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पुलिस के सामने मानी हत्या की बात, कोर्ट ने कर दिया बरी, महाराष्ट्र से आया अजीबो-गरीब मामला

Maharashtra News: महाराष्ट्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस के सामने एक शख्स ने आकर हत्या की बात कबूल की थी. हालांकि, 3 साल बाद कोर्ट ने इस मामले में कबूलनामे के बावजूद आरोपी को बरी कर दिया.

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20 मई 2026 (पब्लिश्ड: 05:17 PM IST)
man walked into police station confessed murder court says no evidence
कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते शख्स को बरी कर दिया है (PHOTO-AajTak)
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साल 2019 में 27 मार्च को कल्याण महाराष्ट्र के देसाई गांव में एक महिला की लाश मिली. लाश पूरी तरह से सड़-गल चुकी थी. लाश मिलने के बाद उसकी पहचान दर्शना के रूप में हुई. दियाघर थाने की पुलिस ने इस मामले में मर्डर का केस दर्ज किया. जांच में पता चला कि दर्शना की गर्दन पर गंभीर चोटें थीं. इससे ये साफ हो गया कि उस पर हमला हुआ था. लेकिन काफी हाथ-पैर मारने के बाद भी पुलिस इस केस की जांच में कुछ खास नहीं कर पाई. आखिर में पुलिस ने फरवरी 2021 में जांच बंद कर दी.

पुलिस के पास खुद आया आरोपी

आमतौर पर ऐसा होता है कि पुलिस आरोपी के पास पहुंच कर उसे गिरफ्तार करती है. लेकिन इस केस में इसका ठीक उल्टा हुआ. यहां एक 33 साल का शख्स हिमांशु गुजाले, जुलाई 2023 में कोल्हापुर के लक्ष्मी नगर थाने पहुंचा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हिमांशु ने दावा किया कि दर्शना के मर्डर में उसी का हाथ है. अब पुलिस के हाथ तो जैसे लॉटरी लग गई. उन्हें इसमें एक अनसुलझा केस दिखा जो सुलझ सकता है. पुलिस ने हिमांशु को हिरासत में लिया. फिर हिमांशु जांच कर रही टीम को उस कथित क्राइम सीन पर ले गया जहां हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार और खून से सने कपड़ों को ठिकाने लगाया गया था.

कोर्ट में टिक नहीं पाया मामला, पुलिस की अलग फजीहत हुई 

शुरुआत में पुलिस को ऐसा लगा कि केस सॉल्व हो गया है. लेकिन फैसला पुलिस के 'लगने' से नहीं बल्कि कोर्ट में होता है. पूरी सुनवाई के दौरान सरकारी वकील की कई चीजों पर कोर्ट ने सवाल उठाए. कोर्ट को पुलिस को ये तक समझाना पड़ा कि पुलिस के सामने दी गई गवाही कोर्ट में मान्य नहीं होती. कोर्ट ने पाया कि कथित तौर पर भले ही हिमांशु ने मान भी लिया हो कि खून उसी ने किया है. लेकिन कोर्ट को तो सबूत चाहिए होता है जो कि इस केस में था है नहीं. पुलिस का पूरा मुकदमा, हिमांशु के कथित कबूलनामे पर टिका था. 

साथ ही पुलिस हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार नहीं ढूंढ पाई और न ही खून से सने कपड़े. पुलिस एक ऐसा फोरेंसिक से जुड़ा सबूत नहीं दे सकी जो हिमांशु को मर्डर से जोड़ पाए. जस्टिस एस बी अग्रवाल ने उपलब्ध सबूतों को नाकाफी मानते हुए हिमांशु गुजाले को बाइज्जत बरी कर दिया. पुलिस ने हिमांशु पर IPC की धारा 302 और 201 लगाई थी. लेकिन कोर्ट ने उसे बरी कर दिया.

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