जापान इस सीजन भारत से आम नहीं खरीदेगा, वजह भी बता दी
Japan ने भारत से आने वाले ताजे आमों के इंपोर्ट पर रोक लगा दी है. इस रोक की वजह से केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनापल्ली जैसे मशहूर आम अब जापान नहीं जा पाएंगे. क्यों लिया जापान सरकार ने यह फैसला?

जापान के बाजारों में इस सीजन भारतीय आमों की मिठास नहीं पहुंचेगी. जापान सरकार ने भारत से आने वाले ताजे आमों के इंपोर्ट पर रोक लगा दी है. इस रोक की वजह से केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनापल्ली जैसे मशहूर आम अब जापान नहीं जा पाएंगे. अप्रैल से जून का महीना आमों के एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा समय होता है, लेकिन जापान सरकार के फैसले के बाद आमों की सभी खेप (शिपमेंट्स) बीच में ही रुक गई हैं.
क्यों लिया जापान ने यह फैसला?इकनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च में जापानी अधिकारियों ने भारत के आम ट्रीटमेंट सेंटर्स की जांच की थी. इस जांच में कीड़ों और बीमारियों को मारने वाली दवाओं के छिड़काव (फ्यूमिगेशन) के तरीकों में कमियां पाई गईं. सुरक्षा और शुद्धता के नियमों को पूरा न करने की वजह से जापान ने यह कड़ा कदम उठाया है. यह जानकारी तीन निर्यातकों और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में शामिल एक भारतीय कृषि-वैज्ञानिक ने नाम न छापने की शर्त पर दी. भारत सरकार ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है.
योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन (जापान की एक बिजनेस संस्था) ने 31 मार्च को एक नोटिस जारी किया. इस नोटिस में कहा गया कि 25 मार्च 2026 या उसके बाद भारत से रवाना हुए आमों के शिपमेंट जापान में स्वीकार नहीं किए जाएंगे. भारत से आमों का आना तब तक पूरी तरह बंद रहेगा, जब तक जापान की सरकार भारतीय सेंटर्स के सुधारों से संतुष्ट नहीं हो जाती. जापानी भाषा में जारी इस बयान में आगे कहा गया कि भारत को अपने आमों को साफ करने और जांचने के तरीकों को बेहतर बनाना होगा.
निर्यातकों ने क्या बताया?साल 2025-26 में भारत से जापान को होने वाले आम निर्यात में गुजरात की 'केसर' किस्म का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा. इस दौरान देश को कुल 1.54 मिलियन डॉलर (14.74 करोड़ भारतीय रुपये) मूल्य के आमों का निर्यात किया गया, जिसमें करीब दो करोड़ रुपये की खेपें केसर किस्म की थीं. गुजरात के एक आम निर्यातक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा,
हां, हमें कुछ डॉलर का नुकसान हो रहा है क्योंकि जापान हमारे आम नहीं खरीद रहा है, लेकिन हमारी सबसे बड़ी चिंता अमेरिका तक हवाई माल ढुलाई की लागत में हुई भारी बढ़ोतरी है. पिछले साल के 250-350 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में यह बढ़कर 580-590 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. इसकी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है.
पुणे के एक एक्सपोर्टर ने कहा,
"मुझे भारतीय आमों पर जापान द्वारा लगाई गई पाबंदियों के पीछे के सही वजह नहीं पता है. हालांकि, हम इस साल जापान को आम एक्सपोर्ट नहीं कर रहे हैं."
जापान भारतीय आमों के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल नहीं है. साल 2025-26 में भारत ने ताजे आम, आम का गूदा (पल्प) और डिब्बाबंद आम के प्रोडक्ट्स बेचकर सबसे ज्यादा कमाई अमेरिका, UAE, UK, नीदरलैंड और सऊदी अरब से की.
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