'10 लाशें खुद निकालीं, कई अब भी दबे', किश्तवाड़ में आई तबाही की कहानी चश्मदीदों की जुबानी
Kishtwar Cloudburst: इस त्रासदी में अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है. एक चश्मदीद ने बताया कि उसने एक मकान के नीचे से 10 डेड बॉडी निकालीं और अभी भी कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं. कई अन्य पीड़ितों ने भी अपनी आपबीती सुनाई है.
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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से (Kishtwar Cloudburst) अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है. ये आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. गुरुवार, 14 अगस्त को आई इस त्रासदी में CISF के दो जवानों समेत 65 लोगों के शव बरामद किए गए हैं. जबकि कई लापता हैं. एक चश्मदीद ने बताया कि अभी भी कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं.
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, आंखों में आंसू लिए और मलबों में अपनों को ढूंढ़ते चश्मदीदों ने तबाही के बारे में बताया. एक महिला ने कहा,
आगे बताया कि उनका पुराना घर सुरक्षित है, लेकिन जो नया बनाया था, वो नाले के साथ बह गया. वहीं, एक पीड़िता अनु की मां ने बताया,
एक मृतका के पति ने बताया कि तबाही के दौरान उनकी पत्नी, बेटी और बेटा लापता हो गए. जिनमें से बेटी मिल गई, लेकिन उसकी हालत गंभीर है. वहीं, पत्नी की मौत हो गई है और बेटा अभी तक लापता है. आंसू पोछते हुए उन्होंने बताया,
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'10 डेड बॉडी निकालीं'पुंछ से किश्तवाड़ काम करने आए एक चश्मदीद सलाहुल हसन ने बताया कि गुरुवार को करीब 12:30 बजे के वक्त बादल अचानक घिर आया. तभी अचानक बहुत जोर से आवाज आई और मलबा, मिट्टी, पेड़ बहकर आए. पेशे से मिस्त्री सलाहुल हसन ने बताया कि वे जिस ब्रिज पर स्लैब डालने के लिए आए थे, उसे तोड़ते हुए मलबा गांव की तरफ चला गया. आगे बताया,
बता दें कि बादल फटने की ये घटना किश्तवाड़ के चिशोती इलाके में हुई. इससे इलाके में भारी बाढ़ आ गई. अब तक रेस्क्यू टीम ने 167 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला है. जबकि कई लोगों के अभी भी फंसे होने की आशंका है.
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