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JNU में भयंकर बवाल, UGC नियमों पर पुलिस-छात्रों के बीच झड़प, JNUSU अध्यक्ष समेत 14 गिरफ्तार

JNU Protest: JNUSU ने 26 तारिख को सैंकड़ों की तादाद में मार्च निकालने का ऐलान किया था. लेकिन जुलूस से पहले कैंपस के मेन गेट पर भारी मात्रा में पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई. जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़प हुई.

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jnu student protest
JNU में छात्र प्रदर्शन.
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शुभम कुमार
27 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 02:23 PM IST)
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कल यानी 26 फरवरी की दोपहर पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़प हुई. पुलिस ने आरोप लगाया कि छात्रों ने उनके ऊपर लाठियों और पत्थरों से हमला किया. वहीं छात्रों ने पुलिस पर बदलसलूकी के आरोप लगाए. इस हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने 14 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया. 

दरअसल, JNUSU (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संगठन) ने 26 तारीख को सैकड़ों की तादाद में मार्च निकालने का ऐलान किया था. इसे ‘लॉन्ग मार्च’ का नाम दिया गया था. छात्र मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन तक जुलूस निकालने वाले थे. इस जुलूस के ज़रिए छात्र अपनी मांग रखना चाहते थे. इनमें छात्रों के हालिया निष्कासन का विरोध, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लागू करवाना और रोहित अधिनियम का समर्थन शामिल था. 

लेकिन जुलूस से पहले कैंपस के मेन गेट पर भारी मात्रा में पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई. तीन लेवल में बैरिकेड लगाकर छात्रों को रोका गया. इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वायरल वीडियो में सैकड़ों की तादाद में छात्र विरोध करते नज़र आए. वहीं बैरिकेड लगाकर गेट के बाहर भारी मात्रा में रैपिड एक्शन फ़ोर्स और दिल्ली पुलिस तैनात है. 

पुलिस ने क्या बताया?

साउथ वेस्ट दिल्ली के DCP अमित गोयल ने अपने बयान में कहा, 

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DCP ने बताया कि हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इनमें ACP वसंत कुंज, SHO सरोज नगर, SHO किशनगढ़ समेत कुल 25-30 स्टाफ शामिल हैं. 

छात्रों की क्या मांगे हैं?   

दिल्ली पुलिस ने जिन 14 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है उनमें JNUSU के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका बाबू और संयुक्त सचिव दानिश अली शामिल हैं. छात्रों का दावा है कि पुलिस ने बल का प्रयोग किया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़, कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया. डिटेन होने के बाद छात्र संगठन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. 

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विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने भी इस आरोप का समर्थन किया और हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की. JNUSU ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान बाबा साहेब आंबेडकर की तस्वीर को नुकसान पहुंचाया गया. 

किस बात पर विवाद हुआ?

बीते कुछ दिनों से यूनिवर्सिटी की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग उठ रही है. इस्तीफा मांगने वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) का आरोप है कि एक इंटरव्यू के दौरान कुलपति ने जातिवादी बयान दिए. 

कुलपति शांतिश्री ने दलितों और ब्लैक समुदाय के लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा, "आप हमेशा विक्टिम बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर तरक्की नहीं कर सकते." इसके अलावा उन्होंने UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन की भी आलोचना की और इसे ‘पूरी तरह से गैर-जरूरी’ बताया. उनके इसी बयान के बाद छात्रों में आक्रोश फैला हुआ है. 

संस्थान का क्या रुख है? 

JNU ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 

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पोस्ट में आगे बताया गया कि वाइस चांसलर खुद एक रिजर्वेशन कैटेगोरी से आती हैं. उनपर झूठे आरोप लगाकर मुख्य मुद्दे से भटकाने की कोशिश की जा रही है. 

वीडियो: JNU में आंबेडकर की फोटो पर बवाल, छात्रों ने विरोध प्रदर्शन की वजह बताई

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