'मां काली, शिव बनकर पैसे मांगते, आशीर्वाद देने के बहाने वॉलेट-स्मार्टफोन निकाल लेते'
आरोपियों की तस्वीरों के अलावा Kolkata Police ने एक फोटो भी शेयर की, जिसमें उनसे बरामद सामान दिख रहा है. इनमें फूल-मालाएं, नकली हाथ या दस्ताने, कंघी, नकली बाल और मुकुट आदि शामिल हैं.

आप ट्रैफिक सिग्नल पर इंतजार कर रहे हैं या फिर शायद सड़क पार कर रहे हैं. तभी मां काली, शिव या दूसरे भगवान या देवी-देवता के भेस में आपकी तरफ कोई आता दिखता है. उसका मकसद केवल आपसे पैसे मांगना होता है. अमूमन भारत के हर शहर में यह कोई बहुत अनजान सीन नहीं है.
कोलकाता पुलिस का कहना है कि उनके शहर में तो ऐसा होता ही है. जब भगवान और देवी-देवताओं के भेस में कोई आ जाता है, तो आप धार्मिक मान्यताओं के आधार पर कुछ पैसे भी दे देते हैं. लेकिन 'देवी-देवताओं' के ग्रुप के गायब होने के बाद आपको पता चलता है कि आपका वॉलेट या मोबाइल फोन भी गायब है. क्योंकि देवी-देवताओं के भेस में चोरों ने 'बड़ी कारीगरी' से आपका सामान चुरा लिया.
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ऐसा ही केस आया. ऊपर की सारी बातें कोलकाता पुलिस ने खुद अपने ऑफिशियल X अकाउंट पेज पर बताई हैं. इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है. जोरासांको पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर चार कथित भिखारी 14 फरवरी से वॉच सेक्शन की कस्टडी में हैं. चारों को हेस्टिंग्स इलाके से गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस ने बताया कि चारों आरोपी गुजरात के आनंद जिले के रहने वाले हैं. उनके नाम अनिल रामजू सलात, धीरू कालोभाई सलात, समीरभाई सलात और राजू कुमार हैं. आरोप है कि इनका गैंग कोलकाता ही नहीं, दूसरे शहरों में भी यही गैर-कानूनी काम कर रहा था.
आरोपियों की तस्वीरों के अलावा कोलकाता पुलिस ने एक फोटो भी शेयर की, जिसमें उनसे बरामद सामान दिख रहा है. इनमें फूल-मालाएं, नकली हाथ या दस्ताने, कंघी, नकली बाल और मुकुट आदि शामिल हैं.
कैसे पकड़े गए आरोपी?
14 फरवरी को पुलिस ने मोहम्मद शाहनवाज और मोहम्मद समीर को पार्क स्ट्रीट इलाके से गिरफ्तार किया. गिरीश पार्क पुलिस स्टेशन में कुछ दिन पहले दर्ज मोबाइल चोरी के एक केस में इनकी गिरफ्तारी हुई. उनसे पूछताछ के दौरान पुलिस को कुछ जानकारी मिली. इसके बाद पुलिस इन चारों तक पहुंच गई. अब पुलिस मामले से जुड़े बड़े गैंग की तलाश में है.
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