'अगर मराठी का अपमान हुआ तो... ' भाषा विवाद पर अब आदित्य ठाकरे ने दी खुली धमकी
Maharashtra Marathi Controversy: उद्धव गुट की Shiv Sena के विधायक Aaditya Thackeray ने कहा, हम नहीं चाहते कि कोई कानून अपने हाथ में ले. लेकिन जब इसका उल्टा होता है तो मामला बिगड़ सकता है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में मराठी न बोलने को लेकर शुरू हुए सियासी विवाद पर अब शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) का बयान सामने आया है. उनका कहना है कि राज्य की पहचान का अपमान होगा तो भावनाएं भड़क सकती हैं. हम अपनी मातृभाषा का अपमान नहीं चाहते. अगर ऐसा होगा तो चीज़ें बिगड़ सकती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आदित्य ठाकरे की यह टिप्पणी मराठी न बोलने पर एक दुकानदार को पीटे जाने के एक दिन बाद आई है. उन्होंने कहा,
ठाणे के मीरा रोड पर दो दिन पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोलने को लेकर एक दुकानदार की पिटाई कर दी थी. घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. इसमें दुकानदार यह कहते हुए दिख रहा है, “मुझे नहीं पता था कि मराठी अनिवार्य है. किसी को मुझे सिखानी होगी.”
इसके बाद कुछ लोगों ने दुकानदार को बार-बार थप्पड़ मारना शुरू कर दिया. एक अन्य व्यक्ति दुकानदार को धमकाता है कि उसे इस इलाके में कारोबार नहीं करने दिया जाएगा. मामले ने तूल पकड़ा तो MNS के 7 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ FIR दर्ज की गई.
दूसरी तरफ आदित्य ठाकरे ने पूर्व सांसद राजन विचारे से जुड़े एक अन्य मामले में भी सफाई पेश की. दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पार्टी नेता राजन विचारे के ऑफिस में मराठी बोलने से इनकार करने पर दुकान मालिकों को थप्पड़ मारे गए. उन्हें माफी मांगने को मजबूर किया गया. आदित्य ठाकरे ने इस दावे का खंडन किया.
उनका कहना है कि घटना को लेकर जो वीडियो सामने आया, इस पर उन्होंने राजन विचारे से बात की. विचारे ने उन्हें बताया कि इस घटना का मराठी बनाम गैर-मराठी भाषी, महाराष्ट्र बनाम उत्तर भारत से कोई संबंध नहीं है. ठाकरे ने कहा,
वीडियो में दावा किया गया कि पूर्व सांसद और शिवसेना (UBT) नेता राजन विचारे के ऑफिस में कुछ व्यापारियों को बुलाया गया. यहां कथित तौर पर उन पर हमला किया गया. आरोप है कि मराठी न बोलने के लिए उनसे माफ़ी मंगवाई गई.
बता दें कि राज्य में मराठी भाषा न बोलने को लेकर लगातार विवाद सामने आता रहा है. हाल ही में महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली देवेंद्र फडणवीस की सरकार तीन-भाषा पॉलिसी (Three Language Policy) लेकर आई थी.
इसके तहत हिंदी को 1 से 5 क्लास तक के मराठी और अंग्रेज़ी मीडियम स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने की योजना थी. लेकिन इस मुद्दे पर शिवसेना और MNS ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. जिसके बाद सरकार ने इसे लागू करने पर फिलहाल रोक लगा दी है.
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