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25 दिसंबर को क्रिसमस मनाने वाले जावेद अख्तर की ये बात सुनकर बुरा ना मान जाएं!

ईश्वर के अस्तित्व वाली बहस के दौरान जावेद अख्तर ने क्रिसमस को लेकर एक दिलचस्प किस्सा सुनाया. उनका दावा है कि ये त्योहार पहले पेगन फेस्टिवल के नाम से जाना जाता था, जिस पर रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन के समय ईसाईयों ने कब्जा कर लिया.

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javed akhtar on chrismas
जावेद अख्तर ने क्रिसमस मनाए जाने की कहानी बताई (india today)
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राघवेंद्र शुक्ला
21 दिसंबर 2025 (अपडेटेड: 21 दिसंबर 2025, 10:07 PM IST)
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दुनिया में जितने भी धर्म हैं, सबके अपने त्योहार हैं. हिंदू होली-दिवाली मनाते हैं. क्रिश्चियन्स के क्रिसमस पर पूरी दुनिया जश्न मनाती है. ईद पर भी दुनिया भर में रौनक रहती है. ये उस समाज के उत्सव हैं, जहां भगवान या खुदा की अवधारणा (Concept) है. हर त्योहार से किसी धार्मिक चरित्र (भगवान या पैगंबर) की कहानी जुड़ी है, जो त्योहारों की नींव रखती है. यानी त्योहार धार्मिक संस्कृति से गहरे जुड़े होते हैं. अब सवाल उठता है कि उन लोगों के समाज में ऐसे उत्सवों या त्योहारों के क्या विकल्प हैं, जो किसी भगवान को नहीं मानते. खुद को नास्तिक कहने वाले जावेद अख्तर के सामने भी यही सवाल दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'Does God Exist' बहस के दौरान सामने आया. 'दी लल्लनटॉप' के दीपक तैनगुरिया ने जावेद अख्तर से सवाल किया,

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इसका जवाब देने से पहले जावेद अख्तर ने क्रिसमस को लेकर एक दिलचस्प कहानी बताई. उन्होंने दावा किया कि ये इतिहास है और इतिहासकारों से पूछा भी कि वो बताएं कि ये सच है या नहीं? इस कहानी के जरिए जावेद अख्तर ने दावा किया कि त्योहार धर्मों के नहीं होते. त्योहार मौसम के, फसलों के और किसानों के होते थे. कई त्योहारों पर धार्मिक लोगों ने ‘कब्जा’ कर लिया. इस संदर्भ में उन्होंने क्रिसमस और जीसस क्राइस्ट की जन्मतिथि को लेकर एकदम अलग तरह की कहानी सुनाई. उन्होंने कहा, 

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जावेद अख्तर ने आगे कहा कि ये जो सारे फेस्टिवल हैं, ये रिलीजन नहीं थे. ये सेकुलर त्योहार थे जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया. ये त्योहार मौसम के थे. फसलों के थे. किसानों के थे. उसको आपने लेकर रिलीजियस रंग दे दिया. ये कोई रिलीजन से थोड़ी आए हैं. नास्तिकों के त्योहार पर जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने कहा,

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बता दें कि 'दी लल्लनटॉप' के सभी चैनलों पर गीतकार जावेद अख्तर और मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच क्या ईश्वर का अस्तित्व है विषय पर 20 दिसंबर 2025 को लाइव बहस हुई थी. इसके सूत्रधार दी लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी थे. पूरी बहस आप यहां देख सकते हैंः

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