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वकीलों ने लखनऊ में DM ऑफिस और सरकारी दफ्तर बंद कराए, बुलडोजर से चैंबर गिराने पर मचा बवाल

Lucknow bulldozer action News: पूरा विवाद लखनऊ के पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर बने वकीलों के चैंबरों को लेकर शुरू हुआ. 17 मई की सुबह नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंची. कुछ ही देर बाद अवैध चैंबर पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया. इससे वकील काफी नाराज हैं.

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आसिफ़ असरार
| मौ. जिशान
18 मई 2026 (पब्लिश्ड: 03:00 PM IST)
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लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबर पर बुलडोजर चला था. (PTI)
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों और प्रशासन के बीच टकराव अब और बढ़ता दिख रहा है. पुराने हाईकोर्ट के बाहर बने कथित अवैध चैंबर्स पर बुलडोजर चलने के बाद सोमवार, 18 मई को वकीलों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया. वकीलों ने कामकाज का बॉयकॉट किया, कलेक्ट्रेट पहुंचे और आरोप है कि डीएम ऑफिस तक बंद करा दिया. यानी प्रशासन और वकीलों के बीच तनातनी का माहौल बना रहा.

दैनिक भास्कर की र‍िपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ बार एसोसिएशन के महामंत्री जितेंद्र यादव उर्फ जीतू यादव की अगुवाई में बड़ी संख्या में वकील कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे. आरोप है कि वहां वकीलों ने अलग-अलग सरकारी दफ्तरों में जाकर काम बंद कराया. बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया और कहा कि वकीलों के साथ गलत हो रहा है.

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने X पर लिखा,

"भाजपा किसी की भी सगी नहीं है : न सनातन की, न संविधान की, न संविधान के संपोषक वकीलों की."

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अखिलेश यादव का पोस्ट. (X @yadavakhilesh)

इसके पहले भी उन्होंने एक लंबा पोस्ट किया था. उसमें उन्होंने कहा था,

"लखनऊ में वकीलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना उनके चैंबर तोड़ना और विद्वान अधिवक्ताओं (वकीलों) के ऊपर लाठीचार्ज करना घोर आपत्तिजनक और घोर निंदनीय है. अधिवक्ता ही जब अन्याय का शिकार होंगे तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिलेगा?

भाजपा में शामिल हो रहे भ्रष्टाचारियों को छोड़कर सब कुछ अवैध ही है क्या? अब उत्तर प्रदेश के वकील मिलकर भाजपाइयों और उनके अन-रजिस्टर्ड संगी-साथियों के घर, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों के नक्शे निकलवाकर उनके वैध-अवैध होने का प्रमाण ढूंढेंगे और अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के लिए याचिका दाखिल करेंगे."

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अखिलेश यादव का पोस्ट. (X @yadavakhilesh)

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आगे लिखा था,

"हम अपील करते हैं कि लाठीचार्ज में घायल हुए वकीलों का निशुल्क उपचार कराया जाए और उनके काम की क्षति के लिए मुआवजा भी दिया जाए."

चैंबर पर बुलडोजर चला तो भड़के वकील

असल में ये पूरा विवाद लखनऊ के पुराने हाईकोर्ट और स्वास्थ्य भवन चौराहे के बाहर बने वकीलों के चैंबरों को लेकर शुरू हुआ. 17 मई की सुबह नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंची. कुछ ही देर बाद बुलडोजर चलना शुरू हो गया. सड़क किनारे बने कई चैंबर तोड़े जाने लगे.

यह कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर की गई. वकीलों ने आरोप लगाया कि जिन चैंबर को गिराने का आदेश दिया गया, उनके साथ ही दूसरे चैंबर पर भी बुलडोजर चलाया जा रहा है. इस दौरान बड़ी संख्या में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और नारे लगाए, जिसके वीडियो भी वायरल हुए. इनमें कुछ लोगों को पुलिस पर पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है. हालात को काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.

वकीलों के चैंबर पर हुई बुलडोजर कार्रवाई पर लखनऊ वेस्ट के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP West) कमलेश कुमार दीक्षित ने कहा था,

"सभी को पहले ही नोटिस दे दिया गया था. निशान लगा दिया गया था. कई बार नोटिस दे दिया गया था. सारी कार्रवाई नियमानुसार चल रही है. कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हो रही है. उन्हीं चैंबर को गिराया जा रहा है, जिन्हें नोटिस दिया गया है."

लेकिन वकीलों का आरोप अलग है. उनका कहना है कि हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सिर्फ 72 चैंबर हटाने का आदेश दिया था, लेकिन प्रशासन ने करीब 240 चैंबर गिरा दिए.

मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

25 मार्च को छपी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ नगर निगम को जिला और सत्र न्यायालय परिसर के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था.

नगर निगम ने अदालत में जो रिपोर्ट दाखिल की थी, उसमें कहा गया था कि 72 लोगों ने वहां कब्जा कर रखा है और इनमें ज्यादातर वकील हैं. इसके बाद जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की बेंच ने नगर निगम को कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. जरूरत पड़ने पर पुलिस और जिला प्रशासन की मदद लेने को भी कहा गया था.

ये मामला दो महिला वकीलों की याचिका से जुड़ा था. उन्होंने स्पेशल SC/ST कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की कार्रवाई की बात कही गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अगस्त में महिला वकीलों और दूसरे वकीलों के एक समूह के बीच विवाद हुआ था. महिला वकीलों ने घटना के चार दिन बाद FIR दर्ज कराई थी. वहीं दूसरे पक्ष ने बाद में स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

महिला वकीलों का आरोप था कि दूसरे समूह के कुछ वकीलों ने उनके घर के पास अवैध तरीके से चैंबर बना रखे हैं और वहां शराब पीकर लोगों से बदसलूकी की जाती थी. यही मामला अतिक्रमण हटाओ अभियान तक पहुंच गया. जिस तरह से कार्रवाई हुई, उसने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

वीडियो: लखनऊ में वकीलों के चैंबर्स पर बुलडोजर क्यों चला?

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