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ममता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED, तीन अधिकारियों ने याचिका लगाई

IPAC Raid Row: ED का आरोप है कि सीएम, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर ने 8 जनवरी 2026 को ED की कानूनी कार्रवाई में बाधा डाली.

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IPAC raid case ED reached supreme court against mamata banerjee bengal police alleges obstruction
ED के तीन अधिकारियों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा. (Photo: ITG/File)
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सृष्टि ओझा
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12 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 06:47 PM IST)
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कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC पर रेड के मामले में एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 8 जनवरी को I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी करने वाले ED के तीन अधिकारियों ने 'रिट पेटिशन' दायर की है. याचिका में अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर रेड की कार्रवाई को बाधित करने का आरोप लगाया है.

ED का आरोप है कि सीएम, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर ने 8 जनवरी 2026 को ED की कानूनी कार्रवाई में बाधा डाली. दावा किया कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने तलाशी के दौरान ED अधिकारियों से जबरन दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस छीन लिए. ED ने अपनी याचिका में कहा कि उससे डिजिटल डिवाइस ले लिए गए और लगभग दो घंटे तक उसके अधिकारियों को पुलिस हिरासत में रखा गया. ED के अनुसार, धमकी के कारण पंचनामा की कार्यवाही प्रभावित हुई. इस रेड के बाद ED के अधिकारियों के खिलाफ कई FIR भी दर्ज की गईं. एजेंसी ने अपनी याचिका में इन्हें दुर्भावनापूर्ण और बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है. ED के मुताबिक कोलकाता के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में उसके अधिकारियों के खिलाफ चार FIR दर्ज की गईं हैं.

अधिकारियों के खिलाफ FIR वापस लेने की मांग

ED के अधिकारियों ने याचिका में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दायर FIR वापस लेने की भी मांग की. इसके अलावा एजेंसी ने जब्त किए गए डिजिटल सबूतों की सीलिंग, संरक्षण और फॉरेंसिक सुरक्षा की भी मांग की है. इससे पहले ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी और इस घटना की CBI जांच की मांग की थी. एजेंसी ने दावा किया था कि उसका निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने का अधिकार राज्य मशीनरी द्वारा कम कर दिया गया है. हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट के अंदर भीड़भाड़ के कारण अफरा-तफरी मच गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी थी.

ED ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि TMC के समर्थकों ने कोर्टरूम के अंदर हंगामा किया. ED के मुताबिक हाई कोर्ट के जज ने भी माना कि कोर्टरूम का माहौल सुनवाई के लिए अनुकूल नहीं था. ED का तर्क है कि ऐसे में हाई कोर्ट के सामने सुनवाई का विकल्प नहीं बचा है. इसके बाद ED ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बंगाल DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और अन्य पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है. एजेंसी ने आरोप लगाया कि इन्होंने BNS, 2023 के तहत गंभीर अपराध किए गए हैं, जिनमें-

  • चोरी, लूट, डकैती
  • आपराधिक अतिक्रमण
  • सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना
  • सबूतों को नष्ट करना और उनसे छेड़छाड़ करना
  • आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल हैं.

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बंगाल सरकार ने दायर किया कैविएट

ED ने अपनी याचिका में बताया है कि उसने PMLA की धारा 17 के तहत अधिकृत तलाशी ली थी. ED के मुताबिक पूरा मामला 2,742.32 करोड़ रुपये की कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ा है. ED का आरोप है कि 20 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई हवाला चैनलों के ज़रिए IPAC को भेजी गई. ED ने इस मामले में 8 जनवरी को I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर सेक्टर V स्थित I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी भी की थी. हालांकि I-PAC ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए किसी भी राजनीतिक या चुनावी डाटा को जब्त करने से इनकार किया. साथ ही जांच एजेंसियों के साथ पूरे सहयोग का दावा किया. इधर पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर किया है. कैविएट एक औपचारिक अनुरोध है, जिसमें यह मांग की जाती है कि संबंधित पक्ष को सुने बिना किसी मामले में कोई आदेश पारित न किया जाए. राज्य सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि ED को कोई भी अंतरिम राहत देने से पहले उसका पक्ष कोर्ट के सामने रखा जाए.

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