इंदौर अग्निकांड में नया मोड़, पुगलिया के बेटे का दावा- 'EV चार्ज नहीं हो रही थी'
Indore businessman house fire: मध्यप्रदेश के इंदौर में एक बिजनेसमैन के घर पर आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई. बताया गया कि शुरुआत इलेक्ट्रिक कार में आग लगने से हुई, जो पूरे घर में फैल गई. घर के सारे दरवाजे भी लॉक हो गए थे. लेकिन अब मृतक के बेटे ने इन सभी दावों को खारिज किया है.

मध्यप्रदेश के इंदौर में एक बिजनेसमैन के घर में आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई. शुरुआती जांच में बताया गया कि पहले इलेक्ट्रिक कार में आग लगी, जो पूरे घर में फैल गई. फिर सिलेंडर भी फटा. पावर कट की वजह से घर के सारे इलेक्ट्रिक दरवाजे भी लॉक हो गए थे. इस घटना ने ईवी चार्जिंग और इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक पर कई सवाल खड़े किए. लेकिन अब घटना में जीवित बचे परिवार के एक सदस्य ने दोनों ही दावों को झुठला दिया है. उनका कहना है कि घटना के समय कोई भी कार चार्जिंग पर नहीं लगी थी.
18 मार्च को बृजेश्वरी एनेक्स कॉलोनी में बिजनेसमैन मनोज पुगलिया के घर पर आग लग गई थी. जो इतनी तेजी से पूरे घर में फैली कि एक ही परिवार के 8 सदस्यों की मौत हो गई. पुगलिया के बेटे सौरभ समेत चार अन्य लोग किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे, जिस वजह से उनकी जान बच सकी. अब उन्होंने पुलिस के ईवी चार्जिंग और लॉक से जुड़े सभी दावों को खारिज करते हुए कई सवाल उठाए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ पुगलिया ने सवाल पूछते हुए कहा,
"हम गाड़ी को नियमित रूप से चार्ज करते है. लेकिन उस दिन वह कनेक्टेड नहीं थी. जब कुछ भी प्लग-इन नहीं था, तो चार्जिंग पॉइंट से आग या शॉर्ट सर्किट कैसे हो सकता है?"
उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं. उनमें ऐसा लग रहा है कि घर के बाहर लगे एक बिजली के खंभे से चिंगारियां निकलीं और शायद वहीं कोई धमाका हुआ.
आगे उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक दरवाजों के लॉक की वजह से बचाव कार्य में हुई देरी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने बताया,
“घर में कोई इलेक्ट्रॉनिक लॉक नहीं है. दरवाजा हमेशा खुला रहता है. कोई भी इसके बारे में बता सकता है. ”
सौरभ ने आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर दमकल गाड़ियां और एंबुलेंस तेजी से पहुंचतीं, तो शायद मरने वालों की संख्या कम हो सकती थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी संभावित पहलुओं की जांच हो रही है. इसमें बिजली की खराबी, प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल आदि शामिल हैं. फोरेंसिक विशेषज्ञों, बिजली इंस्पेक्टर और फायर सेफ्टी अधिकारियों की एक विशेषज्ञ समिति को आग लगने के सटीक कारण का पता लगाने का काम सौंपा गया है.
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