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कोर्ट ने 14 'गोरक्षकों' को सुनाई उम्रकैद की सजा, मुस्लिम शख्स को पीट-पीटकर मारा था

घटना अगस्त 2022 की है, जब गौ तस्करी के आरोप में नजीर अहमद नाम के एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. अब कोर्ट ने इस मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. क्या है पूरा मामला?

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14 जून 2026 (पब्लिश्ड: 03:55 PM IST)
Madhya Pradesh Court Gives Life Sentence To 7 Cow Vigilantes In 2022 Mob Lynching Case
सेशंस कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के एक मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. (सांकेतिक फोटो)
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मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की एक सेशंस कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के एक मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. यह घटना अगस्त 2022 की है, जब गो तस्करी के आरोप में नजीर अहमद नाम के एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. कोर्ट ने माना कि हमलावरों ने नजीर के साथ बहुत बेरहमी से मारपीट की थी, जिसकी वजह से उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई.

14 लोगों को उम्रकैद

शुक्रवार, 12 जून को नर्मदापुरम की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज तबस्सुम खान ने अमरावती (महाराष्ट्र) के रहने वाले नजीर अहमद की हत्या के मामले में दीपक उर्फ ​​बाबा केवट (38), अज्जू उर्फ ​​अजय राठौड़ (36), प्रकाश कौशल (33), चेतन मराठा (23), पवन बाथव (31), अमर उर्फ ​​भोला बाथव (38), कन्हैया बाथव (32), देवेन्द्र उर्फ ​​छोटू कोरी (22), संदीप उर्फ ​​राजा कौशल (26), अनुज उर्फ ​​बल्लू रघुवंशी (24), संजू उर्फ ​​राजेंद्र कौशल (39), आकाश उर्फ ​​पिंटोली बाथव (31), गौरव यादव (24) और आकाश सराठे (33) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 341, 148, 307/149 और 302/149 के तहत दोषी ठहराया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, तबस्सुम खान ने कहा कि दोषियों को सजा सुनाने से पहले अपराध की गंभीरता बढ़ाने वाले और कम करने वाले हालात पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा,

– यह साबित हो गया है कि आरोपियों ने मॉब लिंचिंग की.

– आरोपियों ने एक गैर-कानूनी भीड़ बनाई और घातक हथियारों से लैस होकर दंगा किया. 

– आरोपियों ने पीड़ित के साथ बहुत बेरहमी से मारपीट की, जिसके परिणामस्वरूप नजीर अहमद को गंभीर चोटें आईं, जैसा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज है. 

– आरोपियों की हरकत की वजह से नजीर अहमद की मौत हो गई और अन्य घायल लोगों को चोटें आईं.

क्या था मामला?

पीड़ित (अभियोजन) पक्ष के मुताबिक, 2-3 अगस्त 2022 की रात को ट्रक ड्राइवर शेख लाला नजीर अहमद और शेख मुश्ताक के साथ मवेशियों को नंदरवाड़ा से महाराष्ट्र ले जा रहे थे. तभी सिवनी मालवा (मध्य प्रदेश) के बाराखाड़ गांव के पास उनकी गाड़ी को रोका गया. ग्रामीणों के एक समूह ने कथित तौर पर ट्रक को रोका और उसमें सवार लोगों पर लाठियों और डंडों से हमला किया. बाद में नजीर अहमद की गंभीर चोटों की वजह से मौत हो गई.

इसके बाद सिवनी मालवा पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दंगा करने (धारा 147), गलत तरीके से रोकने (धारा 341) और हत्या की कोशिश (धारा 307) का मामला दर्ज किया गया. जांच के दौरान पुलिस ने मौके से खून के सैंपल इकट्ठा किए. गवाहों के बयान दर्ज किए और मरने से पहले पीड़ित का बयान भी लिया. सभी सबूतों की अच्छी तरह जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि आरोपियों ने लाठियों और डंडों से लैस होकर गैरकानूनी भीड़ बनाई थी और एक ही मकसद को पूरा करने के लिए काम किया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या पता चला?

कोर्ट ने इस घटना को मॉब लिंचिंग का साबित मामला माना. अदालत ने कहा कि बेरहमी से किए गए हमले की वजह से नजीर को गंभीर चोटें आई थीं. कोर्ट ने मेडिकल सबूतों पर भरोसा किया, जिनसे पता चला कि मृतक के सिर और शरीर पर कई चोटें आई थीं. नजीर अहमद को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और पोस्टमार्टम में खोपड़ी टूटने और शरीर पर कई जगह चोट लगने जैसी गंभीर चोटें पाई गई थीं. कोर्ट ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि मौत का हमले से कोई संबंध नहीं था.

ये भी पढ़ें: 16 साल से कर रहे थे इंतजार, जब हत्या का दोषी गांव लौटा, पूरे परिवार ने मिलकर मार दिया

मौत की सजा सुनाने से किया इनकार

हालांकि, दोषियों को कोर्ट ने मौत की सजा देने से इनकार कर दिया. कहा कि मौत की सजा बहुत ही दुर्लभ मामलों के लिए ही दी जानी चाहिए. कोर्ट ने सभी 7 दोषियों को IPC की धारा 302 के साथ धारा 149 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोषियों के परिवार वाले और रिश्तेदार फैसले के बारे में पता चलने पर कोर्ट परिसर के बाहर जमा हो गए. जैसे ही पुलिस दोषियों को जेल ले जाने लगी. दोषियों के रिश्तेदारों ने पुलिस की गाड़ी को रोकने की कोशिश की. कुछ रिश्तेदारों ने तो गाड़ी के आगे लेटकर उसका रास्ता रोकने की कोशिश भी की.

कोर्ट के फैसले के बाद दोषियों के परिवार वाले रो पड़े. उनमें से कुछ का कहना था कि उनके बच्चे तो गौ सेवा और गौ रक्षा के लिए गए थे, लेकिन अब उन्हें इस घटना का नतीजा भुगतना पड़ रहा है.

वीडियो: रायसेन में गौ-तस्करी के शक में मॉब लिंचिंग, 1 की मौत

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