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'हर नाकाम रिश्ते को...' , रेप केस पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की टिप्पणी

Karnataka High court ने एक युवक को राहत दी है. जो अपनी Bumble डेट के चलते रेप के आरोप में फंस गया था. कोर्ट ने कहा कि हर असफल संबंध को आपराधिक मामले में नहीं बदला जा सकता. खासकर जब शुरुआत में किसी प्रकार की जबरदस्ती या धोखे का प्रमाण न हो.

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17 दिसंबर 2024 (अपडेटेड: 17 दिसंबर 2024, 03:24 PM IST)
Karnataka High Court grants relief to youth accused rape bumble date
कर्नाटक हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी युवक को अंतरिम राहत दी है. (इंडिया टुडे)
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कर्नाटक हाई कोर्ट (Karnataka Highcourt) ने 16 दिसंबर को एक युवक के खिलाफ रेप के केस पर रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि हर असफल संबंध को आपराधिक मामले में नहीं बदला जा सकता. खासकर जब शुरुआत में किसी प्रकार की जबरदस्ती या धोखे का प्रमाण न हो. दरअसल युवक एक महिला के साथ बम्बल डेट (Bumble Date) पर गया था. जिसकी शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि युवक डेटिंग ऐप पर खुद को रजिस्टर करने के चलते अपराध के जाल में फंस गया. जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल बेंच ने कहा कि यह मामला डेटिंग ऐप्स के खतरों का एक क्लासिक उदाहरण है. आरोपी और शिकायतकर्ता डेटिंग ऐप बम्बल पर खुद को रजिस्टर करते हैं. फिर वे दोनों एक OYO रूम में मिलते हैं. और अगले दिन आरोपी  शिकायतकर्ता को घर छोड़ देता है. जिसके अगले ही दिन शिकायतकर्ता पुलिस स्टेशन जाती है. और IPC की धारा 376 के तहत रेप का मामला दर्ज करवाती है.

कोर्ट ने आगे रिकॉर्ड किया कि पुलिस ने पहले ही मामले में चार्जशीट फाइल कर दिया है. शिकायतकर्ता ने किसी भी तरह के जबरन यौन संबंध का आरोप भी नहीं लगाया है. उनके मुताबिक वे सभी सहमति से किए गए थे. लेकिन इसकी सहमति बलपूर्वक ली गई थी. आरोपी सम्प्रस एंथनी के वकील ने बताया, 

 यह उनके मुवक्किल और शिकायतकर्ता के बीच सहमति से बनाए गए यौन संबंध का मामला था. इस साल अगस्त में बम्बल पर कुछ समय तक ऑनलाइन चैट के बाद दोनों ने मिलने का फैसला किया. और शारीरिक संबंध बनाए.

अगले दिन महिला ने रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. कोर्ट ने उनके इस स्टेटमेंट पर ध्यान दिया कि जांच अधिकारी ने बिना किसी विवेक का उपयोग किए चार्जशीट फाइल किया. कोर्ट ने यह भी बताया कि आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत को चार्जशीट का हिस्सा नहीं बनाया गया था. और सभी गवाहों के बयान शब्दश: एक जैसे थे. इसलिए कोर्ट ने आरोपी को अंतरिम राहत देने का निर्णय किया. 

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