‘ऐसी मीटिंग हुई ही नहीं’ डोभाल-रुबियो मुलाकात की खबर पर विदेश मंत्रालय का इनकार, ब्लूमबर्ग रिपोर्ट खारिज
Bloomberg Report Controversy: अजीत डोभाल और मार्को रुबियो की कथित मीटिंग को लेकर विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है. सरकार ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं. भारत-अमेरिका संबंध और ट्रेड डील के बीच आई इस खबर ने नई चर्चा छेड़ दी है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के नक्की होने के बाद पर्दे के पीछे की कहानी भी सामने आने लगी थी. कहानी में भारत ने ट्रेड डील को लेकर सख़्त रूप अपनाया था. लेकिन अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस कहानी को ही बेबुनियाद बता दिया है. उनका कहना है कि कहानी में जिस मीटिंग के बारे में बात हो रही है वो कभी हुई ही नहीं.
दरअसल 4 फरवरी को छपी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था सितंबर 2025 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच एक मीटिंग हुई थी. लेकिन अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर अपना पक्ष रखा है. 5 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फरेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
जिस ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट की बात चल रही है, वो पूरी तरह से बेबुनियाद है. जिस मीटिंग का ज़िक्र है वो भी गलत है. ऐसी कोई भी मीटिंग या विदेश यात्रा हुई नहीं है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का ये बयान तब आया है जब इस बात पर चर्चा चल रही थी भारत ने ट्रेड डील के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि बातचीत के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब भारत ने साफ शब्दों में अमेरिका से कह दिया, “हम राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार कर लेंगे.”
रणधीर जायसवाल ने इस बात को सिरे से नकार दिया है. उन्होंने ट्रेड डील पर आगे बात करते हुए कहा,
रिपोर्ट में क्या छपा था?प्रधानमंत्री ने भारत पर लगे टैरिफ घटाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया अदा किया है. प्रधानमंत्री ने ये सुनिश्चित किया कि भारत का सामान 18 फीसदी टैरिफ के साथ अमेरिकी बाज़ार में निर्यात किया जा सके. इस ट्रेड डील से भारत में रोज़गार के मौके बनेंगे और लेबर इंटेंसिव इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा.
रिपोर्ट्स के अनुसार यह बात सितंबर 2025 की है. उस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के लिए वॉशिंगटन भेजा गया था. इस मीटिंग की जानकारी रखने वाले टॉप अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि-
डोभाल ने रुबियो से साफ़ कह दिया था कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप या उनके करीबियों के दबाव में नहीं आएगा. भारत पहले भी अमेरिका की ऐसी कई सरकारों का सामना कर चुका है जिन्होंने सख्ती दिखाई थी. हम प्रेसिडेंट ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतज़ार भी कर सकते हैं. लेकिन भारत दोनों देशों के बीच की कड़वाहट को भुलाकर फिलहाल व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करना चाहता है.
इससे पहले सितंबर 2025 में ही पीएम मोदी, प्रेसिडेंट पुतिन और शी जिनपिंग SCO समिट में एक साथ दिखें थे. अमेरिका तब इस बात से झल्लाया भी था. इसी महीने अजित डोभाल को वॉशिंगटन भेजा गया था.
वीडियो: भारत अमेरिका से बेहतर कैसे हो गया, प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अमेरिका में बताया

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