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कभी नाम न सुना! ऐसे व्यक्ति को रतन टाटा 500 करोड़ रुपये दे गए, पता है क्यों?

Mohini Mohan Dutta: रतन टाटा की वसीयत में कई ऐसे नाम हैं, जिनके हिस्से में करोड़ों रुपये आएंगे. मगर एक नाम ऐसा है, जिसने हर किसी को चौंका दिया. वो नाम है 'मोहिनी मोहन दत्ता'. इनके हिस्से में Ratan Tata ने 500 करोड़ रुपये छोड़े हैं. आइए दत्ता के बारे में जानते हैं.

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7 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 8 फ़रवरी 2025, 06:35 AM IST)
Ratan Tata Mohini Mohan Dutta
रतन टाटा ने अपनी वसीयत में मोहिनी मोहन दत्ता के लिए 500 करोड़ रुपये छोड़े हैं. (PTI)
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पिछले साल दुनिया को अलविदा कहने वाले Ratan Tata की वसीयत में एक नया नाम सामने आया है. उनकी वसीयत में एक 'मिस्ट्री मैन' का नाम है, जिसके हिस्से में कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये आएंगे. जिस व्यक्ति का यहां जिक्र किया जा रहा है, उनका नाम मोहिनी मोहन दत्ता है. टाटा ने इनके नाम 500 करोड़ रुपये दिए हैं. जब रतन टाटा जैसी शख्सियत वसीयत छोड़कर जाती है, तो जाहिर है उसकी चर्चा जरूर होगी. ऐसे में दत्ता का नाम सामने आना हर किसी को चौंकाता है.

मोहिनी मोहन दत्ता, जिनके बारे में पहले कोई खास जानकारी नहीं थी, एक पहेली की तरह सामने आए हैं. दत्ता कथित तौर पर जमशेदपुर के एक बिजनेसमैन हैं. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, रतन टाटा ने अपनी वसीयत में दत्ता के नाम 500 करोड़ रुपये किए हैं. रतन टाटा का अक्टूबर 2024 में निधन हुआ था. टाटा बेहद प्राइवेट लाइफ जीते थे, इसलिए दत्ता का नाम सामने आना सबको हैरान करता है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन टाटा ने अपनी वसीयत में अपने भाई-बहनों के लिए भी हिस्सा छोड़ा है. उनके बटलर सुब्बैया और उनके जर्मन शेफर्ड डॉगी टिटो का भी वसीयत में हिस्सा है. रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर को 86 साल की उम्र में हुआ था. वे टाटा ग्रुप की पैरेंट कंपनी टाटा संस के पूर्व चेयरमैन थे.

कौन हैं मोहिनी मोहन दत्ता?

मोहिनी मोहन दत्ता एक बिजनेसमैन हैं, जो उम्र के 80वें पड़ाव पर हैं. रतन टाटा से उनकी पहली मुलाकात 1960 के दशक की शुरुआत में हुई थी. यह मीटिंग कथित तौर पर जमशेदपुर के डीलर्स हॉस्टल में हुई थी, जब रतन टाटा की उम्र 24 साल थी. यह वो समय था जब टाटा अपने फैमिली बिजनेस को फैलाने के रास्ते तलाश रहे थे.

दत्ता के मुताबिक, रतन टाटा से मिलने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. उनका करियर संवारने में टाटा ग्रुप की अहम भूमिका है. उनका सफर ताज ग्रुप से शुरू हुआ और बाद में उन्होंने स्टैलियन ट्रैवल एजेंसी की शुरुआत की. 2013 में उनकी कंपनी का ताज सर्विसेज में मर्जर हो गया, जो ताज होटल्स का ही एक हिस्सा है. दत्ता न केवल रतन टाटा के बिजनेस एसोसिएट थे, बल्कि उनके बेहद करीबी दोस्त भी थे.

दत्ता की बेटी का भी टाटा ग्रुप के साथ खास जुड़ाव है. उन्होंने ताज होटल से अपने करियर की शुरुआत की थी और लगभग एक दशक तक टाटा ट्रस्ट के साथ काम किया. दिसंबर 2024 में, मुंबई के NCPA में रतन टाटा के बर्थ एनिवर्सरी इवेंट में दत्ता भी शामिल हुए थे. इस इवेंट में रतन टाटा के बेहद करीबी लोग ही बुलाए गए थे.

ऐसे होगा रतन टाटा की संपत्ति का बंटवारा

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, दत्ता को रतन टाटा की बची हुई प्रॉपर्टी का एक तिहाई हिस्सा दिया गया है, जिसमें 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का बैंक डिपॉजिट और रतन टाटा की निजी वस्तुएं जैसे पेंटिंग और घड़ियों की नीलामी से मिली रकम शामिल है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स से यह भी पता चलता है कि दत्ता का मानना है कि उनके हिस्से में 650 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी आएगी, जो एग्जीक्यूटर्स के अनुमानों से मेल नहीं खाता.

रतन टाटा की बाकी संपत्ति का दो तिहाई हिस्सा उनकी सौतेली बहनों शिरीन जीजीभॉय और डीना जीजीभॉय को दिया गया है. वसीयत को टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी डेरियस खंबाटा और मेहली मिस्त्री के साथ-साथ टाटा की सौतेली बहनों के जरिए बांटा जा रहा है.

रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा और उनके बच्चों को वसीयत में शामिल नहीं किया गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, रतन टाटा के भाई जिमी टाटा को 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

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