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इलाज के लिए आए बच्चों को चढ़ाया HIV वाला खून, सरकारी ब्लड बैंक की पोल खोली

मध्य प्रदेश के सतना के जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चे HIV पॉजिटिव मिले थे. इस रिपोर्ट के बाद हड़कंप मच गया था. जांच के दौरान अस्पताल में कई तरह की गड़बड़ियां मिली हैं. स्वास्थ्य विभाग ने गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही है.

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21 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 21 अप्रैल 2026, 09:11 PM IST)
madhya pradesh hospital blood bank hiv infection
सतना के जिला अस्पताल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं. (हॉस्पिटल साइट)
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दिसंबर 2025. मध्य प्रदेश के सतना जिले के सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चे HIV पॉजिटिव मिले. रिपोर्ट के बाद काफी हंगामा हुआ. जांच बिठाई गई. अब इस मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है. इसमें बड़े पैमाने पर लापरवाही की बात सामने आई है. अस्पताल में ब्लड डोनेट करने वालों का कोई रिकॉर्ड नहीं है. वहीं ब्लड टेस्ट में भी भयानक स्तर की लापरवाही बरती गई है.

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में चल रहे ब्लड बैंक के पूर्व प्रभारी और दो लैब टेक्नीशियन के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. इस चार्जशीट से पता चला है कि बच्चों को चढ़ाए गए खून के डोनर्स का कोई ठोस रिकॉर्ड मौजूद नहीं था. कई मामलों में डोनर्स की जानकारी अधूरी या पूरी तरह से गायब मिली. यही नहीं, खून की जांच में इस्तेमाल किए गए किट्स के बैच नंबर और कंपनी डिटेल्स तक दर्ज नहीं किए गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) से पहले सही तरीके से खून में HIV और दूसरे इंफेक्शंस की जांच नहीं की गई. कुछ यूनिट्स को केवल रैपिड कार्ड टेस्ट से जांचा गया, जबकि तय प्रोटोकॉल के मुताबिक, ज्यादा एडवांस्ड किस्म के CLIA या ELISA टेस्ट करने जरूरी होते हैं.

ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इंफेक्शन (TTI) के तहत डोनेट किए गए खून के HIV, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस टेस्ट होना अनिवार्य होता है. HIV की जांच के लिए 4th Generation ELISA या CLIA जैसे एडवांस टेस्ट जरूरी माने जाते हैं. इससे इंफेक्शन के शुरुआती फेज में भी सटीक पहचान हो जाती है.

लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला कि जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच बच्चों को जो खून चढ़ाया गया, उसमें से लगभग 17 प्रतिशत की जांच केवल रैपिड कार्ड टेस्ट से की गई थी. रैपिड कार्ड टेस्ट सस्ता होता है. नतीजे भी जल्दी आते हैं. लेकिन ये कई बार शुरुआती फेज के इंफेक्शन को पकड़ नहीं पाता है.

जांच में बेहद गंभीर किस्म की लापरवाहियां सामने आई हैं. डोनर्स से जरूरी मेडिकल इन्फॉर्मेशन लेने के लिए तैयार किए गए फॉर्म अधूरे थे. कई मामलों में बिना हेल्थ चेकअप और हीमोग्लोबिन जांच के ही खून लिया गया. जबकि रिकॉर्ड में सभी डोनर्स का हीमोग्लोबिन 12 ग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा दिखाया गया. (हेल्दी पुरुषों में हीमोग्लोबिन का लेवल 13 से 17.50 ग्राम प्रति डेसीलीटर, जबकि महिलाओं में 12 से 15.50 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए.) काउंसलर की पोस्ट खाली होने के चलते डोनर्स की काउंसलिंग और स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही थी. ब्लड बैंक में रजिस्टर कई एंट्री खाली मिली. दूसरे अस्पतालों से लिया गया खून भी नियमों के खिलाफ जाकर जारी किया जा रहा था. इस मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल को सस्पेंड कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़े एक्शन लेने की बात कही है.

वीडियो: सेहत: क्या किस करने से भी फैल सकता है HIV?

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