The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Karnataka High Court says Chop legs or hands, then only people will obey laws while denying bail to rape accuse

'हाथ-पैर काटो तब लोग कानून मानेंगे', बढ़ते अपराध पर HC की झल्लाहट सामने आई

कोर्ट ने कहा कि अपराध करना लोगों के लिए आम बात हो गई है, क्योंकि अपराधियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं होती.

Advertisement
pic
2 जून 2026 (अपडेटेड: 2 जून 2026, 05:24 PM IST)
Karanatak High court
कर्नाटक हाई कोर्ट. फाइल फोटो: इंडिया टुडे
Quick AI Highlights
Click here to view more

                                                       "अगर किसी का हाथ या पैर काट दिया जाए, तो शायद लोग कानून मानने लगेंगे."

ये टिप्पणी कर्नाटक हाई कोर्ट की है. कोर्ट ने कहा कि लोगों में कानून का डर खत्म हो गया है. उन्होंने आगे कहा कि अगर सजा को और सख्त बनाया जाए तो शायद लोगों को कानून मानने की समझ आ जाएगी. पूरा मामला क्या है, आइए जानते हैं.

दरअसल, कर्नाटक हाई कोर्ट में रेप के एक मामले की सुनवाई चल रही थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी एक 23 साल का इंजीनियरिंग छात्र है. उस पर अपनी एक पूर्व क्लासमेट के साथ यौन शोषण का आरोप लगा है. आरोपी अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है. उसको जमानत देने से इनकार करते हुए जस्टिस आर नटराज ने कहा,

'लोगों में कानून का डर खत्म हो रहा है, क्योंकि हम अपराधियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं करते. अगर किसी का हाथ या पैर काट दिया जाए, तो शायद लोग कानून मानने लगेंगे. हमारे यहां लोकतंत्र है, इसलिए लोग इसका फायदा उठाते हैं.'

जस्टिस आर नटराज ने कहा कि अपराध करना लोगों के लिए आम बात हो गई है, क्योंकि अपराधियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने इसकी तुलना कुछ पश्चिम एशियाई देशों से की, जहां अपराधों के लिए कड़ी सज़ा दी जाती है.

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि छात्र उस अपराध के लिए करीब दो महीने जेल में रह चुका है, जिसे उसने कथित तौर पर किया ही नहीं है. उन्होंने दलील दी कि आरोप लगभग तीन साल पुरानी घटनाओं से जुड़े हैं. इस पर जज ने कहा, 

'अगर नमक खाया है तो पानी भी पीना पड़ेगा. इसे चार-पांच दिन और जेल में रहने दीजिए. इसे जेल की आदत पड़ने दीजिए. कौन जानता है, अगर सज़ा हुई तो फिर जेल लौटना पड़ सकता है.'

8 जून को अगली सुनवाई

पुलिस के मुताबिक मामला 12 सितंबर 2023 का है. आरोपी ने दोस्ती पर बात करने के बहाने से महिला को एक फ्लैट में बुलाया और वहां उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. पीड़ित महिला ने पहले इसको लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत की थी. उसके बाद उसने पुलिस में भी मामला दर्ज कराया. फिलहाल, मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. अब मामले की अगली सुनवाई 8 जून के लिए तय की गई है.

वहीं, जस्टिस आर नटराजकी इस टिप्पणी के बाद यह बहस शुरू हो गई कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में न्यायाधीशों की भाषा कैसी होनी चाहिए और अपराधियों को सज़ा देने की व्यवस्था को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए. आपकी क्या राय है, कॉमेंट में बताइए.

वीडियो: 'पति को नपुंसक कहना मानहानि नहीं, अगर... ', कहते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्नी को दी राहत

Advertisement

Advertisement

()