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मध्यप्रदेश में 'रहस्यमय' बीमारी से 6 बच्चों की मौत, दो सिरप पर बैन लग गया

Madhya Pradesh Chhindwara: सरकार ने बुखार के लिए एक नया प्रोटोकॉल भी जारी किया है. इसके तहत अगर बच्चे को दो दिन से ज्यादा बुखार हो, तो उसे तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा ना दी जाए.

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30 सितंबर 2025 (पब्लिश्ड: 09:13 PM IST)
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छिंदवाड़ा के अस्पताल में अपने बच्चों के साथ परिजन. (India Today)
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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया इलाके में बच्चों की गंभीर बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं. 4 सितंबर से 26 सितंबर के बीच यहां 6 बच्चों की मौत हो चुकी है. इन सभी मामलों में बच्चों की किडनी फेल होने की बात सामने आई है. हालात को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है. कम के कम दो सिरप- Coldrif और Nextro-DS को बैन कर दिया गया है.

इंडिया टुडे से जुड़े पवन कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गोन्नाडे ने बताया कि अगस्त महीने में बारिश के चलते वायरल फीवर के केस बढ़े हैं. बुखार से पीड़ित बच्चों को परासिया के सरकारी अस्पताल में लाया गया है. डॉ. नरेश ने आगे कहा,

"4 सितंबर को एक डेथ रिपोर्ट हुई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि इनकी किडनी फेल होने से मृत्यु हुई. परासिया से ही एक बच्चा नागपुर रेफर हुआ था, जिसकी नागपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में डेथ हुई थी. इसके बाद दूसरी मौत परासिया के ही एक बच्चे की हुई. फिर 6 सितंबर को एक मौत हुई. इस तरह 4 सितंबर से लेकर 26 सितंबर तक परासिया क्षेत्र की कुल 6 डेथ रिपोर्ट हुई हैं. 6 मौतों के मामले में जांच की गई. उनके ब्लड सैंपल की जांच की गई... जितने भी पैरामीटर देखे तो कुछ नहीं पाया गया. परासिया क्षेत्र में 6 मौतें हुई हैं, उसमें इन सभी को पेशाब का ना बनना ओर पेशाब का ना होना पाया गया."

हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 500 से ज्यादा लोगों की जांच करवाई है. इनमें ब्लड टेस्ट, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट शामिल हैं, लेकिन अब तक किसी एक खास बीमारी की पुष्टि नहीं हो पाई है. राज्य और केंद्र सरकार की एक्सपर्ट्स टीमों ने भी प्रभावित गांवों का दौरा कर सैंपल लिए हैं. इनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

इस बीच जिला अस्पताल में भर्ती किए गए पांच बच्चों का इलाज सफल रहा. उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है. ये सभी बच्चे अब स्वस्थ हैं. सरकार ने बुखार से जुड़े मामलों के लिए एक नया प्रोटोकॉल भी जारी किया है. इसमें कहा गया है कि अगर बच्चे को दो दिन से ज्यादा बुखार हो, तो उसे तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा ना दी जाए.

इस मामले को लेकर छिंदवाड़ा के कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, मेडिकल कॉलेज के डीन और वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि बच्चों के इलाज में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो एयर एंबुलेंस से बच्चों को बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजा जाए.

उन्होंने कहा,

"इसमें जो भी जिम्मेदार हैं, चाहे वो दवा है, तो जो दवा बनाने वाले हैं, ड्रग इंस्पेक्टर ने सैंपल लिए हैं. उनके प्रोटोकॉल के तहत जो भी कार्रवाई होगी वो की जाएगी. अगर किसी डॉक्टर या किसी की जिम्मेदारी जांच में पाई जाती है, तो उसे भी देखा जाएगा कि उस पर क्या कार्रवाई करनी है. अभी तक जो वायरोलॉजी लैब के तीन सैंपल पुणे भेजे गए थे, उनकी रिपोर्ट में किसी वेक्टर जनरेटेड या वायरस की स्थिति नहीं है. इसका मतलब है कि कोई लोकल प्रॉब्लम है या फिर किसी दवा में या किसी और चीज में दिक्कत है. उस पर हमारी एक्सपर्ट्स की टीम काम कर रही है."

कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने माता-पिता से अपील की है कि वे झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज ना कराएं. संबंधित लक्षण दिखने पर तुरंत सर्टिफाइड डॉक्टर के पास जाएं. अधिकारी ने बच्चों को दिए जा रहे दो सिरप- Coldrif और Nextro-DS का इस्तेमाल तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं. मेडिकल स्टोर वालों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को कोई कॉम्बिनेशन सिरप ना दें, सिर्फ नॉर्मल सिरप ही दिए जाएं.

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