The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Justice G. R. Swaminathan and Justice V. Lakshminarayanan madras high court judge on corruption

कौन हैं वो दो जज जो जजों को 'भ्रष्ट' बताने में जरा नहीं हिचके?

मद्रास हाई कोर्ट में तमिल फिल्म करुप्पु पर बैन लगाने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी. इसी दौरान जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार था और आज भी है.

Advertisement
pic
29 मई 2026 (पब्लिश्ड: 05:33 PM IST)
madras high court corruption holy cow justice
जस्टिस स्वामीनाथन (बाएं) और जस्टिस लक्ष्मीनारायणन (दाएं) ने ज्यूडिशियरी में करप्शन पर बात की है. (Madras High Court)
Quick AI Highlights
Click here to view more

मद्रास हाई कोर्ट में 28 मई को तमिल फिल्म करुप्पु पर बैन लगाने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी. इस दौरान जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने खुले तौर पर कोर्ट में स्वीकार किया कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार था और आज भी है. जजों को 'होली काऊ' मानने की गलती नहीं करनी है.

बेंच ने कहा,

"कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है. पहले भी भ्रष्ट जज थे और आज भी हैं… हम जानते हैं और हमें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिले हैं. मद्रास हाई कोर्ट नियमित रूप से ऐसे भ्रष्ट तत्वों को बाहर का रास्ता दिखाता है."

जजों को भ्रष्ट बताने वाले जज कौन हैं?

जस्टिस आर स्वामीनाथन कौन हैं?

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन तमिलनाडु के तिरुवरूर के रहने वाले हैं. उनका जन्म साल 1968 में हुआ था. साल 1990 में LLB पूरा हुआ. साल 1991 में वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन कराया. जस्टिस स्वामीनाथन अपने परिवार से कानून के पेशे में आने वाले पहले व्यक्ति हैं. उन्होंने चेन्नई में 13 साल तक वकालत की. फिर मदुरै बेंच बनने के बाद वहां शिफ्ट कर गए.

साल 2014 में जस्टिस स्वामीनाथन को मदुरै बेंच में भारत सरकार का असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल बनाया गया. जून 2017 में उनको मद्रास हाई कोर्ट के एडिशनल जस्टिस के तौर पर प्रमोट किया गया. फिर बाद में स्थायी जज बना दिया गया.

जस्टिस स्वामीनाथन अब तक 52,094 फैसले सुना चुके हैं. वे भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में रिसोर्स पर्सन (एक्सपर्ट) के तौर पर भी अपनी सर्विस देते हैं. उनकी पत्नी कामाक्षी एक हाउसवाइफ हैं और विकलांग लोगों के अधिकारों के लिए काम करती हैं. जस्टिस स्वामीनाथन और कामाक्षी के दो बच्चे हैं. एक बेटा और एक बेटी. उनका बेटे विकलांग हैं. वहीं बेटी साधना लॉ की स्टूडेंट हैं. 

ये भी पढ़ें: 'पहले भी भ्रष्ट जज थे आज भी हैं, उन्हें पवित्र गाय न समझें', मद्रास HC ने सिस्टम हिला दिया

जस्टिस स्वामीनाथन वही जज हैं जिन्होंने मदुरै के तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित दरगाह के पास एक खंभे पर हिंदुओं को 'कार्तिगई दीपम' (दीपक) जलाने की अनुमति दी थी. उनके इस फैसले के खिलाफ विपक्षी पार्टियों, (जैसे डीएमके, कांग्रेस) के 100 से ज्यादा सांसदों ने उनको पद से हटाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को एक नोटिस सौंपा था. लेकिन ये प्रस्ताव पास नहीं हुआ.

मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस स्वामीनाथन का कार्यकाल 31 मई, 2030 तक का है.

जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन कौन हैं?

जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन को फरवरी 2023 में मद्रास हाई कोर्ट में एडिशनल जस्टिस के तौर पर नियुक्त किया गया था. उनका जन्म 4 अक्टूबर, 1970 में हुआ. उन्होंने बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल से लॉ की डिग्री हासिल की है. साल 1995 में जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने बतौर वकील तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया.

उन्होंने संवैधानिक कानून, सिविल और क्रिमिनल लॉ, ट्रस्ट कानून और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट से जुड़े विषयों में वकालत की. मद्रास हाई कोर्ट के अलावा उन्होंने कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे, दिल्ली और कर्नाटक हाई कोर्ट में भी मामलों की पैरवी की है.

जस्टिस लक्ष्मीनारायणन एकेडमिक्स से भी जुड़े रहे हैं. साल 2010 से वे मद्रास लॉ जर्नल और मद्रास लॉ जर्नल (क्रिमिनल) के डिप्टी एडिटर इन चीफ हैं. इसके साथ ही तमिलनाडु स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी में रिसोर्स पर्सन की भूमिका में हैं. जस्टिस लक्ष्मीनारायणन को साल 2018 और साल 2021 में राज्यपाल द्वारा तमिलनाडु के डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी में सीनेट मेंबर के तौर पर नॉमिनेट किया गया था. 

वीडियो: NCERT की नई किताब में न्यायपालिका पर ऐसा क्या लिखा कि भड़के CJI सूर्यकांत?

Advertisement

Advertisement

()