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आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार हुआ था मदरसा चालक, जिंदगी के 14 साल गंवाने के बाद निर्दोष साबित

ओडिशा की एक अदालत ने आतंकवाद फैलाने के आरोपी रहमान अली खान को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि उन पर आरोप साबित करने के लिए एक भी पुख्ता सबूत कोर्ट में पेश नहीं किए गए.

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27 मई 2026 (पब्लिश्ड: 06:22 PM IST)
Mohammad Abdur Rahman Ali Khan acquitted
रहमान अली खान को कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया. (फोटो- India Today)
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आतंकवादियों से संबंध होने के आरोपी को ओडिशा की एक अदालत ने बरी कर दिया है. नाम मोहम्मद अब्दुर रहमान अली खान है. ओडिशा के कटक सेशन कोर्ट ने कहा कि रहमान के किसी आतंकवादी संगठन से संबंध होने का कोई सबूत नहीं है. यह भी साबित नहीं हो पाया कि उन्होंने आतंकवाद फैलाने के लिए कहीं से फंड जुटाया है.

मदरसा चलाने वाले रहमान पर आरोप था कि वो अपने स्कूल के जरिए ‘आतंकवादी कामों’ के लिए लोगों की भर्ती करते थे. साथ ही ‘दहशतगर्दी के लिए विदेशी फंडिंग’ भी जुटाते थे. ये भी कहा गया कि वह भारत सरकार के खिलाफ नफरत और असंतोष को बढ़ावा देते हैं. हालांकि, कोर्ट में इनमें से कोई भी आरोप साबित नहीं हो पाया. लिहाजा, रहमान बरी कर दिए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रहमान को 17 दिसंबर 2012 को ओडिशा पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पकड़ा था. उनके खिलाफ ‘अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट-1967’ यानी कानून के खिलाफ काम को रोकने वाली धारा (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया था. पहले ये केस ओडिशा के कटक में जगतपुर थाने में दर्ज किया गया. बाद में ओडिशा क्राइम ब्रांच ने इसे टेकओवर कर लिया. इस केस में रहमान के खिलाफ दिसंबर 2016 में चार्जशीट दाखिल की गई थी. कोर्ट ने 13 सितंबर 2017 को उन पर आरोप तय किए थे.

कोर्ट ने क्या कहा?

रहमान को इस मामले से बरी करने का आदेश देते हुए कटक के सेशन कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई चीज नहीं मिली है, जिससे ये साबित किया जा सकते कि रहमान आतंकवाद फैलाने में शामिल थे. इसके भी सबूत नहीं हैं कि उन्होंने देश के अंदर से या बाहर से आतंकवाद फैलाने के लिए पैसे जुटाए. अलकायदा 'द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ या इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे टेररिस्ट्स ग्रुप्स के साथ भी उनके संबंध कोर्ट में साबित नहीं हो पाए. 

कोर्ट ने अपने आदेश में भी यही सब कहा कि रहमान के आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने, कुख्यात आतंकवादियों या फिर पाकिस्तान से उनके रिलेशन को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं पेश किया गया है. इन सब बातों को साबित करने वाले एक भी पुख्ता सबूत नहीं हैं कि वह देश में या देश के बाहर किसी आतंकवादी से मिले हों. या किसी आतंकवादी संगठन के सदस्य हों. 

मोहम्मद अब्दुर रहमान अली खान जगतपुर थाना इलाके के सताबतिया गांव के रहने वाले हैं. वो कटक जिले के बिलतरुआन गांव में एक मदरसा चलाते थे.

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