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DIG और इंस्पेक्टर पर 30 लाख रुपये लूटने का आरोप, 4 पुलिसवालों पर डकैती का केस दर्ज

IPS Rajesh Chandel Gwalior court order: कोर्ट ने कहा कि आईपीएस राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह, सब इंस्पेक्टर अजय सिंह और हवलदार संतोष वर्मा के खिलाफ डकैती, लूट और साजिश रचने का मामला दर्ज क‍िया जाए. 22 जून को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया है. जानिए पूरा मामला.

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सुप्रिया
| शुभम कुमार
12 मई 2026 (पब्लिश्ड: 03:59 PM IST)
ips rajesh singh chandel
आईपीएस राजेश सिंह चंदेल को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया है. (फोटो-इंडिया टुडे)
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डकैती का केस, वो भी पुलिसवालों पर? जिस खाकी पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, अब उसी पर 30 लाख रुपए की डकैती का आरोप लगा है. मामला इतना गंभीर है कि ग्वालियर की विशेष सत्र अदालत (Special Sessions Court, Gwalior) के आदेश के बाद एक IPS अफसर समेत चार पुलिसकर्मियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया है. पूरा मामला क्या है, और पुलिस पर डकैती का केस क्यों दर्ज हुआ? आइए समझते हैं. 

11 मई को ग्वालियर की विशेष सत्र अदालत में सुनवाई हुई. कोर्ट ने आदेश दिया कि IPS राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह, सब इंस्पेक्टर अजय सिंह और हवलदार संतोष वर्मा के खिलाफ डकैती, लूट और साजिश रचने का मामला दर्ज क‍िया जाए. कोर्ट ने सभी आरोपियों को 22 जून को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया है. जब ये मामला दर्ज हुआ था तब राजेश चंदेल ग्वालियर के एसपी थे. इस वक़्त वे DIG भोपाल ग्रामीण हैं.

मामला क्या है?

मामला साल 2024 का है. पिछले दो साल से ये केस सुनवाई में था. शिकायतकर्ता अनूप राणा ने कोर्ट में आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उसके परिवार से करीब 30 लाख रुपए की अवैध वसूली की. मामला ग्वालियर जिले के थाटीपुर पुलिस थाने का है. तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा पर थाने के भीतर लाखों रुपये की जबरन वसूली, धमकी, झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने और सबूत मिटाने तक के आरोप लगे थे.

इस मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे पीड़ित पक्ष के वकील अशोक प्रजापति ने कहा कि 420 के एक मामले में ‘समझौता’ कराने के नाम पर पुलिस ने पहले 5 लाख 80 हजार रुपये लिए. फिर थाने बुलाकर करीब 25 लाख रुपये और मंगवा लिए. इसके बाद और रकम न मिलने पर फरियादी को साजिशकर्ता बनाकर जेल भिजवा दिया. और जब इन सबकी शिकायत एसपी से की गई तो कोई कार्रवाई नहीं हुई. उल्टा पुलिस ने अनूप राणा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

2024 में जेल से बाहर आने के बाद अनूप राणा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. पुलिस के कारनामे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. जिसमें लूट-डकैती, साक्ष्य मिटाने और षडयंत्र रचने के आधार पर केस दर्ज किया गया. 

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पुलिस ने क्या बताया?

इस पूरे मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से बचाव में क्या दलील दी गई? अब ये जान लीजिए. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे थे. इस पर पुलिस ने कहा कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं. कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई.

वहीं पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा और उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे. जबकि अनूप राणा का तर्क है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया. परिवार ने दावा किया कि इतनी बड़ी रकम की वसूली बिना तत्कालीन थाना प्रभारी और SP राजेश सिंह चंदेल की जानकारी के संभव नहीं थी.

इसी आधार पर सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश की धारा 120-बी के तहत भी केस दर्ज किया गया है. IPC की धारा 393 - लूट का प्रयास/लूट, धारा 201- सबूतों को मिटाना (CCTV फुटेज का मामला) के तहत मामला दर्ज किया गया है. अब देखना होगा कि 22 जून को जब मामले की सुनवाई होगी, पुलिस वाले खुद कोर्ट में हाजिर होंगे तो अदालत का क्या फैसला आता है.

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