'अमित शाह', 'अजीत डोभाल' से बात कराकर पूर्व बैंकर से 4 सालों तक ठगे करोड़ों रुपये
आरोप है कि रिश्तेदार ने कहा था कि सरकार से 38 करोड़ रुपये का इनाम मिलने वाला है, लेकिन इसे लेने में खर्चा आएगा. इसी बहाने रिश्तेदार ने Amit Shah और Ajit Doval के नाम पर नकली कॉल के जरिए पीड़ित को अपने जाल में फंसाया.

महाराष्ट्र के पुणे में एक पूर्व बैंकर के साथ ऐसी ठगी हुई, जिसका शायद ही उन्होंने कभी अनुमान लगाया होगा. ठगी भी ऐसी-वैसी नहीं. 4 करोड़ रुपये की ठगी, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल के नाम पर नकली कॉन्फ्रेंस कॉल जैसे हथकंडे अपनाए गए. ठगी करने का आरोप भी किसी शातिर अपराधी पर नहीं, बल्कि रिश्तेदार पर है.
बैंक से रिटायर 53 साल के सूर्यकांत थोरेट के साथ उनके ही रिश्तेदार ने कथित तौर पर धोखाधड़ी की. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि इस रिश्तेदार ने अपने बेटे को इंटेलिजेंस ऑफिसर बताकर और अमित शाह और अजीत डोभाल के नाम पर नकली कॉन्फ्रेंस कॉल दिखाकर थोरेट से 4 करोड़ रुपये ठग लिए.
पुलिस के मुताबिक, 2019 में किसी रिश्तेदार ने सूर्यकांत को फोन किया और बताया कि उनका बेटा सरकार के इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में काम करता है. उसने कहा कि उनका बेटा एक 'स्पेशल मिशन' पर काम कर रहा है और सरकार इसके लिए 38 करोड़ रुपये का इनाम देने वाली है. फिर उसने कहा कि इनाम पाने के लिए प्रोसेसिंग फीस, वकील की फीस और सीनियर अधिकारियों को तोहफे देने के नाम पर पैसे देने होंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, रिश्तेदार ने भरोसा दिलाया कि पैसा तुरंत वापस कर दिया जाएगा. फिर उसने अमित शाह, अजीत डोभाल और अन्य बड़े अफसरों के साथ नकली कॉल कराए, ताकि सूर्यकांत को यकीन हो जाए. इस झांसे में आकर सूर्यकांत ने 2020 से 2024 के बीच अलग-अलग खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए.
सूर्यकांत ने अपनी शिकायत में कहा,
लेकिन जब सूर्यकांत ने पैसे वापस मांगे तो रिश्तेदार ने कहा कि उनका बेटा विदेश में एक जरूरी मिशन पर है. कुछ महीनों बाद सूर्यकांत को समझ आया कि पूरी कहानी झूठी थी. इसके बाद सूर्यकांत ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने कहा,
पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. आरोपियों के नाम- शुभम सनील प्रभाले, सुनील बबनराव प्रभाले, ओमकार सुनील प्रभाले, प्रशांत राजेंद्र प्रभाले और भाग्यश्री सुनील प्रभाले हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस केस की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी गई है.
वीडियो: दिल्ली में पूर्व बैंकर को डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा, 23 करोड़ ठग लिए

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