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'ईरान के बाद निशाना तुर्की... ' , दुनिया के बड़े जानकार ने इजरायल-अमेरिका हमले की परतें खोल दीं

US-Israel vs Iran: जाने-माने जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट सुरेंद्र सिंह लाली ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई की वजह वो नहीं है, जो बताई जा रही है. उन्होंने इजरायल और Benjamin Netanyahu को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले दावे किए हैं.

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दिल्ली में एक ईरानी सिख ने ईरान पर हमले पर अपनी प्रतिक्रिया दी. (PTI)
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मौ. जिशान
3 मार्च 2026 (अपडेटेड: 3 मार्च 2026, 01:24 PM IST)
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ईरानी सिख और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट सुरेंद्र सिंह लाली ने मीडिया से बातचीत के दौरान ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले को लेकर कुछ ऐसा बयान दिया, जो वेस्ट एशिया के जियोपॉलिटिकल समीकरणों को एक नए नजरिए से देखने का मौका देता है. उन्होंने कहा कि यह सैन्य संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय विवाद नहीं है. उन्होंने इसे ग्लोबल पावर्स की रणनीतिक लड़ाई बताया. उन्होंने तुर्की को लेकर भी ईरान जैसी आशंका जताई है.

रविवार, 1 मार्च को सुरेंद्र सिंह लाली ने दिल्ली में मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एनर्जी और वैश्विक सत्ता संघर्ष का हिस्सा है. उनका कहना है, "यह जितना दिखता है, उतना आसान नहीं है. इजरायल और अमेरिका की रणनीति एक बड़े जियोपॉलिटिकल खेल का हिस्सा है."

सुरेंद्र सिंह लाली ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यहूदी लॉबी 'अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी' (AIPAC) का जिक्र करते हुए कहा,

"मुझे एक बात बताओ. ईरान से अमेरिका करीब 10,000 मील दूर है. तो ईरान (अमेरिका का) क्या कर सकता है? ये बेंजामिन नेतन्याहू और यहूदी लॉबी AIPAC है, जो अमेरिकन कांग्रेस और अमेरिकी नेताओं को पैसा देती है. मार्जोरी टेलर ग्रीन (अमेरिकी राजनेता) ने रिकॉर्ड पर कहा था कि अमेरिका में ऐसा कोई सांसद नहीं है, जिसे AIPAC से पैसा ना मिला हो. तो नंबर एक, यह बेंजामिन नेतन्याहू हैं अपने ग्रेटर इजरायल के एजेंडे के साथ. आप देखें कि इराक और दूसरे देशों को कैसे निपटाया गया, और मैं आशा करता हूं कि तुर्की उनका अगला निशाना नहीं होगा."

उन्होंने दावा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इजरायल और नेतन्याहू के हितों के लिए हो रही है. इस बीच, उन्होंने चीन और अमेरिका में बढ़ते जियोपॉलिटिकल कंपटीशन की तरफ भी इशारा किया, जिसमें चीन की ऊर्जा जरूरतें एक अहम मुद्दा बन गई हैं. उन्होंने कहा,

"दूसरा पहलू यह है कि ईरान पर हमला अमेरिका और चीन के बीच एक जियोपॉलिटिकल हेजेमोनिक वॉर का भी हिस्सा है. क्योंकि चीन ने अमेरिका का रेयर अर्थ्स रिसोर्सेज से गला घोंट दिया. दुनिया में सिर्फ दो ताकतें हैं. और अब अमेरिका चीन को चोट पहुंचाना चाहता था, तो उसने जो किया वह यह था कि उसने उन सोर्स पर हमला करना, उन्हें हासिल करना, उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जहां से चीन अपनी एनर्जी खरीदता है."

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सुरेंद्र सिंह लाली ने वेनेजुएला का उदाहरण दिया. बताया कि कैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 'ड्रग' का 'रोना रोकर' वेनेजुएला पर हमला किया और उसके राष्ट्रपति को उठा लिया. उन्होंने आगे कहा कि अब ड्रग का जिक्र कहीं नहीं है, क्योंकि वेनेजुएला में सबसे बड़ा तेल भंडार है और अमेरिका उस पर कब्जा करना चाहता है.

उन्होंने आगे कहा,

"ईरान के पास क्या हैं? तेल के रिजर्व. और ईरान, रूस और चीन, ये तीनों एक हैं. तो आखिर में, यह चीन की एनर्जी की जरूरत को भी रोकने की कोशिश है, क्योंकि अगर आपके पास एनर्जी नहीं है, तो आप एक बड़ी इकॉनमी नहीं बन सकते."

चीन बड़े पैमाने पर ईरान से तेल खरीदता है. अगर ईरानी तेल नहीं मिला, तो चीन को गहरी चोट पहुंचेगी. सुरेंद्र सिंह लाली ने दावा किया कि ईरान के पास विशाल तेल रिजर्व हैं, और यही कारण है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं, ताकि ईरानी तेल पर कब्जा जमाया जा सके.

वीडियो: इजरायल-ईरान युद्ध के बीच स्पेन ने अमेरिका को कैसा झटका दे दिया?

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