रविवार को बंद रहेगा 'ईश्वर का अपना बगीचा', मेघालय के मावलिननॉन्ग के लोगों का फैसला
मावलिननॉन्ग गांव में हर रविवार को ‘टूरिजम की छुट्टी’ रहेगी. हर दिन तकरीबन 500 से ज्यादा टूरिस्ट इस गांव के खूबसूरत नजारों को देखने के लिए आते हैं.
.webp?width=210)
‘भगवान का अपना बगीचा’ अब रविवार को सैलानियों के लिए बंद रहेगा. ये बगीचा मेघालय में पूर्वी खासी हिल्स जिले का एक गांव है, जिसे एशिया का ‘सबसे साफ गांव’ कहा जाता है. नाम है मावलिननॉन्ग (Mawlynnong). ‘लिविंग रूट ब्रिज’ और 100 साल पुराने फूलों के बगीचों से सजे एपिफेनी चर्च वाले इस गांव के लोगों ने तय किया है कि अब से हर रविवार को गांव में ‘टूरिजम की छुट्टी’ रहेगी.
पिछले 20 साल से यह गांव भारत और दुनिया भर के सैलानियों को अपनी सुंदरता, साफ हवा और शानदार मनोरम प्राकृतिक दृश्यों के जरिए खींचता रहा है. हर दिन तकरीबन 500 से ज्यादा टूरिस्ट इस गांव के खूबसूरत नजारों को देखने के लिए आते हैं.
अब सवाल है कि गांव के लोगों ने रविवार को इसे बंद रखने का फैसला क्यों किया, जबकि छुट्टी के दिन वाला रविवार ही तो घूमने के लिए सबसे मुफीद समय होता है? जवाब ये नहीं है कि यहां के लोग पर्यटकों से उकता गए थे. ये भी नहीं कि रोज-रोज लोगों की बढ़ती भीड़ से परेशान होकर वो एक दिन चैन से जीने के लिए ये नियम लेकर आए.
ये नियम इसलिए लाया गया है क्योंकि वह पर्यटकों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने देना चाहते थे. वो ये नहीं चाहते थे कि लोग उनके गांव में आएं और परेशान होकर जाएं. उनकी ठीक से मेहमाननवाजी न हो पाए. खासतौर पर बुजुर्ग सैलानी, जिन्हें घूमने के लिए स्थानीय लोगों की मदद की सख्त जरूरत होती है.

‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के अनुसार, गांव की पंचायत ‘डोरबार श्नॉन्ग मावलिननॉन्ग’ (स्थानीय परिषद) ने आधिकारिक बयान में कहा है,
टूरिस्ट्स के लिए ये जगह सोमवार से शनिवार तक खुली रहेगी, लेकिन रविवार को यह विजिटर्स के लिए बंद रहेगी. इसके साथ ही गांव में टूरिस्ट से जुड़ी सभी गतिविधियां और सेवाएं, जिसमें रेस्टोरेंट, दुकानें, स्टॉल, पब्लिक टॉयलेट शामिल हैं, अब से बंद रहेंगे.
टेलीग्राफ को एक ग्रामीण ने बताया कि मावलिननॉन्ग मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 75 किमी दूर है. यहां रोजाना औसतन 500 लोग आते हैं. गांव का ये नया नियम उन टूरिस्ट या विजिटर्स पर लागू होगा जो जिस दिन आते हैं, उसी दिन चले जाते हैं. उन्होंने बताया कि तकरीबन 112 घरों और 560 लोगों की आबादी वाले इस गांव की पंचायत ने यह फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया है क्योंकि रविवार को तकरीबन सभी को ज्यादातर समय चर्च में बिताना होता है. इस दिन लोग चर्च में धार्मिक कार्यों में मशगूल रहते हैं इसलिए वो विजिटर्स की मेहमाननवाजी नहीं कर पाएंगे.

उन्होंने आगे कहा,
सिर्फ इसी वजह से विजिटर्स खासकर बुजुर्ग नागरिकों को बहुत ज्यादा परेशानी और असुविधा होती थी. इससे गांव और उसके लोगों की बुरी इमेज बन सकती थी. ऐसे में विजिटर्स के मन में गांव को लेकर बुरा भाव या असंतोष न हो, इसलिए ये नियम लाया गया है.
उन्होंने साफ किया कि वो ऐसा चाहते नहीं थे, लेकिन गांव की 'इमेज' के लिए उन्हें ये करना पड़ा है.
काउंसिल ने ये भी स्पष्ट किया कि जो टूरिस्ट और विजिटर्स पहले ही गेस्ट हाउस या होमस्टे में रात भर रुके हुए हैं और जिनका स्टे रविवार तक एक्सटेंड कर दिया गया है, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है. बयान में कहा गया है,
जो टूरिस्ट या विजिटर्स रविवार रात को कमरे बुक करना चाहते हैं, उन्हें भी इससे छूट है. वो ऐसा कर सकते हैं और रविवार रात को चेक-इन कर सकते हैं. लेकिन ऐसे विजिटर्स की मेहमाननवाजी की पूरी जिम्मेदारी गेस्ट हाउस या होमस्टे के मालिकों की होगी.

बता दें कि मावलिननॉन्ग को साल 2005 में भारत का सबसे स्वच्छ गांव घोषित किया गया था. यह चेरापूंजी जिले में आता है और मॉनसून सीजन में किसी स्वर्ग की तरह प्राकृतिक सीनरी से सज जाता है. हरी-भरी घाटियों और फूलों से भरे बगीचे इसे बेहद खूबसूरत बनाते हैं. गांव से थोड़ी ही दूरी पर ‘लिविंग रूट ब्रिज’ (जिंदा जड़ों से बना पुल) प्राकृतिक इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है. इसे रबर के पेड़ों की जड़ों को आपस में बुनकर तैयार किया गया है. इसकी प्राकृतिक सुंदरता ऐसी है कि इसे भगवान का अपना बगीचा (God's Own Garden) कहा जाता है.
वीडियो: अजित पवार के प्लेन क्रैश से पहले पायलट को फोन पर क्या कहा गया था?

.webp?width=60)

