रेप केस में लेटलतीफी करने वाले पुलिसकर्मियों को अप्रेजल नहीं मिलेगा?
केंद्रीय गृह मंत्रालय पुलिस अधिकारियों के annual performance assessment में बदलाव की तैयारी में है. मंत्रालय के इस कदम का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध से जुड़े सभी मामलों में तेजी से जांच सुनिश्चित करना है.
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केंद्रीय गृह मंत्रालय पुलिस अधिकारियों के परफॉर्मेंस अप्रेजल सिस्टम में बदलाव की तैयारी में है. अब पुलिस अधिकारियों के सालाना मूल्यांकन रिपोर्ट में ये भी जुड़ेगा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराध से जुड़े कितने मामलों में उन्होंने तय समय में चार्जशीट फाइल की. यानी अगर तरक्की चाहिए तो रेप जैसे गंभीर मामलों में तेज और निष्पक्ष होकर कार्रवाई करनी होगी.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय से मिली सूचना का हवाला देते हुए एक सीनियर अधिकारी ने बताया, गृह मंत्रालय विचार कर रहा है कि पुलिस अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट/वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (ACRs/APARs) को रेप और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामलों में उनके द्वारा फाइल की गई चार्जशीट और फॉरेंसिक रिपोर्ट से जोड़कर देखा जाए.
गृह मंत्रालय के इस कदम का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध से जुड़े सभी मामलों में तेजी से जांच सुनिश्चित करना है. इन मामलों में चार्जशीट फाइल करने के लिए कानूनी तौर पर 60 दिनों की समयसीमा तय है.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193 में ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी किए बिना जांच पूरी करने पर जोर दिया गया है. साथ ही यह अनिवार्य किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 64, 65, 66, 67, 68, 70, 71 और POCSO एक्ट, 2012, की धारा 4,6,8 और 10 के तहत दर्ज किए गए मामलों से जुड़ी जांच पुलिस स्टेशन के प्रभारी द्वारा सूचना दर्ज किए जाने की तारीख से दो महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए.
रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में ऐसे 56 प्रतिशत मामलों में समय के भीतर कार्रवाई हो पाती है. हाल में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक में महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों में तय समय में जांच और तेजी से कार्रवाई के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, जम्मू कश्मीर जैसे राज्य और दिल्ली, चंडीगढ़ और लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बैठक में शामिल हुए थे. उन्होंनें पुलिस स्टेशन में मौजूद पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया, ताकि समय के भीतर गुणवत्ता से समझौता किए बिना जांच पूरी हो सके. गृह मंत्री ने राजस्थान, पंजाब और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से इस मामले में कड़ी निगरानी रखने का आग्रह किया.
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