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शानो-शौकत वाले दिल्ली के जिमखाना क्लब का इतिहास जानते हैं? 100 साल पुराना है

केंद्र सरकार का कहना है कि जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास के ठीक बगल में है. ये एक संवेदनशील और स्ट्रेटेजिक इलाका है. सरकार को इस जमीन की जरूरत है ताकि यहां डिफेंस प्रोजेक्ट्स और सरकारी कामकाज से जुड़े प्रोजेक्ट्स डेवलप किए जा सकें.

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24 मई 2026 (पब्लिश्ड: 11:05 PM IST)
inside elite gymkhana club where membership waiting is 30 years and green card issued lutyens delhi
जिमखाना क्लब को दिल्ली के सबसे एलीट क्लब्स में से एक माना जाता है (PHOTO-India Today)
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दिल्ली के ऐतिहासिक जिमखाना क्लब से सरकार ने जमीन वापस मांग ली है. 5 जून तक उन्हें प्रॉपर्टी को खाली करने को कहा गया है. सरकार इस जगह को अपने कब्जे में लेकर यहां सरकारी प्रशासन और डिफेंस के प्रोजेक्ट्स लाएगी. इस क्लब को देश के सबसे बड़े ब्यूरोक्रेट्स, नेता, डिफेंस के अफसर और रईस व्यापारियों की 'अड़ी' माना जाता था. जैसे बनारस में पप्पू की अड़ी है, कुछ वैसा ही लेकिन एकदम शानो-शौकत से भरा. अब लुटियंस दिल्ली के इस 27.3 एकड़ के कैंपस को 5 जून तक खाली करने का आदेश जारी किया गया है.

क्यों खाली करवाया जिमखाना क्लब?

केंद्र सरकार का कहना है कि जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास के ठीक बगल में है. यह एक संवेदनशील और स्ट्रेटेजिक इलाका है. सरकार को इस जमीन की जरूरत है ताकि यहां डिफेंस प्रोजेक्ट्स और सरकारी कामकाज से जुड़े प्रोजेक्ट्स डेवलप किए जा सकें. क्लब को दिए गए आदेश में कहा गया कि 5 जून तक वो 'शांतिपूर्ण' तरीके से जगह को खाली कर दें.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि क्लब और उसके आसपास की जमीन का इस्तेमाल डिफेंस और सरकारी कामकाज के लिए होगा. साथ ही यहां सुरक्षित रेजिडेंस और टॉप के सरकारी विभागों का भी काम होगा.

जिमखाना क्लब का इतिहास

जिमखाना क्लब की शुरुआत 1913 में हुई थी. ब्रिटिश काल था इसलिए तब इसे इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब कहा जाता था. फिर 1930 में इसे सफदरगंज में शिफ्ट किया गया जहां ये आज तक मौजूद है. 1947 में देश को आजादी मिली तो इसके नाम में से इम्पीरियल हटा दिया गया. इस क्लब में स्विमिंग पूल, 26 ग्रास टेनिस कोर्ट, स्क्वाश कोर्ट, कई डाइनिंग हॉल, रेस्टोरेंट, बार और पार्टी वाली जगहें हैं. 

मेंबर बनने के लिए एक फार्मूला है जो हमेशा से अपनाया जाता रहा है. इसके मेंबर्स में 40 प्रतिशत सिविल सेवा के लोग, 40 प्रतिशत डिफेंस से जुड़े लोग और 20 प्रतिशत अन्य लोग जैसे नेता, बिजनेसमैन आदि होते हैं. क्लब में एंट्री को पैसे से जोड़कर नहीं, बल्कि दिल्ली के एलीट सर्कल में एंट्री के तौर पर देखा जाता है. कभी-कभी तो यहां मेंबरशिप के लिए 30-40 साल का वेटिंग टाइम है.

क्लब में एक 'ग्रीन कार्ड' सिस्टम भी है जो सवालों के घेरे में रहता है. इसमें पहले से मेंबर लोगों के परिवार वालों को मेंबरशिप में वरीयता दी जाती है. इसी को लेकर इसकी आलोचना भी होती है कि इसकी वजह से नए लोग क्लब में एंट्री नहीं ले पाते.

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जिमखाना क्लब की लोकेशन
क्लब की जांच चल रही थी

क्लब के कुछ मामलों की जांच के लिए मार्च 2016 में दिए गए आदेश के बाद केंद्र सरकार का यहां दखल शुरू हुआ था. मार्च 2020 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कथित तौर पर यहां कई नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी. इसके बाद सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 241 और 242 के तहत ट्रिब्यूनल का रुख किया. ये धाराएं उत्पीड़न और खराब मैनेजमेंट से संबंधित हैं.

फिर जून 2020 में ट्रिब्यूनल ने सरकार को दिल्ली जिमखाना क्लब के कामकाज की निगरानी के लिए जनरल काउंसिल के साथ-साथ 2 सदस्यों को नियुक्त करने और सुधार के उपाय सुझाने की अनुमति दी. केंद्र सरकार को क्लब के मामलों की जांच करने की भी अनुमति दी गई. इसके बाद अप्रैल 2022 में ट्रिब्यूनल ने सरकार को क्लब की जनरल कमेटी में 15 लोगों को नामित करने की भी अनुमति दी, ताकि वे क्लब के मैनेजमेंट की देखरेख कर सकें. 

इस अधिग्रहण को चुनौती देने वाले अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कृष्णेंदु दत्ता और वकील गौरव एम लिबरहान ने यह तर्क दिया था कि केंद्र सरकार को दखल देने से पहले यह साबित करना जरूरी था कि क्लब के मामले इस तरह से चलाए जा रहे थे जो जनहित के लिए नुकसानदेह हों. उन्होंने कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े निष्कर्षों को भी चुनौती दी थी.

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