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पूर्व IAS प्रदीप शर्मा को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल, मोदी सरकार के खिलाफ लगाए थे आरोप

Ex-IAS Officer Pradeep Sharma का नाम साल 2004 में गुजरात के Kachchh जिले में हुए एक विवादित भूमि आवंटन के मामले में सामने आया था. उस समय वह कच्छ के कलेक्टर थे. जांच में पता चला कि जमीन आवंटन के बदले Welspun Group ने प्रदीप शर्मा को व्यक्तिगत फायदा पहुंचाया है.

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21 जनवरी 2025 (अपडेटेड: 21 जनवरी 2025, 12:03 PM IST)
Ex-IAS Officer Pradeep Sharma
भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व IAS ऑफिसर प्रदीप शर्मा को जेल (तस्वीर: इंडिया टुडे)
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गुजरात के पूर्व IAS अधिकारी प्रदीप शर्मा को कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में दोषी करार देते हुए 5 साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है. आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर रहते हुए वेलस्पन ग्रुप (Welspun Group) नाम की कंपनी को बाजार मूल्य से कम दाम पर जमीन आवंटित की थी. इसके बदले प्रदीप शर्मा की पत्नी को वेलस्पन ग्रुप की सहायक कंपनी में साझेदारी मिली थी. प्रदीप शर्मा पहले से ही अन्य भ्रष्टाचार मामले में जेल में हैं. उन्होंने साल 2014 में गुजरात की मोदी सरकार के खिलाफ भी मोर्चा खोला था. 

क्या है साल 2004 का भूमि आवंटन विवाद?

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2004 में प्रदीप शर्मा कच्छ जिले के कलेक्टर थे. इस दौरान उनपर आरोप लगे कि उन्होंने कलेक्टर रहते हुए “वेलस्पन ग्रुप” नाम की कंपनी को बाजार मूल्य से 25% कम दर पर भूमि आवंटित की थी. आरोपों के मुताबिक इस आवंटन से सरकार को 1.2 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा.

इसके बदले वेलस्पन ग्रुप ने कथित रूप से अपनी एक सहायक कंपनी 'वैल्यू पैकेजिंग' में प्रदीप शर्मा की पत्नी को 30% की साझेदारी दे दी. इसके जरिए उन्हें करीब 29.5 लाख रुपये का लाभ मिला.

30 सितंबर 2014 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने प्रदीप शर्मा को 29 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया. इसके अलावा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के और भी कई मामले दर्ज हुए. इसी के चलते सेशन कोर्ट में तीन अलग-अलग मामलों की संयुक्त सुनवाई हुई. इनमें से एक मामला वेलस्पन ग्रुप को जमीन आवंटन करने से भी जुड़ा था. 

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सोमवार, 20 जनवरी के दिन प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज KM सोजीत्रा ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने प्रदीप शर्मा को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2) (लोक सेवक द्वारा आपराधिक भ्रष्टाचार) और धारा 11 (लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करना) में दोषी पाया.

धारा 13(2)के तहत उन्हें पांच साल की जेल और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया वहीं धारा 11 के तहत उन्हें तीन साल की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई. ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी.

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यह पहली बार नहीं है कि प्रदीप शर्मा को भ्रष्टाचार के मामले में सजा हुई हो. वह पहले से ही एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में भुज की जेल में बंद हैं. प्रदीप शर्मा केवल भ्रष्टाचार के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीतिक विवादों के लिए भी चर्चा में रहे. साल 2014 में उन्होंने तब की गुजरात सरकार के खिलाफ आरोप लगाए थे. 

प्रदीप शर्मा के राजनीतिक विवाद

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदीप शर्मा ने एक महिला आर्किटेक्ट की कथित जासूसी की CBI जांच की मांग की थी. यह मामला तब सामने आया था जब दो न्यूज पोर्टल्स ने कुछ टेलीफोनिक बातचीत की सीडी जारी की. इस सीडी में कथित तौरपर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (उस समय के गुजरात के गृह राज्य मंत्री) और दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच की बातचीत होने का दावा किया गया था.

साथ ही अगस्त और सितंबर 2009 के बीच कथित तौर पर हुई बातचीत में एक 'साहेब' का जिक्र था, जिसे उस समय के सीएम गुजरात नरेंद्र मोदी से जोड़ा गया. हालांकि, अमित शाह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था. 

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