रीकल्चर और प्रोसेस्ड फूड (चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जी)
- केमिकल्स, प्लास्टिक और रबर
- इंजीनियरिंग और मेडिकल डिवाइस
- IT और प्रोफेशनल सर्विसेज
इन सेक्टरों में एक्सपोर्ट, रोजगार और निवेश तीनों बढ़ने की संभावना है.
सवाल 2- क्या ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ सिर्फ एक ट्रेड एग्रीमेंट है या इससे ज्यादा कुछ?
यह सिर्फ ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है.. यह एक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) है. इसमें निवेश, सेवाएं, स्किल और टैलेंट की आवाजाही, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, किसानों और MSME का संरक्षण, भारतीय छात्रों के लिए यूरोप में पढ़ने के मौके, भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति (AYUSH) को बढ़ावा, बौद्धिक संपदा (IPR) की सुरक्षा, स्टैंडर्ड और क्वालिटी नियम समेत कई बातें शामिल हैं.
यह डील भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का मजबूत खिलाड़ी बनाने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम है. 10.5 फीसदी तक कम टैक्स से भारतीय लकड़ी, बांस और हाथ से बने फर्नीचर की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ती है और बाजार में पहुंच बेहतर होगी. FTA हाई-वैल्यू, डिजाइन-ओरिएंटेड सेगमेंट में सुधार को सपोर्ट करता है. इससे ग्लोबल फर्नीचर सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को मजबूती मिलेगी.
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