ताजमहल का ईरान कनेक्शन क्या है जिसे मार्को रूबियो ने तस्वीर के बहाने फिर 'जिंदा' कर दिया?
हैदराबाद में ईरानी कॉन्सुलेट ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा कि अगर रूबियो को ताजमहल का इतिहास पता होता तो वो वहां फोटो खिंचवाने के लिए पोज नहीं दे रहे होते.

भारत के दौरे पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो अपनी पत्नी के साथ आगरा का ताजमहल देखने गए. दोनों ने उस बेंच पर बैठकर फोटो भी खिंचवाई, जिसके पीछे पूरा ताजमहल और आगे के पानी में उसका रिफ्लेक्शन दिखता है.
ये फोटो सामने आई तो ईरान ने भी इसे देखा. उसने अमेरिकी मंत्री के इस विजिट को वेस्ट एशिया के मौजूदा हालात से ऐसा जोड़ा कि खुद रूबियो भौचक्के रह गए होंगे. हैदराबाद में ईरानी कॉन्सुलेट ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा कि अगर रूबियो को ताजमहल का इतिहास पता होता तो वो वहां फोटो खिंचवाने के लिए पोज नहीं दे रहे होते.
भारत स्थित ईरानी दफ्तर ने और भी बातें कही हैं. वो जानेंगे लेकिन इससे पहले रूबियो के आगरा दौरे के बारे में जान लेते हैं.
मार्को रूबियो, ताजमहल और ईरानमार्को रुबियो, सोमवार 25 मई को नई दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग में भाग लेने के बाद आगरा पहुंचे. उनके साथ उनकी पत्नी जेनेट और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी थे. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक स्पेशल विमान से आगरा वायुसेना स्टेशन पर उतरा और फिर ताजमहल के लिए रवाना हुआ. रूबियो और उनकी पत्नी जेनेट ने ताजमहल के सामने वाली बेंच पर बैठकर फोटो भी खिंचवाई. अक्सर विदेशी मेहमान जब ताजमहल देखने आते हैं तो उनकी ये वाली फोटो जरूरी खींची जाती है.
ताजमहल देखने के बाद मार्को रूबियो ने कहा,
‘यह दुनिया के 7 अजूबों में से एक है. मेरा मानना है कि जिन देशों की आप यात्रा करते हैं, उनकी संस्कृति के प्रति सम्मान दिखाना महत्वपूर्ण है.’

यहां तक तो सब ठीक था. इसके बाद रूबियो की फोटो सोशल मीडिया पर आई. हैदराबाद में ईरान का वाणिज्यिक दूतावास यानी कॉन्सुलेट है. उसने भी ये तस्वीर देखी. इसके बाद उसने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया और अमेरिका पर ईरानी सभ्यता को नुकसान पहुंचाने के लिए कोसा भी. उन्होंने ताजमहल का ईरानी कनेक्शन निकालकर रूबियो को गजब का ताना मार दिया. ईरानी कॉन्सुलेट दफ्तर ने लिखा,
ताजमहल का ईरानी कनेक्शनअगर रूबियो को इतिहास या आर्किटेक्चर की जानकारी होती तो वो यहां (ताजमहल में) फोटो खिंचवाने के लिए पोज नहीं देते. ये स्मारक मुगल सम्राट (शाहजहां) ने अपनी ईरानी पत्नी (मुमताज बेगम) के प्यार में बनवाया था. इसे ईरानी कारीगरों की अद्भुत प्रतिभा से गढ़ा गया था. वहीं, दूसरी ओर आज मार्को रूबियो की अमेरिकी सरकार ईरानी सभ्यता को मिटा देने की धमकी देती है. साथ ही दुनिया के बाकी सभ्यताओं का अपमान भी करती है.
ईरान का ये कहना गलत भी नहीं है कि ताजमहल का ईरानी कनेक्शन है. इतिहास कहता है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज बेगम की याद में आगरा में यमुना के किनारे ताजमहल बनवाया था. ये भी सच है कि मुमताज बेगम पर्सिया के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती थीं. हालांकि, उनका जन्म आगरा में ही हुआ था. अर्जुमंद बानू बेगम उर्फ मुमताज बेगम मुगल दरबार के एक खास सरदार और पर्सिया (आज के ईरान) के रईस अबू अल-हसन आसफ खान की बेटी थीं. इसके अलावा वह मुगल काल की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक नूरजहां की भतीजी थीं.
ताजमहल को बनाने में ईरानी वास्तुकारों का भी हाथ था. बताते हैं कि पत्थर तराशने वाले, जड़ाई करने वाले, नक्काशी करने वाले, चित्रकार, गुंबद बनाने वाले और अन्य कई कारीगरों को मध्य एशिया और ईरान से भी बुलाया गया था
वीडियो: मुंबई के कोच हार्दिक की परफॉरमेंस से नाराज़, क्या बड़ा बदलाव होगा?

