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SC/ST एक्ट और रेप के 29 झूठे केस दर्ज करवाए, अब वकील को हुई उम्रकैद की सजा

Lucknow के वकील परमानंद गुप्ता ने एक दलित महिला के साथ मिलकर कई झूठे मामले दर्ज कराए. ज्यादातर केस रेप और उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों के थे. जांच के दौरान यह सामने आया कि गुप्ता ने खुद 18 झूठे मामले और महिला के जरिए 11 मामले दर्ज कराए.

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20 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 20 अगस्त 2025, 04:11 PM IST)
Lucknow Lawyer Filed Fake Cases Gets Gets Life Sentence
कोर्ट ने पुलिस को भविष्य में इस तरह के मामलों में सतर्कता बरतने को कहा. (प्रतीकात्मक फोटो)
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यूपी के लखनऊ में रेप और SC/ST एक्ट के फर्जी मुकदमे दायर करना एक वकील को बहुत महंगा पड़ गया. कोर्ट ने फर्जी केस फाइल करने के मामले में वकील को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. वकील पर 5.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. वकील का नाम परमानंद गुुप्ता है. फिलहाल वह जेल में बंद है. गुप्ता पर आरोप था कि उसने दलित महिला की पहचान का गलत इस्तेमाल करके अपने विरोधियों के खिलाफ कई मुकदमे दायर किए थे, जो बाद में झूठे निकले.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, लखनऊ की SC/ST अदालत के विशेष जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मंगलवार 19 अगस्त को यह फैसला सुनाया. अदालत ने वकील परमानंद गुुप्ता को साजिश रचने और कानून का दुरुपयोग करने का दोषी ठहराया. वकील ने ये फर्जी केस एक महिला के माध्यम से दायर किए थे. इन मुकदमों का इस्तेमाल परमेश्वर गुप्ता ने अपने विरोधी अरविंद यादव और उनके परिवार के खिलाफ किया था.

विशेष जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने फैसला सुनाते हुए कहा,

“जैसे थोड़ी-सी खट्टी बूंदें पूरे दूध को खराब कर सकती हैं, उसी तरह वकील परमानंद गुप्ता जैसे लोगों को कानून का दुरुपयोग करने की अनुमति देने से न्यायपालिका की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचेगा. न्यायपालिका में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए गुप्ता जैसे अपराधियों को कड़ी सजा देना जरूरी है.”

कोर्ट ने मामले में सह-आरोपी रही दलित महिला को बरी कर दिया. उसे 20,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई. लेकिन कोर्ट ने महिला को भविष्य में SC/ST एक्ट का दुरुपयोग करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. 

विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि गुप्ता ने एक दलित महिला के साथ मिलकर कई झूठे मामले दर्ज कराए. ज्यादातर केस रेप और उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों के थे. जांच के दौरान यह सामने आया कि गुप्ता ने खुद 18 झूठे मामले और महिला के जरिए 11 मामले दर्ज कराए. ज्यादातर मामले वकील परमानंद गुप्ता के विरोधियों को फंसाने के लिए थे.

संपत्ति को लेकर जिनसे वकील का विवाद था, उन पर केस 

महिला की ओर से गैंगरेप और SC/ST एक्ट में दर्ज कराए गए ऐसे ही मामले की जांच ACP राधा रमन सिंह कर रहे थे. उन्होंने कोर्ट को बताया कि महिला ने फरवरी 2025 में दो लोगों के खिलाफ इन धाराओं में केस दर्ज कराया था. लेकिन जांच में सामने आया कि महिला के आरोप झूठे थे. कई गवाहों ने पुष्टि की कि महिला उस जगह पर मौजूद नहीं थी, जहां वारदात होने का दावा किया गया था. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गुप्ता की पत्नी और आरोपियों के परिवार के बीच संपत्ति विवाद था. गुप्ता ने आरोपियों को टारगेट करने के लिए यह झूठा केस दर्ज कराया. 

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस फैसले की एक कॉपी बार काउंसिल ऑफ इंडिया और यूपी बार काउंसिल को भेजी जाए, ताकि ऐसे दोषी वकीलों को अदालत में प्रैक्टिस करने से रोका जा सके. कोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को भी निर्देश दिए कि भविष्य में अगर एक ही महिला या परिवार की ओर से बार-बार रेप, गैंगरेप या SC/ST एक्ट का गलत इस्तेमाल कर झूठे मामले दर्ज किए जाते हैं तो उसे FIR और जांच रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए. 

कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि AI टूल्स का उपयोग किया जाए ताकि झूठे मामलों की पहचान की जा सके और इस तरह के मामलों का पैटर्न ट्रैक किया जा सके.

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