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ITBP जवान की मां का कटा हुआ हाथ अब कहां है? सिस्टम की घोर लापरवाही फिर सामने आई

साफ है कि पुलिस और मेडिकल प्रशासन में तालमेल नहीं है. इसी कारण महिला का हाथ थाने में पड़ा है. जबकि मामला जिस निजी अस्पताल से जुड़ा है उसने पुलिस की शुरुआती जांच में अपनी गलती को मान लिया था. आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से महिला का हाथ काटना पड़ा. उनके बेटे और ITBP जवान विकास सिंह एक बक्से में मां का हाथ लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे.

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28 मई 2026 (अपडेटेड: 28 मई 2026, 05:29 PM IST)
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ITBP जवान की मां का कटा हुआ हाथ अभी भी पुलिस स्टेशन में ही है. (फोटो- इंडिया टुडे)
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Indo-Tibetan Border Police (ITBP) के जवान विकास सिंह की मां का कटा हुआ हाथ अब भी कानपुर के रेलबाजार पुलिस स्टेशन में पड़ा है. डॉक्टरों की गलती से कटे इस हाथ को मेडिकल कॉलेज में हिस्टोपैथोलॉजी टेस्ट के लिए भेजा जाना था. लेकिन कथित तौर पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल की कमी होने की वजह से यह अंग अभी भी पुलिस स्टेशन के माल खाने में रखा हुआ है.

पीड़ित जवान की मां का नाम निर्मला देवी है. उन्हें कुछ दिन पहले स्वास्थ्य कारणों की वजह से एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जांच करने वाले अधिकारियों ने महिला के कटे हुए हाथ को 20 मई 2026 को सील किया था. इसके बाद हाथ को गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (GSVM) में भेजा जाना था, जहां इसका हिस्टोपैथोलॉजी टेस्ट कराना था. हालांकि हाथ को वहां पहुंचाया ही नहीं गया.

मामले पर रेलबाजार पुलिस स्टेशन के SHO अमन सिंह का बयान आया है. उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की ओर से कोई लिखित निर्देश नहीं मिला है. इसलिए पुलिस कटे हुए अंग को थाने से नहीं हटा सकती. SHO ने बताया कि अभी तक इस तरह का कोई भी निर्देश नहीं मिला है, जिससे कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए.

डिप्टी पुलिस कमिश्नर (ईस्ट) सत्यजीत गुप्ता ने भी पुष्टि की है कि पीड़ित जवान की मां का हाथ अभी भी थाने में है. उन्होंने बताया कि कानपुर CMO को लेटर लिखा गया है. उनसे स्पष्ट रूप से कटे हुए अंग को लेकर निर्देश मांगे गए हैं कि इसकी किस तरह देखभाल करनी है, जिसे बिना किसी डॉक्यूमेंटशन के ही थाने में भेज दिया गया था.

मामला बढ़ने पर CMO डॉ. हरिदत्त नेमी ने भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि 23 मई को उनकी रिपोर्ट आ गई थी. इसके बाद पुलिस को कटा हुआ अंग मेडिकल कॉलेज भेजना चाहिए था. डॉक्टर के मुताबिक उन्होंने कटे हुए अंग में कुछ केमिकल्स डलवाए थे, जिससे उसे खराब होने से बचाया जा सके.

साफ है कि पुलिस और मेडिकल प्रशासन में तालमेल नहीं है. इसी कारण महिला का हाथ थाने में पड़ा है. जबकि मामला जिस निजी अस्पताल से जुड़ा है उसने पुलिस की शुरुआती जांच में अपनी गलती को मान लिया था. आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से महिला का हाथ काटना पड़ा. उनके बेटे और ITBP जवान विकास सिंह एक बक्से में मां का हाथ लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे.

विवाद तब पैदा हुआ जब पुलिस ने कथित तौर पर विकास की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया. इसके बाद ITBP के कई जवानों ने थाने का घेराव कर लिया था. सबने महिला को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया तब तक जाकर उसने संज्ञान लिया.

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