गोतस्करी की आरोपी महिला को पकड़ने हाईकोर्ट गई थी पुलिस, दरोगा पर ही FIR हो गई
मामला सोमवार, 19 जनवरी की दोपहर का है. काकोरी थाने के तीनों पुलिसकर्मी गो तस्करी की आरोपी महिला आमिना खातून को गिरफ्तार करने हाईकोर्ट पहुंचे थे.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच कैंपस में गोमांस तस्करी की आरोपी महिला को गिरफ्तार करने गए एक दरोगा और 2 सिपाही खुद ही पर FIR दर्ज करवाकर लौटे. इतना ही नहीं, तीनों को सस्पेंड भी कर दिया गया. आरोपी पुलिसकर्मियों की पहचान काकोरी थाने के दरोगा उस्मान खान, एसएसआई लाखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह के तौर पर हुई है. इंडिया टुडे से जुड़े आशीष श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार, 19 जनवरी की दोपहर काकोरी थाने के ये तीनों पुलिसकर्मी गो तस्करी की आरोपी महिला आमिना खातून को हाईकोर्ट में गिरफ्तार करने पहुंचे थे.
महिला अपने एक एडवोकेट रिश्तेदार से मिलने के लिए यहां आई थी. जैसे ही पुलिस वाले महिला को गिरफ्तार करने के लिए एडवोकेट के चैंबर में घुसे, वकीलों ने उन्हें घेर लिया. उन्होंने पुलिस के एक्शन पर सवाल उठाया और जमकर बवाल काटा. साथ ही लोकल थाने की पुलिस भी बुला ली. एडवोकेट सज्जाद हुसैन और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार शैलेंद्र कुमार ने तीनों पुलिसकर्मियों पर झूठी सूचना देने, आपराधिक अतिचार, धोखाधड़ी और धमकाने के आरोप लगाया.
ये केस गो तस्करी के एक पुराने मामले से जुड़ा है, जिसमें एक महिला पर प्रेमी के साथ मिलकर पति को गोमांस तस्करी के आरोप में फंसाने के लिए साजिश रचने का आरोप है.
इंडियन एक्सप्रेस को DCP विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि एक शादीशुदा महिला आमिना खातून इंस्टाग्राम पर एक लड़के से मिली थी. लड़का उससे मिलने-जुलने भी आने लगा. दोनों में प्यार हुआ और फिर खातून के पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची जाने लगी. प्लान बना कि पति को गो तस्करी के आरोप में फंसाकर जेल भिजवा दिया जाए, इसके लिए महिला के प्रेमी ने उसके पति की कार में 2 किलो मांस रख दिया. बाद में इसकी सूचना पुलिस को दे दी.

शिकायत के बाद पुलिस ने महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया लेकिन 1 महीने बाद ही उसे जमानत मिल गई.
DCP ने आगे बताया कि आरोपी प्रेमी और महिला ने यहीं हार नहीं मानी. 14 जनवरी 2026 को प्रेमी लखनऊ पहुंचा. उसके साथ 10 किलो मांस भी था. इस मांस को एक ई-रिक्शा के जरिए वहां पहुंचा दिया, जहां महिला का पति काम करता है. साथ ही उसने कुछ दक्षिणपंथी संगठनों को इसकी सूचना दे दी एक ई-रिक्शा में गाय का मांस ले जाया जा रहा है. काकोरी पुलिस की टीम ने 15 जनवरी को मांस सहित ई-रिक्शा को बरामद कर लिया. जांच के दौरान ई रिक्शा मालिक के पास महिला और उसके पति का नंबर मिला. इसलिए पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया.
महिला के पति से जब पूछताछ की गई तो अलग ही मामला सामने आया. उसने बताया कि उसे अपनी पत्नी पर शक था कि उसका किसी और के साथ अफेयर है. इसलिए उसने घर में सीसीटीवी कैमरा लगवा रखा था. इस कैमरे के फुटेज की जांच के बाद महिला और उसके प्रेमी की साजिश की बात खुली. पुलिस ने देखा कि पति के बाथरूम जाने के बाद महिला ने अपने पति का फोन यूज किया था. इतना ही नहीं, उसने अपने प्रेमी को फोन भी किया था. इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर 19 जनवरी को आरोपी प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया लेकिन महिला पुलिस के हाथ नहीं लगी.
DCP ने बताया कि पुलिस की एक टीम को आरोपी महिला के वकील से मिलने के लिए लखनऊ हाईकोर्ट जाने की सूचना मिली थी. इस सूचना के आधार पर काकोरी थाने के 3 पुलिसकर्मियों को कोर्ट के बाहर उस पर नजर रखने का आदेश दिया गया था. महिला के कोर्ट से निकलने पर सीनियर अफसरों को सूचित करने को भी कहा गया था, लेकिन जल्दबाजी में वो तीनों कोर्ट के अंदर पहुंच गए.
जब वो महिला को पकड़ने एडवोकेट के चैंबर में पहुंचे तो वहां हंगामा मच गया. इस दौरान आरोपी महिला वहां से फरार हो गई. उसे पकड़ने गए पुलिस वाले अलग फंस गए. विभूतिखंड थाने में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर दी गई. जांच में सामने आया कि जिस मामले का हवाला देकर पुलिस कोर्ट में दाखिल हुई थी, वह केस हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्टेड नहीं था. ये मामला जब सीनियर पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा तो DCP पश्चिमी विश्वजीत श्रीवास्तव ने दरोगा और दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया.
अधिकारियों ने कहा कि हाईकोर्ट जैसे सेंसिटिव एरिया में बिना अनुमति या वारंट के प्रवेश करना नियमों का उल्लंघन है.
पुलिस ने आगे बताया कि महिला और उसके प्रेमी के खिलाफ गो हत्या अधिनियम और BNS की साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. साथ ही उसके पति को रिहा कर दिया गया है. इसके अलावा गाड़ी में बरामद मांस गोमांस है या नहीं, इसकी जांच के लिए भेज दिया गया है.
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