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लंदन तक फर्जी डिग्रियां बेच रहा था कानपुर का ये गिरोह, ₹10000 में खरीदकर सैकड़ों की नौकरी लगी

कानपुर से फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले एक ऐसे रैकट का खुलासा हुआ जो भारत से लेकर लंदन तक इसकी सप्लाई कर रहा था. इस रैकेट के पास से देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद हुई हैं. ये रैकेट फिशिंग के जरिए फर्जी वेरिफिकेशन भी कर देता था.

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आनंद कुमार
| सिमर चावला
10 जून 2026 (पब्लिश्ड: 10:53 PM IST)
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कानपुर से फर्जी डिग्री बनाने वाला रैकेट का खुलासा हुआ है. (इंडिया टुडे)
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कानपुर से फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले एक रैकेट का खुलासा हुआ है. यह रैकेट हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्री बनाने में माहिर था. और भारत से लेकर सऊदी अरब, कनाडा और ब्रिटेन तक इसकी सप्लाई कर रहा था. पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

आरोपियों ने किया करोड़ों का ट्रांजैक्शन

कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की बेकनगंज थाने की पुलिस, एसआईटी और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने फर्जी डिग्री बनाने वाले रैकेट को रंगे हाथों पकड़ा. इस रैकेट का मास्टरमाइंड जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ है. बाकी तीन साथियों के नाम आमिर अहमद, नूरुद्दीन और हसन आसिफ है. जियाउल अपने तीन साथियों के साथ पिछले 13 सालों से एडवांस्ड तकनीक की मदद से नामी विश्वविद्यालयों की हूबहू नकली डिग्री तैयार करते थे. वे भारत से लेकर सऊदी अरब, कनाडा और ब्रिटेन तक इनकी सप्लाई कर रहे थे. पुलिस ने उनके पूरे सेटअप को सीज कर दिया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों से करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजैक्शन और हजारों जाली दस्तावेज मिले हैं.

लंदन भागने की तैयारी में था मास्टरमाइंड

पुलिस और SIT की जांच में पता चला कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड जियाउल हसन ग्राफिक्स डिजाइनिंग का एक्सपर्ट है. वह लंदन के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके पूरे नेटवर्क को भारत और विदेशों में ऑपरेट कर रहा था. आरोपी ब्रिटेन में स्थायी तौर पर बसने का पूरा इंतजाम कर चुका था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

फिशिंग के जरिए करते थे वेरिफिकेशन

ये सिंडिकेट केवल फर्जी डिग्री बनाने का काम नहीं करता था. ये फर्जी तरीके से सर्टिफिकेट वेरीफिकेशन भी करते थे. जब किसी कंपनी से डिग्री के बैकग्राउंड कंफर्मेशन के लिए कॉल आता था, तो ये लोग फिशिंग के जरिए खुद से कॉल अटेंड करके फर्जी वेरिफिकेशन भी कर देते थे. बताया गया कि एक नकली डिग्री के लिए ये रैकेट 10 हजार रुपये वसूलता था.

देश की बड़ी यूनिवर्सिटीज की मार्कशीट बरामद

पुलिस ने इस रैकेट के पास से छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJM) कानपुर, उस्मानिया विश्वविद्यालय, कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, लिंगाया विद्यापीठ, डॉ. डी. वाई पाटिल विद्यापीठ, अलगप्पा विश्वविद्यालय और आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थानों की 62 फर्जी मार्कशीट और 800 से ज्यादा फर्जी डिग्रियां बरामद कीं. इनमें सिर्फ नाम भरना बाकी था. इसके साथ ही प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन, ट्रांसक्रिप्ट और PhD से जुड़े कई डॉक्यूमेंट भी मिले हैं.

मैकबुक, प्रिंटर और जाली मोहरें भी मिलीं

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक एप्पल मैकबुक प्रो, एक एचपी लैपटॉप, सैमसंग डेस्कटॉप, कैनन कलर प्रिंटर, तीन हार्ड डिस्क और वाई-फाई राउटर सीज किया है. इसके अलावा अलग-अलग विश्वविद्यालयों की 141 जाली मोहरें, 80 स्ट्रिप 3डी मोनोग्राम, 830 ब्लैंक पेपर, 24 डाई और बड़ी संख्या में होलोग्राम भी बरामद किए गए हैं.

डिग्री खरीदने वालों की तलाश में जुटी एजेंसियां 

आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उनके द्वारा बनाई गई फर्जी डिग्रियों के सहारे बड़ी संख्या में लोग देश और विदेश में नौकरी कर रहे हैं. फिलहाल पुलिस इन आरोपियों की मदद से उन सभी खरीददारों का पता करने की कोशिश में जुटी है, जिन्होंने इनसे डिग्रियां खरीदीं.

वीडियो: यूपी में फर्जी दस्तावेजों से चला करोड़ों का लोन रैकेट, 100 करोड़ रुपये का घोटाला बेनकाब

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