बंगाल में क्या हुआ? ममता बनर्जी और राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री में 'बातों की जंग' छिड़ गई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच एक कॉन्फ्रेंस को लेकर विवाद छिड़ गया है. बात इतनी बढ़ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ममता बनर्जी को घेरा है. राष्ट्रपति मुर्मू सिलिगुड़ी में एक कॉन्फ्रेंस में शिरकत कर रही थीं. इसे लेकर उन्हें ममता बनर्जी से कुछ शिकायतें थीं.
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच एक कॉन्फ्रेंस को लेकर विवाद छिड़ गया है. बात इतनी बढ़ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ममता बनर्जी को घेरा है. राष्ट्रपति मुर्मू सिलिगुड़ी में एक कॉन्फ्रेंस में शिरकत कर रही थीं. इसे लेकर उन्हें ममता बनर्जी से कुछ शिकायतें थीं. उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि ममता दीदी उनसे नाराज हैं इसलिए उन्होंने ऐसा किया. राष्ट्रपति के इस बयान पर ममता बनर्जी ने भी पलटवार किया है. उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू को ‘बीजेपी का एजेंट’ बता डाला. इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ममता बनर्जी को घेरा और इसे आदिवासी समुदाय की अस्मिता से जोड़ दिया.
क्या है पूरा मामला, डीटेल में बताते हैं.
दरअसल, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में नौवीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कांफ्रेंस थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसमें शामिल होने आई थीं. कांफ्रेंस का वेन्यू राष्ट्रपति को पसंद नहीं आया. इसे लेकर उन्होंने उन्होंने शिकायत की कि वेन्यू बहुत छोटा था और वहां 5 हजार लोग भी शामिल नहीं हो सकते थे. इस वजह से बहुत सारे संथाल लोग कॉन्फ्रेंस में नहीं आ पाए. इस कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति विधाननगर में एक दूसरे प्रोग्राम में पहुंचीं. वहां उन्हें जगह ज्यादा बड़ी लगी. इस पर उन्होंने सवाल किया कि यहां अगर कार्यक्रम होता तो 5 लाख लोग आ सकते थे.
उन्होंने कहा,
“जब मैं यहां आई तो मुझे एहसास हुआ कि अगर यह सम्मेलन यहीं आयोजित होता तो बेहतर होता. क्योंकि यह इलाका बहुत विशाल है. मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में क्या चल रहा था. यहां आसानी से 5 लाख लोग इकट्ठा हो सकते थे लेकिन मुझे नहीं पता कि वे हमें वहां क्यों ले गए? सम्मेलन के लिए ऐसी जगह चुनी जहां संथाल लोग नहीं जा सकते. मुझे बहुत दुख है कि यहां के लोग सम्मेलन में नहीं पहुंच पाए क्योंकि यह इतनी दूर आयोजित किया गया था.”
राष्ट्रपति की नाराजगी इस बात पर भी थी कि प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया गया. उनका स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी मंत्री को होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस पर ऐतराज नहीं है लेकिन देश के राष्ट्रपति पद के लिए जो प्रोटोकॉल है, उसका पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा,
“अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं, तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए. लेकिन वह (ममता) नहीं आईं. मैं भी बंगाल की बेटी हूं. ममता दीदी भी मेरी बहन हैं. मेरी छोटी बहन. मुझे नहीं पता कि वह मुझसे नाराज़ थीं, इसलिए ऐसा हुआ.”
राष्ट्रपति मुर्मू से अपनी आलोचना सुनकर ममता बनर्जी भी भड़क गईं. उन्होंने इस पर तीखा पलटवार किया. ममता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति को भारतीय जनता पार्टी ने अपना अजेंडा चलाने के लिए भेजा है. ममता ने कहा कि वो इस बात से दुखी हैं कि राष्ट्रपति बीजेपी की चाल में फंस गई हैं. ममता ने ये भी सफाई दी कि राज्य सरकार उस कार्यक्रम में शामिल नहीं थी और उन्हें उसके बारे में कुछ पता नहीं था. उन्हें राष्ट्रपति के आने-जाने के बारे में जानकारी थी लेकिन कॉन्फ्रेंस के बारे में नहीं.
ममता ने तीखे अंदाज में कहा,
"मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को भाजपा ने अपना एजेंडा बेचने के लिए भेजा है. राष्ट्रपति भाजपा की चाल में फंस गई हैं. आपने (राष्ट्रपति ने) कहा कि हमने आपके अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लोगों को इकट्ठा होने से रोका, लेकिन हम उस सम्मेलन की पार्टी नहीं थे. राज्य सरकार पार्टी नहीं थी और उसे कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं थी. आपके आने-जाने की सूचना हमें मिल जाती है लेकिन मुझे उस सम्मेलन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी."
ममता ने राष्ट्रपति से सवाल किया कि जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे थे उस समय वो चुप क्यों रहीं? राजस्थान और महाराष्ट्र में आदिवासियों पर अत्याचार होते समय उन्होंने सवाल क्यों नहीं उठाए?
ममता ने कहा कि वह चाहती हैं कि राष्ट्रपति हर साल आएं लेकिन बंगाल को बांटने की कोशिश न करें. यही नहीं, ममता बनर्जी ने भाजपा को साफ चुनौती दी कि बंगाल चुनाव के बाद उनका निशाना दिल्ली है और वह पूरे देश में घूमकर बीजेपी सरकार का पर्दाफाश करेंगी. उन्होंने कहा,
“मैं एपस्टीन फाइल भी खोलूंगी. बस इंतजार कीजिए.”
ममता ने सवाल किया कि क्या बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्लान है? क्या इसीलिए राज्यपाल को बदल दिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सीवी आनंद बोस को पूर्व उपराष्ट्रपति जयदीप धनखड़ की तरह डरा-धमकाकर पद से हटा दिया गया है.
वहीं, राष्ट्रपति के आरोपों पर उनका समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने इसे ‘शर्मनाक’ बताया है और कहा है कि हर इंसान जो लोकतंत्र में और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, उसका दिल टूट गया है. पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं और उन्होंने जो दर्द जाहिर किया है उसे देश के लोगों में दुख है.
पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि उसने सभी सीमाएं लांघ दी हैं. राज्य का प्रशासन राष्ट्रपति के अपमान के लिए जिम्मेदार है. ये भी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे अहम मुद्दे को पश्चिम बंगाल ने बहुत ही हल्के में लिया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और उसकी गरिमा का हमेशा सम्मान होना चाहिए.
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