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'आध्यात्मिक गुरुओं को भगवान का रूप नहीं मानने वाले रास्कल', जस्टिस स्वामीनाथन खुलकर बोल पड़े

Madras High Court judge GR swaminathan Remark: मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि जो लोग आध्यात्मिक गुरुओं को भगवान का रूप नहीं मानते वो बदमाश, मूर्ख और बर्बर होते हैं. उन्होंने ये बात तमिलनाडु में एक कार्यक्रम में कहीं.

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GR Swaminathan remark on dharmagurus
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ 100 से ज्यादा सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था. (India today)
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राघवेंद्र शुक्ला
23 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:40 PM IST)
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मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन (Madras High Court judge GR swaminathan) ने ये कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ‘आध्यात्मिक गुरुओं (Spiritual Gurus) को जो भगवान का रूप नहीं मानते वो दुष्ट, मूर्ख और बर्बर होते हैं.’ ये वही जज हैं जिनके खिलाफ 100 से ज्यादा सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था. 

इस प्रस्ताव में जस्टिस स्वामीनाथन पर पक्षपात करने और न्यायपालिका के सेकुलर (धर्मनिरपेक्ष) कामकाज के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया था. इससे पहले जस्टिस स्वामीनाथन तमिलनाडु के तिरुपरनकुंड्रम में ऐतिहासिक दरगाह के पास ‘दीपाथून’ नाम के पत्थर के स्तंभ पर दीया जलाने का आदेश देकर भी चर्चा में आए थे. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिनों जस्टिस जीआर स्वामीनाथन तमिलनाडु में एक धार्मिक संगठन के कार्यक्रम में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, 

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उनका कहना है कि मुश्किल वक्त में गुरु के आध्यात्मिक मार्गदर्शन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. गुरु की कृपा से साहस और समर्थन हासिल होता है. जज ने आगे कहा, 

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पहले भी बयान से हुआ है विवाद

हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की किसी बात पर विवाद हुआ हो. उनके विरोधी अक्सर उन पर आरोप लगाते हैं कि उनके तमाम कॉमेंट्स उनकी निजी आस्था और न्यायिक कर्तव्य के बीच के फर्क को मिटाते हुए दिखते हैं. 

इससे पहले एक बार उन्होंने कहा था कि अगर हम वेदों की रक्षा करेंगे तो वेद हमारी रक्षा करेंगे. इस बयान के बाद उनकी आलोचना हुई कि वह संविधान के बदले धार्मिक ग्रंथों को प्राथमिकता दे रहे हैं. जस्टिस स्वामीनाथन ने संविधान को लेकर भी विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने इसे ‘नकल’ किया हुआ दस्तावेज बताया था. यह भी कहा था कि अगर देश की डेमोग्राफी बदलती है तो संविधान अपनी प्रासंगिकता खो सकता है.

जीआर स्वामीनाथन ने अपनी न्यायिक सेवा के बाकी बचे दिनों में सनातन धर्म से मार्गदर्शन मिलने की बात कहकर भी विवाद खड़ा किया था. 

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