The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Madras High Court upholds decision to allow lighting of lamps at thiruparankundram hills

'सरकार अपने राजनीतिक एजेंडे...', मद्रास हाई कोर्ट ने दरगाह के पास दीया जलाने का फैसला बरकरार रखा

Thirupparankundram Deepam Row: इससे पहले 1 दिसंबर को हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने मदुरै के अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के मैनेजमेंट से तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ियों के ऊपर दीपाथून (प्राचीन पत्थर के दीपक स्तंभ) पर कार्तिकई दीपम जलाने के लिए कहा था. हालांकि इस आदेश का पालन नहीं किया गया था. इसके बाद सिंगल जज ने याचिकाकर्ता भक्तों को पहाड़ी पर जाकर खुद दीपक जलाने का निर्देश दिया था.

Advertisement
Madras High Court upholds decision to allow lighting of lamps at thiruparankundram hills
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है. (Photo: ITG/File)
pic
सचिन कुमार पांडे
6 जनवरी 2026 (Published: 03:10 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

मद्रास हाई कोर्ट ने तिरुपरकुंड्रम पहाड़ियों के ऊपर दरगाह के पास पत्थर के खंभे पर दीया जलाने का फैसला बरकरार रखा है. हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 6 जनवरी को इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सिंगल जज के आदेश को सही माना है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहे कि आगम शास्त्र उस जगह पर दीया जलाने से रोकता है.

मालूम हो कि इससे पहले 1 दिसंबर को हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने मदुरै के अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के मैनेजमेंट से तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ियों के ऊपर दीपाथून (प्राचीन पत्थर के दीपक स्तंभ) पर कार्तिकई दीपम जलाने के लिए कहा था. हालांकि इस आदेश का पालन नहीं किया गया था. इसके बाद सिंगल जज ने याचिकाकर्ता भक्तों को पहाड़ी पर जाकर खुद दीपक जलाने का निर्देश दिया था. लेकिन इसके बाद भी दीपक नहीं जलाया गया, जिस पर कोर्ट के आदेश की अवमानना ​​की कार्यवाही जारी है.

डिवीजन बेंच ने क्या कहा?

सिंगल जज के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार के अधिकारी और हजरत सुल्तान सिकंदर बादशाह अवुलिया दरगाह के प्रतिनिधियों ने डिवीजन बेंच में अपील की थी. लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस जी जयचंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने इस पर फैसला सुनाते हुए कहा,

यह हास्यास्पद और मानने में मुश्किल है कि राज्य सरकार को लगता है साल में एक खास दिन पत्थर के खंभे पर देवास्थानम के प्रतिनिधियों को दीया जलाने की अनुमति देने से सार्वजनिक शांति भंग होगी. बेशक, ऐसा तभी हो सकता है, जब ऐसी गड़बड़ी खुद राज्य कराए. हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी राज्य अपने राजनीतिक एजेंडे को हासिल करने के लिए इस स्तर तक न गिरे.

यह भी पढ़ें- पटना में गुटखा मुंह में ही रखिएगा! वरना जुर्माना तो लगेगा ही, ऐसे बेइज्जती भी की जाएगी?

'कानून व्यवस्था का मुद्दा काल्पनिक भूत'

बेंच ने आगे कहा कि कानून और व्यवस्था की आशंका राज्य की ओर से एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ संदेह में डालने के लिए बनाया गया एक काल्पनिक भूत लगता है. कहा कि जिला प्रशासन को इस मुद्दे को मध्यस्थता के माध्यम से समुदायों के बीच की खाई को पाटने के अवसर के रूप में लेना चाहिए था. बेंच ने आगे यह भी कहा कि चूंकि यह पहाड़ी एक संरक्षित स्थान पर है, इसलिए कोई भी गतिविधि ASI के बताए नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए.

वीडियो: क्या भारत में बैन हो जाएगा सोशल मीडिया, मद्रास हाईकोर्ट ने क्या कहा है?

Advertisement

Advertisement

()