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इंदौर में 'जहर' बना पानी! 9 मौतें, 162 भर्ती, कसूरवार कौन?

Indore Contamination Water: भागीरथपुरा के मराठी मोहल्ले में 6 महीने के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई. परिजनों के मुताबिक, 10 साल की मिन्नतों के बाद यह बच्चा हुआ था. पीड़ित मां ने कहा- "मेरा बच्चा चला गया, पता नहीं और कितने बच्चे इस गंदे पानी की भेंट चढ़ेंगे."

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इंदौर में अस्पताल में भर्ती मरीज. (ITG)
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धर्मेंद्र कुमार शर्मा
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1 जनवरी 2026 (Published: 07:35 PM IST)
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मानव जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत 'पानी' सिस्टम की नाकामी से 'जहर' भी बन सकता है. भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में यही हुआ. भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 9 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है. 162 मरीज अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं और हजारों लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं. यह संकट किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर की कथित घोर लापरवाही का नतीजा है.

कैसे जहर बना पीने का पानी?

जगह है मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का भागीरथपुरा. गंदे पानी से मौत का मामला तब खुला जब बुधवार, 28 दिसंबर को इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतों की पुष्टि की. इंडिया टुडे से जुड़े धर्मेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया कि यहां एक पुलिस चौकी के पास पेयजल की मेन पाइपलाइन के ठीक ऊपर बिना सेफ्टी टैंक के टायलेट बना दिया गया था.

इस लीकेज के कारण दूषित पानी के पाइपलाइन में मिलने का खतरा बना. यानी जिस पानी से लोगों को जिंदा रहना था, वही पानी उनकी मौत की वजह बन गया. इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव के निर्देश पर तुरंत मरम्मत का काम शुरू कराया गया. इसके बाद सबसे पहले फ्लशिंग, क्लोरीनेशन और सैंपल टेस्टिंग की जाएगी. पानी की लैब रिपोर्ट पूरी तरह संतोषजनक आने पर ही क्षेत्र में जलापूर्ति बहाल होगी.

नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार ने कहा,

"हम मानकर चल रहे हैं कि वाटर सप्लाई एक रीजन हो सकता है. सैंपल लैब में भेजे गए हैं, जिनके रिजल्ट आने हैं. एक कारण पानी लीकेज को माना जा सकता है. जहां भी ऐसे पॉइंट हैं, जहां पानी और सीवेज दोनों का जॉइंट है, उन सभी चैंबर्स को भी हमने क्लीन कराया है. टीम ने कई बार निरीक्षण किया है. मेन लाइन के लिए टेंडर स्वीकृत हो गया है और अमृत परियोजना में लाइनों को शामिल किया गया है, लेकिन यह समस्या उससे अलग सप्लाई लाइन की है."

इंदौर के BJP मेयर पुष्यमित्रा भार्गव ने बताया,

"करीब 116 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की जानकारी हमको मिली है. स्वास्थ्य विभाग, इंदौर नगर निगम और प्रशासन की सभी टीमें यहां हैं. लोगों की काउंसलिंग कर रही हैं. उनको जानकारी दे रही हैं. जहां तक घटना में किसकी गलती है, क्या गलती है? अभी प्राथमिकता से तो इलाज है. बाद में इसकी विस्तृत जांच कराकर जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कठोर कारवाई हम करेंगे."

क्लीन सिटी इंदौर में गंदे पानी का बुलबुला फूटा तो सियासत भी गर्माई. विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार को घेरा. चौतरफा आलोचना से घिरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी डैमेज कंट्रोल में जुट गई. बुधवार, 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर का दौरा किया और मरीजों से मिले. मध्यप्रदेश सीएम ने X पर लिखा,

"मरीजों का हाल जानने के बाद एमवाई अस्पताल में उच्चस्तरीय बैठक में चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा की और मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.

घटना सामने आने के बाद क्षेत्र के 40,000 से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कराई गई है. 212 मरीज अस्पताल में भर्ती किए गए, जिनमें से 50 मरीजों को उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है. शेष भर्ती 162 मरीजों की हालत स्थिर है. जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, शासकीय एवं निजी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों की तत्परता सराहनीय है. सभी के समन्वित प्रयासों से इस आपात स्थिति को नियंत्रित किया गया."

