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कानपुर में सरकारी क्लर्क एक साल में दो बार टाइपिंग टेस्ट में फेल, डीएम ने बाबू से चपरासी बना दिया

Kanpur DM demotes 3 Clerk to peons: कानपुर में तीन जूनियर क्लर्क का डिमोशन कर उन्हें चपरासी बना दिया गया है. वजह थी 1 मिनट में 25 शब्द ना लिख पाना. डीएम ने ये फैसला सुनाया है. तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी.

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8 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 06:40 PM IST)
kanpur DM demotes 3 Clerk to peons
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि तीनों कर्मचारियों का दो बार टेस्ट हुआ था. (फोटो-इंडिया टुडे)
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कानपुर में तीन जूनियर क्लर्क का डिमोशन कर चपरासी बना दिया गया. वजह थी 1 मिनट में 25 शब्द ना लिख पाना. सरकारी नियमों के मुताबिक, जूनियर क्लर्क के पद पर तैनात व्यक्ति को 1 मिनट में 25 शब्द टाइप करना आना चाहिए. तीनों ही कर्मचारी इसके टेस्ट में फेल हो गए. जबकि उन्हें टेस्ट में पास होने के लिए दो बार मौका दिया गया था.

इन जूनियर क्लर्क के नाम प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव हैं. इनकी नियुक्ति 2023 में मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी. यानी परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उन्हें नौकरी दी गई थी. नियमों के मुताबिक, उन्हें एक साल के अंदर टाइपिंग एग्जाम पास करना जरूरी था.

इंडिया टुडे से जुड़े सिमर चावला की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव का टेस्ट हुआ था. मगर वे इसमें पास नहीं हो पाए. प्रशासन ने उनका सैलरी इंक्रीमेंट रोककर टेस्ट पास करने के लिए एक अन्य मौका दिया.

साल 2025 में तीनों का फिर टाइपिंग टेस्ट हुआ, जिसमें भी वे फेल हो गए. लगातार दूसरी बार फेल होने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप ने तीनों कर्मचारियों को डीएम कैंप कार्यालय में जूनियर क्लर्क के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी में भेज दिया.

कानपुर के अपर जिला मजिस्ट्रेट डा. राजेश कुमार ने बताया, 

“2023 में तीन कर्मचारियों की मृतक आश्रित कोटे से कनिष्ठ लिपिक पद पर नियुक्ति हुई थी. इनके नाम प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव हैं. लिपिक पद पर आने के बाद उन्हें एक साल के अंदर टाइपिंग टेस्ट देना होता है. अगर उसे पास नहीं करते हैं, तो उन्हें एक और मौका दिया जाता है. अगर उसमें भी पास नहीं होते है, तो उन्हें चतुर्थ श्रेणी में तैनात किया जाता है.”

अधिकारी ने आगे बताया कि तीनों का दो बार टेस्ट हुआ था. लेकिन वे तय स्पीड नहीं पकड़ पाए. इसके बाद जिलाधिकारी के आदेश के बाद तीनों की चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति की गई है. उनके मुताबिक प्रेमनाथ यादव और अमित यादव ने लिखित में भी दिया था कि वे चतुर्थ श्रेणी में ही काम करना चाहते हैं.

बता दें कि क्लर्क, स्टेनोग्राफर और पीए जैसे पोस्ट में टाइपिंग टेस्ट होते हैं. ताकि ये पक्का हो सके कि उम्मीदवार दस्तावेजों को कंप्यूटर पर तेजी से टाइप कर सकते हैं. लेकिन दो बार मौका मिलने के बाद भी जब इन कर्मचारियों की स्पीड में कोई सुधार नहीं हुआ तो तीनों का डिमोशन कर दिया गया.

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