हरिद्वार में मांस क्या अंडे भी नहीं खा पाएंगे लोग, सफाई के नाम पर आया प्रपोजल
Haridwar plans raw meat ban: हरिद्वार नगर निगम कच्चे मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रहा है. 6 अप्रैल को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को पेश किया जा सकता है. साफ-सफाई से जुड़ी चिंताओं के कारण शहर में मांस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हरिद्वार में हर की पौड़ी घाट के 5 किलोमीटर के दायर में मांस पर प्रतिबंध पहले से ही लागू है.

इस साल होने वाले अर्द्ध कुंभ के मद्देनजर हरिद्वार में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लग सकता है. ये प्रस्ताव अप्रैल महीने में होने वाली हरिद्वार नगर निगम की बैठक में पेश किया जा सकता है. दावा है कि ये कदम साफ-सफाई से जुड़ी चिंता की वजह से उठाया गया है. इस प्रस्ताव में सिर्फ लोकल दुकानें ही नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट में बिकने वाले अंडे और मीट की बिक्री भी शामिल है.
हरिद्वार नगर निगम की मेयर किरण जायसवाल का कहना है कि शहर में कोई बूचड़खाना नहीं है. और कच्चा मांस बेचने वाली दुकानों को शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है. इसके लिए 56 दुकानें बनाई गई हैं. लेकिन यहां दिक्कत रेस्टोरेंट भी हैं. उनके मुताबिक, जो मांस और अंडे रेस्टोरेंट में मिलते हैं, उससे घरों में मांस खाने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इसलिए प्रस्ताव में उन्हें भी शामिल कर लिया गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जायसवाल ने बताया, "अगर मीटिंग में यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो एक सुनवाई की जाएगी. जिसमें निवासी अपनी आपत्ति बता सकते हैं. फिर इसे राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित किया जा सकेगा. और यह प्रक्रिया दो महीनों में पूरी हो जाएगी."
बताते चलें कि 60 सदस्यों वाले सदन में BJP पार्टी के 40 पार्षद हैं और एक निर्दलीय पार्षद का भी समर्थन है. हरिद्वार में हर की पौड़ी घाट के 5 किलोमीटर के दायरे में मांस पर प्रतिबंध पहले से ही लागू है.
मगर नगर आयुक्त नंदन कुमार का मानना है कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा. क्योंकि आपत्तियों के लिए एक सुनवाई करनी होगी. कानूनी नजरिए से इसकी जांच करनी होगी. बोर्ड के पास प्रस्ताव पास करने की शक्ति है. लेकिन राजपत्र में शामिल होने से पहले इसके और भी चरण हैं.
प्रप्रोजल पर बात उठी, तो आपत्ति आनी भी शुरू हो गई. काउंसलर अरशद ख्वाजा ने कहा कि नगर निगम की सीमा में सौ से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं. अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो बकरीद के मौके पर होने वाली धार्मिक कुर्बानियों पर भी इसका असर पड़ेगा. उन्होंने आगे सवाल किया, ‘क्या इसका मतलब यह है कि घरों और निजी जगहों पर भी मांस नहीं पकाया जा सकता?’
कई पार्षदों ने दावा किया कि अगर ये प्रस्ताव पास होता है तो एक लाख से ज्यादा लोगों की आबादी प्रभावित होगी. और लगभग 10 हजार लोगों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी. उन्होंने कहा कि ये फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा प्रदान करना) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करेगा.
2021 में सरकार ने कुंभ से पहले हरिद्वार के सभी शहरी स्थानीय निकायों को 'स्लॉटर फ्री एरिया' घोषित कर दिया था. और बूचड़खानों को जारी की गई मंजूरियां भी रद्द कर दी थीं. बाद में, उत्तराखंड उच्च न्यायालय में इस फैसले को कानूनी चुनौती दी गई थी.
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