हालांकि, सरकार के डैमेज कंट्रोल को मोहन यादव सरकार में नगरीय विकास और आवास मंत्री ने थोड़ा डीरेल कर दिया. 31 दिसंबर को मृतकों के परिजनों से मिलने इंदौर-1 से विधायक कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे. हर परिवार को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि के चेक दिए गए. लेकिन इसी दौरान मंत्री का वीडियो सामने आया, जो खूब वायरल है.

जब NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी ने पानी की अव्यवस्था, मौत और रिफंड को लेकर सवाल पूछा, तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भड़क गए और बोले,

"तुम फोकट के प्रश्न मत पूछो, यार”

इसके बाद पत्रकार ने कहा कि मैं पीड़ितों से मिलकर आया हूं, तो विजयवर्गीय ने और विवादित बयान दिया,

"... घंटा होकर आए हो तुम?"

हालांकि, विजयवर्गीय ने अपने शब्दों के लिए बाद में माफी मांग ली. उन्होंने माफीनामे में लिखा,

"मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है. दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दुख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए. इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूं.

लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूंगा."

Kailash Vijayvargiya
कैलाश विजयवर्गीय का पोस्ट. (X @KailashOnline)

इस पर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र पटवारी उर्फ जीतू पटवारी ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने X पर लिखा,

"जहरीले पानी की जिम्मेदारी पर सवाल किया जाए तो मंत्री जी पत्रकार पर अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव जी यह क्या तमाशा कर रही है आपकी सरकार और आपके मंत्री. ना पीड़ितों को मुफ्त इलाज मिल रहा है, ना संवेदना, ऊपर से आपके अहंकारी मंत्री अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

थोड़ी सी भी शर्म बची है तो ऐसे बदतमीज मंत्रियों से नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा लीजिए."

Jitu Patwari
जीतू पटवारी का पोस्ट. (X @jitupatwari)

इसके अलावा कैलाश विजयवर्गीय टू-व्हीलर पर बिना हेलमेट पहने भी दिखे. इलाके में दौरा करने के दौरान विजयवर्गीय की पीछे बैठे थे, जबके पार्षद कमल वाघेला टू-व्हीलर चला रहे थे. दोनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था. पीछे चल रहे कार्यकर्ता भी बिना हेलमेट थे.

10 साल की ‘मिन्नत’ की मौत!

31 दिसंबर को भागीरथपुरा के मराठी मोहल्ले में 6 महीने के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई. परिजनों के मुताबिक, 10 साल की मिन्नतों के बाद यह बच्चा हुआ था. मां साधना साहू ने बताया कि लंबे समय से इलाके में गंदा पानी आ रहा था. उनका कहना है कि मजबूरी में पानी मिलाकर बाहर का दूध बच्चे को पिलाना पड़ा और वही पानी उसके लिए जानलेवा साबित हुआ.

साधना रोते हुए बोलीं,

"मेरा बच्चा चला गया, पता नहीं और कितने बच्चे इस गंदे पानी की भेंट चढ़ेंगे."

प्रशासन की कार्रवाई

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है. दी हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर इंदौर नगर निगम के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) डिपार्टमेंट के इनचार्ज सब-इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव को बर्खास्त किया गया है. जबकि जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और AE योगेश जोशी को सस्पेंड किया गया.

सरकार ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति भी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता IAS अधिकारी नवजीवन पवार कर रहे हैं. इसमें सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर शैलेश राय भी शामिल हैं. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह पैनल अगस्त में इलाके में नई सप्लाई लाइन के लिए जारी किए गए टेंडर को पूरा करने में हुई देरी की भी जांच करेगा.

कांग्रेस सड़क पर, FIR की मांग

मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है. 31 दिसंबर को कांग्रेस कार्यकर्ता बाणगंगा थाने पहुंचे और दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज करने की मांग की. पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोका, जिसके बाद थाने के बाहर नारेबाजी हुई. कांग्रेस का आरोप है कि मौतों के बावजूद आपराधिक कार्रवाई नहीं हो रही.

हाई कोर्ट की सख्ती

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में भी दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं. कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों में साफ पीने का पानी सुनिश्चित किया जाए और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज हो. अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी.

वीडियो: इंदौर के घरों में पहुंचा टॉयलेट का पानी, 3 की मौत 150 बीमार, सीएम मोहन यादव ने क्या किया?

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