सोने की खान खोजने गए थे, गुफा में बाढ़ आ गई, 5 लोग जिंदा दफन हो जाते अगर वो 'एक' न भागता
लाओस की एक गुफा में सोने की खान खोजने गए 7 लोग फंस गए. बारिश और बाढ़ ने उनका रास्ता बंद कर दिया. 10 दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद 5 लोगों को जिंदा निकाला गया.

7 लोग सोने की खान खोजने के लिए निर्जन इलाके की एक गुफा में घुसे थे. यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने ऐसे दुर्गम रास्ते पार किए, जिसके लिए सोच पाना भी मुश्किल है. ये सब रिस्क लिया गया क्योंकि उम्मीद थी कि गुफा में कुछ ऐसा हाथ लगेगा कि उनकी जिंदगी बदल जाएगी. लेकिन, हम जो सोचते हैं, हमेशा ठीक-ठीक वही नहीं होता. उन 7 लोगों के साथ भी यही हुआ. उनके खोजी अभियान के बीच ही मौसम बिगड़ गया. जमकर बारिश हुई.
इतनी ज्यादा बारिश हुई कि गुफा में बाढ़ आ गई. बजरी, रेत, मलबा इतना बहा कि बहकर गुफा के गेट पर जमा हो गया. जाने का रास्ता बंद. सोने की खान खोजने आए थे. जान मुश्किल में पड़ गई. गंदे पानी और अंधेरे के बीच ऐसा फंसे कि जीवन की उम्मीद ही खोने लगी. वहां मौत होती तो दुनिया को पता भी न चलता कि पहाड़ों के पार इस गुफा में 7 लोग जीवन की जंग भी लड़े थे. अगर उनमें से एक शख्स समय रहते भाग न गया होता.
लाओस की कहानीये कहानी लाओस की है. दक्षिण पूर्व एशिया में चीन के दक्खिन और कंबोडिया के उत्तर में एक छोटा सा देश, जिसकी सारी सीमाएं जमीन से घिरी (Landlocked) हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, लाओस के एक गांव के रहने वाले 7 लोग 19 और 20 मई को सोने की खान और कुछ कीमती मिनरल्स की खोज में एक गुफा में दाखिल हुए थे. बहुत समय नहीं बीता था कि भारी बारिश उन पर आफत बनकर टूट पड़ी. गुफा के अंदर अचानक बाढ़ आ गई. पानी की बड़ी-बड़ी धाराएं बह निकलीं. अपने साथ जो भी मिला, उसे बहाते गुफा में दाखिल होने लगीं. रेत, बजरी, मलबा पानी की तेज धारा के साथ सुरंग में आ घुसी. इससे गुफा का एग्जिट गेट बंद हो गया और सोने की खान खोजने आए लोग सैकड़ों मीटर नीचे जमीन में बहुत बुरी तरह फंस गए.
उनके पास इसका कोई बैकअप प्लान नहीं था. कोई नहीं था जो बाहर उन्हें रेस्क्यू करने के लिए बैठा हो. इस विपदा भरे समय में लेकिन एक चीज उनके साथ अच्छी हुई और जिसकी वजह से ही वह मौत की कैद से जिंदगी का रास्ता निकाल पाए. हुआ ये कि जब गुफा में पानी भरने लगा, उसी समय उनका एक साथी वहां से बच निकलने में कामयाब हो गया. वह भागा-भागा अधिकारियों के पास पहुंचा और अपने साथियों की जान बचाने की गुहार लगाई.
रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआतअधिकारियों को इसकी जानकारी लगी तो रेस्क्यू ऑपरेशन का प्लान बना लेकिन सवाल था कि लाओस की राजधानी वियनतियाने से लगभग 120 किलोमीटर उत्तर में पहाड़ी इलाके की उस गुफा तक पहुंचेंगे कैसे? एक तो गुफा बहुत दूर निर्जन में और पहाड़ी रास्ते के पार था. ऊपर से मौसम ऐसा खराब था कि कोई भी रेस्क्यू ऑपरेशन करना खतरे की ओर बढ़ना हो गया था. लेकिन,फिर भी गुफा में फंसे 6 लोगों को बचाने के लिए बेहद जटिल और खतरनाक अभियान चलाया गया. बचाव टीम के लोग लगातार हो रही बारिश में खड़ी और फिसलन भरी पहाड़ी पर लगभग चार किलोमीटर तक चढ़े.
गुफा का गेट इतना ज्यादा संकरा था कि एक बार में केवल एक ही व्यक्ति वहां से गुजर सकता था. अंदर तो हालात और खराब थे. नीचे रास्ता ऐसा संकरा था कि मुड़ने भर की भी जगह नहीं थी. मिट्टी का कोई ठिकाना नहीं था. जाने कब धसक पड़े. दीवारें कीचड़ की थीं, जिन पर एकदम भरोसा नहीं किया जा सकता था. ठंड भी एकदम जमा देने वाली थी. बाढ़ का पानी ऐसा मटमैला गाढ़ा था कि गोताखोरों को अपने हाथ भी नहीं दिखते थे. अंदर के हालात के बारे में एक ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर ने बताया कि बाढ़ के पानी को देखकर ऐसा लगता था, जैसे आप कॉफी में गोता लगा रहे हों.
कई देशों के गोताखोर लगेलाओस के अलावा थाइलैंड, फिनलैंड, फ्रांस, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया से भी गोताखोर बुलाए गए. तकरीबन 10 दिनों की जद्दोजहद के बाद रेस्क्यू टीम को आखिरकार 27 मई को सफलता मिली. गोताखोर अंधेरे पानी से निकलकर गुफा के अंदर एक हवादार जगह पर आ गए.
उन्होंने देखा कि गुफा के एंट्री गेट से तकरीबन 300 मीटर दूर बाढ़ के पानी से घिरी एक चट्टान थी. इसकी कगार पर 5 थके-हारे ग्रामीण एक साथ बैठे थे.
असली काम बाकी थालेकिन, मुश्किल यहीं खत्म नहीं होती. असली काम अभी बाकी था. रेस्क्यू करके ग्रामीणों को गुफा से बाहर लेकर जाना यहां तक आने से ज्यादा कठिन काम था. शनिवार, 30 मई को इसके लिए बड़े स्तर पर ऑपरेशन हुआ. रेस्क्यू टीम की साहस भरी कोशिश से एक-एक करके ग्रामीणों को गुफा से बाहर निकाला गया. कीचड़ और पानी से भीगे हुए ग्रामीण जब गुफा से बाहर खुले आसमान के नीचे आए तो फूट-फूटकर रोने लगे. उनमें से कुछ की जीवन से भरी मुस्कान देख बचाने आए लोगों की भी आंखें भर आईं.
मिशन खत्म नहीं हुआ…अंधेरी गुफा से 4 जिंदा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लेने के बाद लोगों में जश्न का माहौल था. लेकिन मिशन खत्म नहीं हुआ था. दो ग्रामीण अभी भी लापता हैं. गोताखोर गुफा की बाढ़ में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. लगातार बिगड़ते मौसम के बीच पानी में डूबी संकरी सुरंगों में दोनों की तलाश की जा रही है. मुश्किलें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं लेकिन उम्मीद का दीया बुझा नहीं है.
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