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सीमा पर पाकिस्तान, घर में माओवादी, IED ब्लास्ट में 3 ग्रेहाउंड कमांडो शहीद

Telangana Police के DGP डॉ. जितेंदर ने बताया कि हाल ही में माओवादियों (Maoists) ने जंगलों में बम लगाने की चेतावनी दी थी और लोगों को वहां ना जाने को कहा था. इसके बाद ही ग्रेहाउंड्स (Greyhounds Commandos) और स्थानीय पुलिस की टीम ने इलाके की तलाशी शुरू की थी.

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9 मई 2025 (पब्लिश्ड: 10:41 PM IST)
Greyhounds Commandos, Maoist
माओवादी हमले में तीन यूनियर कमांडो की जान गई. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)
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सीमा पर पाकिस्तान से तनाव के बीच भारत को घर के अंदर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर माओवादियों ने गुरुवार, 8 मई को बड़ा हमला कर दिया. इस हमले में ग्रेहाउंड्स के तीन कमांडो (Greyhounds Commandos) शहीद हो गए. ये हमला एक लैंडमाइन ब्लास्ट (IED Blast) के जरिए किया गया. इस धमाके में एक रिजर्व सब-इंस्पेक्टर (RSI) भी घायल हुआ है, जिसे हैदराबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

घटना मुलुगु जिले के वजीदू-पेरूर के जंगलों में वीरभद्रवरम-तडापाल पहाड़ियों के पास हुई. इंडियन एक्सप्रेस ने सीनियर पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि पुलिस टीम रूटीन गश्त कर रही थी. जब टीम माओवादियों के लगाए बमों को खोज और हटा रही थी, तो पहले से छिपे करीब 35-40 माओवादी ने दूर से IED धमाके किए. माओवादियों की तरफ से गोलीबारी भी की गई. हमलावरों में महिलाएं भी शामिल थीं. पुलिस की जवाबी फायरिंग के बाद माओवादी भाग गए.

इस हमले में शहीद हुए तीन ग्रेहाउंड्स कमांडो की पहचान वी श्रीधर, एन पवन कल्याण और टी संदीप के तौर पर हुई है. ये साल 2025 का पहला मौका है जब तेलंगाना पुलिस को माओवादियों की तरफ से इतना बड़ा नुकसान हुआ है.

तेलंगाना पुलिस के डीजीपी डॉ. जितेंदर ने बताया कि हाल ही में माओवादियों ने जंगलों में बम लगाने की चेतावनी दी थी और लोगों को वहां ना जाने को कहा था. इसके बाद ही ग्रेहाउंड्स और स्थानीय पुलिस की टीम ने इलाके की तलाशी शुरू की थी.

क्या है ग्रेहाउंड्स?

अविभाजित आंध्र प्रदेश में साल 1989 में आईपीएस ऑफिसर केएस व्यास ने ग्रेहाउंड्स फोर्स बनाई थी. यह एक स्पेशल कमांडो यूनिट है, जिसका मकसद माओवादी गतिविधियों पर लगाम लगाना है. ये कमांडो खासतौर पर जंगलों और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन करने के लिए ट्रेन किए जाते हैं. ग्रेहाउंड्स अब तक कई बड़े माओवादी ऑपरेशन को नाकाम कर चुके हैं. 2008 में इन पर सबसे बड़ा हमला तब हुआ था, जब ओडिशा-आंध्र सीमा पर माओवादियों ने 37 जवानों को शहीद कर दिया था.

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