'बेटी को जीते-जी न्याय नहीं मिला... ', मणिपुर में गैंगरेप का शिकार हुई पीड़िता की दो साल बाद मौत
Manipur: युवती दो सालों तक शारीरिक पीड़ा, गहरे सदमे और इंसाफ की उम्मीद के बीच जूझती रही. परिवार इस बात से बेहद दुखी है कि उनकी बेटी को जीते-जी न्याय नहीं मिल पाया.

मणिपुर में एक कुकी जनजाति की युवती की मौत हो गई है, इसे करीब दो साल पहले अगवा कर सामूहिक बलात्कार का शिकार बनाया गया था. पीड़िता दो सालों तक शारीरिक पीड़ा, गहरे सदमे और इंसाफ की उम्मीद के बीच जूझती रही. परिवार का कहना है कि उस घटना के गहरे सदमे और गंभीर चोटों की वजह से वह कभी उबर नहीं पाईं. 10 जनवरी 2026 को उसकी मौत हो गई.
साल 2023 में मणिपुर में मैतई-कुकी समुदाय के बीच नस्लीय हिंसा शुरु हुई. कई महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और हिंसा की घटनाएं सामने आईं. इस दौरान मई 2023 में एक 20 साल की युवती के साथ राजधानी इम्फाल में कुछ लोगों ने गैंगरेप किया था. आरोप है कि ये लोग मैतई समुदाय से थे और पीड़िता कुकी समुदाय की थी. घटना के बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गई और किसी तरह वहां से जान बचाकर निकली.
उनके परिवार ने बताया कि शारीरिक और मानसिक आघात ने उनकी सेहत पर गहरा असर डाला. इलाज चलता रहा, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई. परिवार इस बात से बेहद दुखी है कि उनकी बेटी को जीते-जी न्याय नहीं मिल पाया.
स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (ITLF) ने एक बयान में युवती की याद में कैंडललाइट मार्च का ऐलान किया है. संगठन ने बताया,
ITLF ने आगे बताया कि आखिरकार 10 जनवरी 2026 को चोटों की वजह से युवती की मौत हो गई.
उस दिन क्या हुआ था?जुलाई 2023 में युवती ने NDTV से बातचीत में अपने साथ हुई दरिंदगी के बारे में बताया था. घटना के करीब दो महीने बाद, 21 जुलाई 2023 को वो पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकी. FIR में युवती ने आरोप लगाया था कि काले रंग की कमीज पहने चार हथियारबंद लोग उसे पहाड़ी इलाके में ले गए, जहां उनमें से तीन ने बारी-बारी से बलात्कार किया. आगे बताया,
युवती ने बताया था कि एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने उसे सुरक्षित जगह तक पहुंचाया, जहां वो सब्जियों के ढेर के नीचे छिप गई थी. वो किसी तरह कांगपोकपी (मणिपुर) पहुंचने में कामयाब हुई, जहां से उसे पड़ोसी राज्य नागालैंड की राजधानी कोहिमा के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया.
'दो सालों से लगातार डर में जी रही थी'युवती की मां ने न्यूजलॉन्ड्री को बताया कि गंभीर चोटों की वजह से उनकी बेटी को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. उन्होंने बताया,
आगे उन्होंने बताया, “मेरी बेटी इतनी सदमे में थी कि वह एक कमरे में ही सिमट गई. उसने सबसे बात करना बिल्कुल बंद कर दिया. उसने बाहर जाना और दोस्तों से बात करना छोड़ दिया. डॉक्टर हफ्ते में दो बार सदमे से उबरने के लिए थेरेपी सेशन के लिए आते थे, लेकिन मेरी बेटी ठीक नहीं हो पाई. मैं ही एकमात्र व्यक्ति थी जिससे वह बात करती थी. जब हम 15 मिनट के लिए भी बाहर जाते थे, तब भी वह मेरा साथ नहीं छोड़ती थी."
युवती की मां ने बताया,
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मई 2023 में मणिपुर में घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी जनजातियों के बीच जातीय हिंसा भड़क गई. यह हिंसा जमीन के अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर हुई. इस संघर्ष में 260 से ज्यादा लोगों की जान चली गई, जबकि करीब 50,000 लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगहों पर शरण लेनी पड़ी.
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