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कानपुर में करोड़ों रुपये से बने अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं, लोग बोले- 'बगल में BJP दफ्तर बनकर चालू है'

Kanpur में 45 करोड़ की लागत से बना 100 बेड का एक अस्पताल लगभग एक साल से शुरू होने की राह देख रहा है. अस्पताल की बिल्डिंग पूरी तरह से तैयार होने के बावजूद अब तक न स्टाफ की भर्ती हो पाई है न ही डॉक्टरों की. स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक अस्पताल में इलाज शुरू हो पाएगा?

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आनंद कुमार
| सिमर चावला
17 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 17 फ़रवरी 2026, 08:51 PM IST)
Kanpur 100 bed hospital cost 45 crore brajesh pathak
कानपुर में अस्पताल की इमारत तैयार है लेकिन अब तक इलाज शुरू नहीं हो पाया. (इंडिया टुडे)
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'यहां तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियां, मुझे मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा'. लालफीताशाही के जंजाल पर व्यंग्य करता दुष्यंत कुमार का ये शेर कानपुर के एक अस्पताल की सूरत-ए-हाल पर बिल्कुल मुफीद बैठता है. 45 करोड़ की लागत से बना 100 बेड का ये अस्पताल पूरी तरह से तैयार होकर लगभग एक साल से उद्घाटन की बाट जोह रहा है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी कानपुर के नौबस्ता इलाके में स्थित इस सरकारी अस्पताल के शुरू होने से लगभग 20 लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिलने का अनुमान है. बताया जाता है कि अस्पताल की बिल्डिंग तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, जिसमें इंटेंसिव केयर यूनिट, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी सर्विसेज और OPD डिपार्टमेंट शामिल है. लेकिन फिर भी अस्पताल के एंट्री गेट पर ताला लटका हुआ है. अब तक डॉक्टर, नर्स या सपोर्ट स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है.

अस्पताल शुरू होने के सवाल पर अधिकारी प्रशासनिक अड़चनों का हवाला दे रहे हैं. यानी 20 लाख लोगों से जुड़ा स्वास्थ्य का मसला फाइलों में धूल फांक रहा है. चीफ मेडिकल ऑफिसर हरिदत्त नेमी ने इंडिया टुडे को बताया, 

कर्मचारियों की मंजूरी और प्रक्रिया से जुड़ी औपचारिकताओं में हो रही देरी के चलते प्रोजेक्ट रुका हुआ है. विभागों के बीच फाइलें लगातार इधर-उधर भेजी जा रही हैं. फाइलों के हैंडओवर प्रोसेस में काफी समय लग रहा है.

सरकारी फाइलों की सुस्ती की कीमत दक्षिणी कानपुर के निवासियों को चुकानी पड़ रही है. स्थानीय निवासी आकाश ने बताया कि ट्रैफिक जाम के चलते दूर के अस्पताल ले जाते समय उनके पिता की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. उन्होंने बताया, 

अगर नौबस्ता अस्पताल चालू होता तो हम कुछ ही मिनटों में अस्पताल पहुंच सकते थे.

दक्षिणी कानपुर की आबादी 20 लाख के आसपास है. लेकिन इस इलाके में कोई बड़ा अस्पताल नहीं है. मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. आपातकालीन स्थितियों में समय बर्बाद होने की कीमत कई बार मरीज की जान से चुकानी पड़ती है. स्थानीय निवासियों ने बताया कि जिस वक्त अस्पताल की नींव रखी गई थी, उसी वक्त ठीक बगल में बीजेपी दफ्तर की नींव भी डाली गई थी. आज बीजेपी दफ्तर पूरी तरह से चालू है. मंत्री, सांसद और विधायकों की आमद से गुलजार है. लेकिन चंद कदमों की दूरी पर बना अस्पताल अब भी फीता काटे जाने के इंतजार में है.

बीजेपी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के पास स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी है. उन्होंने देरी को लेकर रिपोर्ट तलब की है. लेकिन फिर भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. उद्घाटन की तारीख मार्च 2025 निर्धारित की गई थी. लेकिन अब तो साल भी बदल चुका है. अस्पताल के उद्घाटन में हो रही देरी के चलते स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे चुका है. वे प्रशासन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और बिना किसी देरी के अस्पताल को चालू कराने का आग्रह कर रहे हैं. 

वीडियो: घुटने में चोट लगी, अस्पताल ने हजारों डॉलर का बिल थमा दिया

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