जस्टिस उज्जल भुइयां की बेटी की मुस्लिम दोस्त को नहीं मिला कमरा, नाम सुनते ही ओनर ने 'हाथ जोड़ लिए'
Hyderabad में तेलंगाना जजेज एसोसिएशन और तेलंगाना स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी द्वारा आयोजित एक सेमिनार में बोलते हुए Justice Ujjal Bhuyan ने भारतीय समाज में मौजूद सामाजिक भेदभाव की बात की. उन्होंने उदाहरणों से समझाया कि कई बार सामाजिक रीति रिवाज संवैधानिक मूल्यों पर भारी पड़ जाते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा है कि सामाजिक रीति-रिवाज अक्सर संवैधानिक मूल्यों से अलग होते हैं. एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने ये बात कही है. जस्टिस भुइयां ने बताया कि हाल ही में उनकी बेटी की मुस्लिम दोस्त को उनके धर्म की वजह से दिल्ली में किराए पर घर नहीं मिला.
जस्टिस भुइयां हैदराबाद में तेलंगाना जजेज एसोसिएशन और तेलंगाना स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी द्वारा आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 'संवैधानिक नैतिकता और जिला न्यायपालिका की भूमिका' विषय पर बोलते हुए उन्होंने इस घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया,
जस्टिस भुइयां ने ओडिशा में मिड-डे मील स्कीम से जुड़ी एक और घटना का जिक्र किया. उन्होंने कहा,
संवैधानिक नैतिकता का अर्थ समझाते हुए जस्टिस भुइयां ने बताया कि यह वह स्टैंडर्ड सेट करता है जिसको फॉलो करने की उम्मीद सार्वजनिक संस्थानों और नागरिकों दोनों से की जाती है.
सुप्रीम कोर्ट के जज ने साथी जजों से आग्रह किया कि वे मुद्दों का मूल्यांकन प्रचलित सामाजिक राय के बजाय संवैधानिक मूल्यों के आधार पर करें. उन्होंने रोजमर्रा के जीवन में संविधान में निहित समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को अपनाने पर जोर दिया.
वीडियो: मुस्लिम छात्रा का किस्सा बताया, सुप्रीम कोर्ट जस्टिस उज्जल भुयान ने संविधान पर क्या सीख दी?

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