भारत ने चाबहार के लिए पैसा नहीं दिया, ईरान के विदेश मंत्री ने नाखुशी जता दी, बोले- 'पीएम मोदी ने इसे...'
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़ते तनाव के बीच इस साल के केंद्रीय बजट में भारत ने चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया है. साल 2024 में बंदरगाह को विकसित करने के लिए समझौता किए जाने के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है.
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भारत ने इस साल के केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस फैसले पर निराशा जताई है. उन्होंने चाबहार पोर्ट को इंडिया के लिए ‘गोल्डेन गेट’ बताया जो मध्य एशिया और यूरोप से भारत की कनेक्टिविटी को काफी मजबूती दे सकता है.
इंडिया टुडे को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में भारत और ईरान के संयुक्त प्रोजेक्ट के लिए बजट में फंड जारी नहीं करने के सवाल पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा,
“मुझे लगता है कि यह नई दिल्ली और तेहरान दोनों के लिए निराशाजनक है. जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार कहा था, चाबहार एक गोल्डन गेट है. यह हिंद महासागर क्षेत्र को मध्य एशिया, काकेशस (रूस,जॉर्जिया, अजरबैजान और आर्मेनिया) और यूरोप से जोड़ता है. इस बंदरगाह का बड़ा रणनीतिक महत्व है. अगर यह पूरी तरह से विकसित हो जाए तो भारत के लिए ईरान के रास्ते इन जगहों तक पहुंचने का सबसे अच्छा ट्रांजिट रूट बन सकता है.”
उन्होंने आगे उम्मीद जताई कि यह बंदरगाह एक दिन पूरी तरह से विकसित हो जाएगा.
चाबहार बंदरगाह साउथ ईस्ट ईरान के चाबहार में भारत द्वारा विकसित की जा रही एक रणनीतिक परियोजना है. इसका उद्देश्य पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए सीधा ट्रेड और ट्राजिंट रूट बनाना है.
मध्य एशियाई बाजारों तक मजबूत पहुंच के लिहाज से यह परियोजना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस बंदरगाह की मदद से भारत पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला कर सकता है. साथ ही इस पूरे क्षेत्र में भारत की भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी.
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़ते तनाव के बीच इस साल के केंद्रीय बजट में भारत ने चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया है. साल 2024 में बंदरगाह को विकसित करने के लिए समझौता किए जाने के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है. पिछले दो केंद्रीय बजटों में भारत ने ईरान के साउथ सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में चल रहे चाबहार परियोजना के लिए सालाना 100 करोड़ रुपये आवंटित किए थे.
पिछले साल सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी को लेकर छह महीने की छूट दी थी. यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है. पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि भारत चाबहार से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ सक्रिय तौर पर बातचीत कर रहा है.
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