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'क्या हम गिनी पिग हैं...', VIP लोगों का खाना चखने वाले अफसरों का छलका दर्द

देश भर में होने वाले VIP इवेंट्स में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की एक टीम तैनात की जाती है. इनका काम होता है मेहमानों को परोसे जाने वाले खाने की टेस्टिंग. महाराष्ट्र FDA से जुड़े अधिकारियों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.

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27 जून 2026 (पब्लिश्ड: 02:54 PM IST)
Maharashtra fda officers questions guinea pigs
महाराष्ट्र FDA के अधिकारियों ने वीआईपी फूड टेस्टिंग पर आपत्ति जताई है. (UNSPLASH)
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VIP इवेंट्स में मेहमानों के पहुंचने के पहले ही दो लोग वहां पहुंच जाते हैं. इनका काम होता है VIP और नेताओं के खाने से पहले उनके खाने को चखना. ताकि उसकी सुरक्षा की जांच हो सके. ये दो लोग हैं फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के फूड इंस्पेक्टर और स्थानीय पुलिस के कॉन्स्टेबल. NCP (शरद पवार) गुट की सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती और सारंग लखानी की हालिया शादी में भी कुछ ऐसा ही हुआ. FDA इंस्पेक्टर्स को मेन्यू की हर चीज चखनी थी. इसके बाद खाने के सैंपल जमा करके सील करने थे और 72 घंटों तक पुलिस रिकॉर्ड में इसको सुरक्षित रखना था.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल पहले जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट और फिर प्रोटोकॉल मिनिस्ट्री ने लागू किया था. इसकी वजह से फूड इंस्पेक्टर्स को अक्सर हफ्ते में आधे समय तक VIP ड्यूटी पर जाना पड़ता है. खाना चखें या न चखें. ये सवाल FDA अधिकारियों को परेशान करता है, क्योंकि एक इंस्पेक्टर की VIP ड्यूटी कभी-कभी 13 दिनों तक खिंच जाती है.

सीनियर अफसर ने उठाए सवाल

फूड डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने तो यहां तक पूछ लिया कि क्या हम गिनी पिग (प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवर) हैं जिन पर प्रयोग किया जाए? हमारे लिए यात्रा का भी कोई इंतजाम नहीं किया जाता. इस प्रोटोकॉल के दायरे में आने वाले नेताओं की संख्या बहुत बड़ी है. इसमें विपक्ष के वे सदस्य भी शामिल हैं जिनके पास कोई सार्वजनिक पद है, जैसे राहुल गांधी. वहीं RSS चीफ मोहन भागवत भी इस दायरे में हैं, जिनके पास कोई सार्वजनिक पद नहीं है.

सरकारी डॉक्टर्स की ड्यूटी हटी 

तीन महीने पहले तक फूड टेस्टर्स की टीम में एक तीसरा मेंबर भी होता था. JJ यै सेंट जॉर्ज जैसे सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर. फिर मेडिकल टीमों ने इसका विरोध किया और इस काम से हट गए. उनका तर्क था कि उनकी जिम्मेदारी मरीजों की देखभाल की है. न कि खाना चखने की.

रोज के काम प्रभावित होते हैं

VIP के लिए इंस्पेक्टर्स की तैनाती का जिम्मा संभालने वाले एक फूट सेफ्टी ऑफिसर ने बताया कि चार इंस्पेक्टर हफ्ते में तीन से चार दिन उपलब्ध नहीं होते. उन्होंने बताया, 

इससे हमारे रोज के काम में देरी होती है, लेकिन हम सीनियर्स को इसकी वजह (VIP ड्यूटी) साफ तौर पर बता देते हैं. 

FDA अधिकारियों ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह कहीं जाते हैं तो उनकी अपनी इंटरनल सिक्योरिटी टीमें प्रोटोकॉल के तहत सायनाइड टेस्ट करती हैं. FDA अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर सभी पैक्ड सामानों की भी जांच करनी होती है. एक फूड इंस्पेक्टर ने मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाद का एक किस्सा बताया जब उन्होंने उनको लड्डू बांटने की इजाजत नहीं दी थी. उन्होंने बताया, 

मोहन भागवत को कार्यक्रम के बाद मिठाइयां बांटना पसंद है. लेकिन लड्डू एक्सपायरी डेट के करीब थे, इसलिए हमने उनसे कहा कि इसे खाया नहीं जा सकता.

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FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बताया कि उनको सरकार द्वारा तय प्रोटोकॉल के अनुसार काम करना होता है. अब तक उनके अधिकारियों की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक जानकारी उन तक नहीं पहुंची है. वहीं प्रोटोकॉल सेक्रेटरी राजेश गावंडे ने प्रेस के इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि फूड टेस्टिंग सुविधा के लिए कौन-कौन एलिजिबल है. 

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