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योगी के लिए 'कालनेमि', कैशव मौर्य के लिए 'पूज्य', अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सरकार का कलेश खोल दिया?

Prayagraj माघ मेले में स्नान को लेकर चल रहे विवाद के बीच डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया. इससे पहले मेला प्रशासन ने नोटिस देकर उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाया था.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर उत्तर प्रदेश सरकार में एक राय नहीं है. (इंडिया टुडे)
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समर्थ श्रीवास्तव
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22 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:56 PM IST)
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रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, 'जाकि रहि भावना जैसी प्रभु मूरत देखहिं तिन तैसी.' एक तरफ प्रयागराज मेला प्रशासन नोटिस देकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर सवाल उठा रहा है. तो वहीं सरकार के उप कप्तान केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें ‘पूज्य’ शंकराचार्य कह कर संबोधित किया है.

22 जनवरी की सुबह ही सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता. वैसे तो उन्होंने नाम किसी का नहीं लिया. लेकिन जिन पर निशाना साधा, उनको 'कालनेमि' तक कह दिया. 

कहा गया कि योगी आदित्यनाथ का निशाना स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर ही था. हालांकि कुछ ही घंटे बाद डिप्टी सीएम केशव मौर्य मीडिया के सामने आए और कहा कि पूज्य शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम है. केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, 

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प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन आमने-सामने आ गए थे. मेला प्रशासन ने उन्हें पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए जाने से रोक दिया था. इसके बाद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई थी. इस घटना से नाराज होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना शुरू कर दिया था. वहीं मेला प्रशासन ने उनको नाम के साथ शंकराचार्य लिखने पर नोटिस थमा दिया.

इस घटना के बाद से ही योगी आदित्यनाथ सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने हैं. इस बीच 22 जनवरी को योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कहा,

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योगी आदित्यनाथ ने भले ही किसी का नाम नहीं लिया. लेकिन इस बयान को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े हालिया विवाद से जोड़ा जा रहा है. कालनेमि रामायण का एक खल पात्र है. वह मायावी असुर था. लक्ष्मण के लिए जड़ी बूटी लाने जा रहे हनुमान को रोकने के लिए उसने संन्यासी का वेश धारण किया था.

वीडियो: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर कार्रवाई और सतुआ बाबा के VIP प्रोटोकॉल की क्या कहानी है?

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