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कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर बनी मस्जिद पर हंगामा, BJP हटवाना चाह रही?

Kolkata Airport Masjid: BJP के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कोलकाता एयरपोर्ट की मस्जिद को लेकर राज्यसभा में सवाल पूछा. केंद्र सरकार ने इसका लिखित जवाब दिया है.

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कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे 2 पर स्थित बैंकड़ा मस्जिद. (फाइल फोटो/ITG)
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सुशीम मुकुल
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3 दिसंबर 2025 (अपडेटेड: 4 दिसंबर 2025, 11:27 AM IST)
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कोलकाता में बहुत से लोग शायद नहीं जानते होंगे कि उनके शहर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट में एक मस्जिद मौजूद है. इस मस्जिद का नाम 'बैंकड़ा मस्जिद' है. यह मस्जिद एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से करीब 300 मीटर दूर है. इसी वजह से यह मस्जिद कई बार विवादों में रही है. अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने एक बार फिर इस मस्जिद का मुद्दा उठाया है.

बैंकड़ा मस्जिद पर ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब BJP के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में इस मस्जिद को लेकर सवाल पूछा. इस पर उन्होंने सवाल किया कि इस मस्जिद को क्यों नहीं हटाया जा रहा है. इस पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) का जवाब भी आया. केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने समिक के सवाल का लिखित जवाब दिया, लेकिन उन्होंने मस्जिद हटाने के सवाल पर सीधे कुछ नहीं कहा. उन्होंने लिखा,

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 BJP नेता अमित मालवीय ने इसी जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया दी.

अमित मालवीय ने X पर लिखा,

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यह पहला मौका नहीं है जब मस्जिद पर विवाद हुआ हो. कई बार मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग की गई. इससे पहले BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि मस्जिद की वजह से एयरपोर्ट का विस्तार भी रुका हुआ है.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर मस्जिद एयरपोर्ट के अंदर आई कैसे? इंडिया टुडे से जुड़े सुशीम मुकुल की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकड़ा मस्जिद 1890 के दशक में बनी थी. एयरपोर्ट अधिकारियों और स्थानीय लोगों के हवाले से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह मस्जिद 19वीं सदी के अंत से यानी 1890 के दशक से मौजूद है.

यह उस समय की बात है जब अंग्रेजों ने कलकत्ता के उत्तरी बाहरी इलाके में हवाई अड्डा नहीं बनाया था. 1890 के दशक में, जिस जगह पर अब सेकेंडरी रनवे है, वो एक गांव था. इसी में ये मस्जिद थी.

1924 में ब्रिटिश जमाने का एयरोड्रोम पुराने रॉयल आर्टिलरी आर्मरी (अब दम दम कैंटोनमेंट) के पास बनाया गया था. तब भी दम दम एयरपोर्ट के पश्चिम में मस्जिद के चारों तरफ इंसानी बस्तियां थीं. ये एयरोड्रोम आज के कलकत्ता/कोलकाता एयरपोर्ट से पहले बना था.

बाद में 1950 और 1960 के दशक में जैसे-जैसे एयर ट्रैफिक बढ़ा, एयरपोर्ट का पश्चिम की ओर विस्तार किया गया. एक नया (सेकेंडरी) रनवे जोड़ा गया. उस विस्तार के दौरान, प्राइमरी रनवे के उत्तर और पश्चिम में बसे गांवों को हटा दिया गया और वहां के लोगों को जेसोर रोड पार करके उस जगह पर बसाया गया, जिसे अब मध्यमग्राम कहा जाता है. 1962 में जब जमीन एयरपोर्ट प्राधिकरण को दी गई, तब भी मस्जिद को वहीं रहने दिया गया.

मस्जिद हटाने की कोशिश नाकाम

पिछले 20-25 सालों में कई बार मस्जिद को पास ही किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोशिश हुई, लेकिन मस्जिद समिति से सहमति नहीं मिली. 2003 में तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री शाहनवाज हुसैन और उस समय के पश्चिम बंगाल CM बुद्धदेव भट्टाचार्य की बैठक के बाद रनवे को ही थोड़ा मोड़कर निर्माण किया गया.

2019 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने मस्जिद तक सुरंग बनाने का सुझाव दिया था, ताकि ऊपरी हिस्सा टैक्सी सर्विस के लिए इस्तेमाल हो सके. लेकिन सुरक्षा कारणों से प्रस्ताव अटक गया. 2023 में AAI ने एक बस सेवा भी शुरू की ताकि लोग सुरक्षित रास्ते से मस्जिद तक पहुंच सकें. लेकिन ये मेन रनवे तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैक्सीवे से ओवरलैप होती थी.

बाद में जैसे-जैसे समय बीतता गया, एयरपोर्ट ऑपरेशन क्षेत्र के अंदर होने के बावजूद, स्थानीय मुसलमानों का मस्जिद जाना जारी रहा. एक स्थानीय नमाज अदा करने वाले ने 2019 में टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मस्जिद का जिक्र हवाई अड्डे की जमीन के दस्तावेज में है.

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